E-Cigarette: लगातार टी-कैफे और बाजारों में ई-सिगरेट से कश लगाते दिख युवा और नाबालिग। यह दुकानों पर यह खुलेआम बिकती नहीं लेकिन जान-पहचान है तो आसानी से मिल जाती है।
E-Cigarette: संसद में टीएमसी सांसद पर ई-सिगरेट पीने के आरोप लगने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। राजधानी भोपाल में भी ई-सिगरेट पर लगा प्रतिबंध सिर्फ कागजों तक सीमित तक रहा है। धरातल पर शहर के कई इलाकों में ई-सिगरेट न सिर्फ इस्तेमाल हो रही है, बल्कि चोरी-छिपे बेची भी जा रही है। इस सिगरेट का इस्तेमाल युवा, युवती और स्कूल, कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र इसकी चपेट में आते हैं।
भोपाल शहर के एमपी नगर, न्यू मार्केट, जहांगीराबाद, ऐशबाग जैसे इलाकों में टी-कैफे और बाजारों के आसपास युवा ई-सिगरेट से कश लगाते देखे जा सकते हैं। कई जगह चाय की दुकानों और कैफे के भीतर भी ई- सिगरेट का इस्तेमाल हो रहा है। यह दुकानों पर यह खुलेआम बिकती नहीं लेकिन जान-पहचान है तो आसानी से मिल जाती है।
ई-सिगरेट एक इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट है। ये एक बैटरी चलित उपकरण है जो निकोटीन या गैर-निकोटीन के वाष्पीकृत होने वाले घोल की सांस के साथ सेवन की जाने वाली खुराक प्रदान करता है। यह सिगरेट, सिगार या पाइप जैसे धुम्रपान वाले तम्बाकू उत्पादों का एक विकल्प है। तथाकथित निकोटीन वितरण के अलावा यह वाष्प पिये जाने वाले तम्बाकू के धुएं के समान स्वाद और शारीरिक संवेदन भी प्रदान करती है, जबकि इस क्रिया में दरअसल कोई धुआं या दहन नहीं होता है।
इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट एक लंबी ट्यूब के रूप में होती है और इसका बाहरी आकार-प्रकार वास्तविक धुम्रपान उत्पादों जैसे सिगरेट, सिगार और पाइप जैसा डिजाइन किया जाता है। यह एक कलम की आकार की लगती है। अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उपकरण दोबारा उपयोग योग्य होते हैं, जिनके भागों को बदल कर फिर से भरा जा सकता है।
अनेक डिस्पोजेबल इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट भी विकसित किये गए हैं। ई-सिगरेट को पीने के लिए जलाने की जरूरत नहीं होती। इससे कश लेने पर दूसरी साइड में लगा एलईडी बल्ब जलने लगता है। नॉर्मल सिगरेट में आप धूएं को अंदर खींचते हैं। लेकिन इसमें जो कार्टेज में लिक्विड भरी गई थी, वह कश लगाने पर भाप में बदलता है और हम असल में धूएं की जगह भाप को ही अंदर खींच रहे होते हैं।
माउथपीस: यह एक ट्यूब के अंदर एक छोटा प्लास्टिक कप होता है जिसमें लिक्विड सॉल्यूशन में भिगोया हुआ शोषक पदार्थ होता है। यानी ऐसा पदार्थ होता है जो किसी तरह चीज को सोख सकता हो।
एटमाइजर: यह लिक्विड को गर्म करता है, निकोटिन भाप में बदलता है ताकि व्यक्ति इसे अंदर ले सके।
बैटरी: यह हीटिंग एलिमेंट को पावर देता है।
सेंसर: यह हीटर को सक्रिय करता है जब यूजर डिवाइस को चूसता है।
सॉल्यूशन: ई-लिक्विड में निकोटीन, एक बेस, जो आमतौर पर प्रोपलीन ग्लाइकॉल होता है, और फ्लेवरिंग का मिश्रण होता है।
कैंसर रोग विशेषज्ञ ओपी सिंह ने बताया कि ई-सिगरेट भी सामान्य सिगरेट जितनी ही नुकसानदेह है। इससे कैंसर, हार्ट अटैक और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। भोपाल में हर साल करीब 1 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं, जिनमें 40 से 50 फीसदी केस का कारण तंबाकू है।
अब पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी ई-सिगरेट का इस्तेमाल कर रही हैं। भारत सरकार ने साल 2019 में ई-सिगरेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इसके लिए ई-सिगरेट प्रतिषेध अधिनियम 2019 बनाया गया, जिसके तहत इसकी बिक्री, प्रोडक्शन, स्टोरेज या विज्ञापन को गैरकानूनी घोषित किया गया।
ई-सिगरेट एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। इसमें बैटरी से तरल निकोटीन, फ्लेवर और रसायनों को गर्म कर धुएं बनाता है। इसमें तंबाकू नहीं होता, लेकिन इसके रसायन फेफड़ों, हृदय और मस्तिष्क पर गंभीर असर डालता है।
डिस्क्लेमर- धुम्रपान सेहत के लिए हानिकारक है।