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Mahadev Ghat Laxman Jhula: खल्लारी मंदिर के रोप-वे हादसे के बाद खुलासा, खारुन का लक्ष्मण झूला भी खतरनाक, 3 साल से मेंटेनेंस नहीं…

Mahadev Ghat Laxman Jhula: महादेवघाट में खारुन नदी के बीचोबीच लक्ष्मण झूला अब खतरनाक हो चुका है, क्योंकि पिछले तीन-चार साल से इसका मेंटेनेंस नहीं कराया जा रहा है...
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Mar 24, 2026
Mahadev Ghat Laxman Jhula: खल्लारी मंदिर के रोप-वे हादसे के बाद खुलासा, खारुन का लक्ष्मण झूला भी खतरनाक, 3 साल से मेंटेनेंस नहीं...
खारुन का लक्ष्मण झूला (Photo Patrika)

Mahadev Ghat Laxman Jhula: @Kamal Shukla। खारुन नदी पर बना लक्ष्मण झूला अब लोगों के लिए खतरे का कारण बनता जा रहा है। पिछले तीन वर्षों से इसका कोई मेंटेनेंस नहीं होने के चलते पुल की हालत जर्जर हो गई है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। महादेवघाट में खारुन नदी के बीचोबीच लक्ष्मण झूला अब खतरनाक हो चुका है, क्योंकि पिछले तीन-चार साल से इसका मेंटेनेंस नहीं कराया जा रहा है।

ऐसे में झूले पर ज्यादा भार पड़ने पर किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता है। नवरात्र के दौरान खल्लारी मंदिर के रोप-वे में हुए ह्दयविदारक हादसे के बाद पत्रिका टीम ने 130 मीटर लंबे सस्पेंशन रैंप वाले लक्ष्मण झूले के मेंटेनेंस की पड़ताल की तो पता चला कि इसके लिए कोई एजेंसी ही तय नहीं हुई है। जबकि महादेवघाट जैसे धार्मिक स्थान पर हमेशा लोगों की भीड़ रहती है।

6 करोड़ की लागत से बना

पिछली भाजपा सरकार में सिंचाई मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने राजधानी के धार्मिक महत्व का स्थान महादेवघाट में साढ़े 6 करोड़ की लागत से लक्ष्मण झूला बनवाया था, ताकि यहां आने वाले लोग महादेवघाट में प्राचीन हटकेश्वर नाथ महादेव का अभिषेक पूजन करें और लक्ष्मण झूला से अमलेश्वर तरफ गार्डन का भी आनंद ले सके।

नदी से 150 फ़ीट ऊपर

यह झूला नदी तल से 150 फीट ऊंचाई पर है, जो केबल के सहारे लटक रहा है। उसका रैम्प सस्पेंशन वाला है। जब लोग पैदल उस पर चलते हैं, तो झुक जाता है। सिंचाई विभाग के इंजीनियरों का कहना है कि लक्ष्मण झूले का निर्माण तकनीक के माध्यम से कराया गया है। यह काम मध्यप्रदेश की एजेंसी ने कराया था। एग्रीमेंट के अनुसार मेंटेनेंस की शर्तें थी, जिसकी अवधि तीन साल पहले समाप्त हो चुकी है।

घोर लापरवाही सामने आई

जल संसाधन विभाग के सूत्रों के अनुसार खारुन नदी का रायपुर दायरा विभाग के डिवीजन नंबर में एक में आता है। जो कि कालीमाता मंदिर के ठीक पीछे संचालित हो रहा है। इस डिवीजन के इंजीनियरों ने लक्ष्मण झूला के मेंटेनेंस की अवधि समाप्त होने के बाद तकनीकी एजेंसी तय करने का प्रस्ताव विभाग के आला अफसरों को भेजा, परंतु स्वीकृति देने के मामले में घोर लापरवाही बरती गई। यह खुलासा हुआ कि इसी वजह से मरम्मत कराने के लिए आज तक एजेंसी ही विभाग तय नहीं कर सका है। जबकि समय-समय पर मरम्मत कराना जरूरी होता है। हर साल 30 से 35 लाख का खर्चा आने का आंकलन है।

ऐसे हुआ हादसा

श्रद्धालुओं को पहुंचाने वाला रोपवे अचानक तकनीकी खराबी का शिकार हो गया, जिससे दो ट्रॉलियां ऊंचाई से गिर पड़ीं। इस हादसे में 16 लोग घायल हो गए, जबकि रायपुर के राजा तालाब क्षेत्र की 28 वर्षीय आयुषी की मौत हो गई। घायलों में चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। नवरात्रि के चलते मंदिर में सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। लगभग 4,000 फीट ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए रोपवे प्रमुख साधन है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब दो ट्रॉलियां यात्रियों को लेकर ऊपर की ओर जा रही थीं, तभी अचानक केबल टूटने या तकनीकी गड़बड़ी के कारण वे नियंत्रण खो बैठीं और तेजी से नीचे गिर गईं।

एजेंसी तय करने की प्रक्रिया जारी

निर्माण एजेंसी का कार्यकाल तीन साल पहले ही समाप्त हो चुका है। इसके बाद मेंटेनेंस की राशि स्वीकृत का प्रस्ताव भेजा गया था। उसकी स्वीकृति अब मिल गई है। मेंटेनेंस एजेंसी तय करने के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। अगले दो से तीन महीने बाद लक्ष्मण झूले का मेंटेनेंस शुरू हो जाएगा।

-ललित कुमार रावटे, कार्यपालन अभियंता, सिंचाई डिवीजन

Updated on:
24 Mar 2026 01:20 pm
Published on:
24 Mar 2026 01:20 pm