CG News: महासमुंद के तेंदुवाही गांव के गेंदलाल कोकड़ी ने पथरीली जमीन पर 200 पौधे लगाकर हरियाली की मिसाल पेश की है।
जहां ज्यादातर लोग पथरीली जमीन को खेती के लायक नहीं मानते, वहीं महासमुंद जिले के पटेवा क्षेत्र के तेंदुवाही गांव के रहने वाले गेंदलाल कोकड़ी ने उसी जमीन को हरियाली की पहचान बना दिया। करीब 200 पौधे लगाकर उन्होंने न सिर्फ बंजर जमीन को हरा-भरा किया, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक प्रेरक मॉडल भी पेश किया है।
गेंदलाल अपने 16 एकड़ के खेत में पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से खेती करते हैं। वे मानते हैं कि खेत को हर मौसम में जोतना जरूरी नहीं होता। बारिश के मौसम में खेती के विज्ञान को समझाते हुए वे कहते हैं कि खेत को कुछ समय खाली छोड़ना उसकी उत्पादकता को बढ़ाता है और मिट्टी को दोबारा जीवंत करता है।
जल संरक्षण को लेकर गेंदलाल की सोच व्यावहारिक और दूरदर्शी है। उन्होंने अपने खेत में पाइपलाइन सिस्टम विकसित किया है, जिसके जरिए पास के तालाब का ओवरफ्लो और जंगल से आने वाला बारिश का पानी सीधे खेतों तक पहुंचता है। इससे न तो पानी बर्बाद होता है और न ही भूमिगत जल पर दबाव पड़ता है।
पेशे से शिक्षक गेंदलाल का मेडिकल में चयन भी हुआ था। परिवार उन्हें इंजीनियर बनाना चाहता था, इसी वजह से उन्होंने इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री की पढ़ाई की। लेकिन जीवन ने उन्हें अलग राह दिखाई। अपनी गुरु मां के आदेश को उन्होंने जीवन का मूल मंत्र बना लिया— “पैसे से पैसा मत कमाओ, बल्कि कमाए हुए पैसों से समाज को कुछ दो। मानव के भीतर मानवीय मूल्य स्थापित करो।” इसी सोच ने उन्हें शिक्षक और समाज के लिए काम करने वाला किसान बनाया।
गेंदलाल कहते हैं कि आज सबसे बड़ा खतरा लगातार घटता भूमिगत जल है। रासायनिक खाद और बोरवेल आधारित खेती ने प्रकृति का संतुलन बिगाड़ दिया है। उनका मानना है कि सरकार के साथ-साथ समाज को भी जल संरक्षण के उपाय अपनाने होंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को बचाया जा सकता है।
गांव के विकास को लेकर ग्रामीण गेंदलाल की सोच अलग है। वे कहते हैं— “केवल कंक्रीट की सड़क या बिजली आ जाना ही विकास नहीं है। असली विकास तब है जब इंसान, इंसान के साथ रहना सीखे और अपनी जरूरतों को समझदारी से पूरा करे।”
पथरीली जमीन पर उगी यह हरियाली सिर्फ खेती की कहानी नहीं है, बल्कि संवेदनशील सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवीय मूल्यों से भरे विकास की मिसाल है—जो बताती है कि अगर नीयत सही हो, तो धरती भी जवाब देती है।