Global Economy: दुनिया में कई देश अपना सोना विदेशों से वापस बुला रहे हैं ताकि आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो सके। वहीं भारत में भी सोने को लेकर निवेश बढ़ा है। लोग इसे सिर्फ गहनों नहीं, बल्कि सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं। जानिए क्या है इसके पीछे का बड़ा कारण।
Gold Repatriation India: ग्लोबल इकोनॉमी में एक खामोश गोल्ड वॉर छिड़ चुका है। कई देश अब अपना सोना विदेशों से वापस मंगा रहे हैं। जर्मनी से लेकर पोलैंड तक, कई देशों ने अपने गोल्ड रिजर्व की घर वापसी शुरू कर दी है। यह सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि भरोसे, सुरक्षा और भविष्य की रणनीति से जुड़ा बड़ा कदम है। इस वैश्विक बदलाव के बीच भारतीय निवेशक सिर्फ परंपरा के लिए गहने नहीं खरीद रहे, बल्कि आर्थिक सुरक्षा के लिए सोने को एक मजबूत हथियार के रूप में अपना रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की स्थिति को मजबूत कर रहा है और आम आदमी के निवेश के स्तर को भी लगातार बढ़ा रहा है।
जर्मनी ने 2013 से 2017 के बीच न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक (Federal Reserve Bank of New York) और फ्रांस से अपना करीब 674 टन सोना वापस मंगवाया। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य अपने स्वर्ण भंडार पर घरेलू नियंत्रण को मजबूत करना और जनता का भरोसा बढ़ाना था। रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी के पास कुल लगभग 3,350 मीट्रिक टन सोना मौजूद है, जो उसे दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड रिजर्व रखने वाले देशों में शामिल करता है।
नीदरलैंड ने 2014 से पहले अपना आधे से ज्यादा सोना करीब 51% न्यूयॉर्क के बैंक में रखा था। लेकिन जब देश की जनता और संसद में यह मांग उठी कि मुसीबत के समय सोना अपने ही पास होना चाहिए, तो 2014 में सरकार ने अमेरिका से करीब 122 टन सोना वापस मंगा लिया। हालांकि इसके बावजूद आज भी उसका लगभग 31% (करीब 189.88 टन) सोना न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक की तिजोरियों में ही सुरक्षित रखा है। ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक तालमेल और लेनदेन बना रहे।
हंगरी ने 2018 में लंदन से अपना 3.1 टन सोना वापस मंगाया था। लेकिन इसके बाद उन्होंने अपना स्टॉक 10 गुना बढ़ा दिया और 2021 तक इसे 94.5 टन तक पहुंचा दिया। वहीं पोलैंड ने भी 2019 में लंदन से अपना 100 टन सोना वापस मंगवा लिया। पोलैंड की योजना यह है कि वे अपने पास ज्यादा से ज्यादा सोना रखें ताकि उनकी अर्थव्यवस्था मजबूत रहे। पोलैंड के सेंट्रल बैंक कुल खजाने का 20% हिस्सा सोने के रूप में रखा है। अब उनके पास करीब 420 टन सोने का भंडार हो गया है।
भारत में भी सोने को लेकर जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। 2026 की शुरुआती तीन महीनों में भारतीयों ने रिकॉर्ड तोड़ खरीदारी की है, जो पिछले साल के मुकाबले 10% ज्यादा है। इस दौरान देश में कुल 151 टन सोना खरीदा गया, जिसकी कीमत करीब 2,275 अरब रुपये (25 अरब डॉलर) पहुंच गई है। यह अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है और दिखाता है कि भारतीय निवेशक सोने पर कितना भरोसा कर रहे हैं।
भारत में सोने को लेकर कई बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय निवेशक सोने को सिर्फ गहनों के तौर पर नहीं, बल्कि एक सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल सोने की सिक्कों और बिस्कुट की मांग में 54% का भारी उछाल आया है, जो करीब 41 टन तक पहुंच गई है। लोग अब दिखावे के बजाय बचत पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। बढ़ती कीमतों की वजह से उनकी खरीदारी में थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन ऊंचे दामों के कारण इस पर होने वाला खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। भारतीयों ने करीब 151 टन सोना खरीदा है, जिसकी बाजार में कीमत 2,275 अरब रुपये के आसपास है। महंगाई के दौर में भी भारतीयों का भरोसा सोने पर कम नहीं हुआ है, बल्कि निवेश के मामले में यह पहली पसंद बना हुआ है।
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के लिए 2026 की शुरुआत थोड़ी सुस्त रही है। सोने की मांग में पहले जैसी तेजी नहीं देखी गई, जिसका सबसे बड़ा कारण निवेशकों का गोल्डएक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Exchange Traded Fund ) से पैसा निकालना है। मार्च के महीने में अमेरिकी निवेशकों ने ईटीएफ से अपना काफी पैसा बाहर निकाल लिया। अमेरिका के आम लोग अभी भी सोने के सिक्कों और बिस्कुट में निवेश कर रहे हैं, जिससे बाजार को थोड़ा सहारा मिला है। लेकिन सोने की आसमान छूती कीमतों ने गहनों के बाजार पर बुरा असर डाला है और अमेरिका में गहनों की मांग अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिका के पास आज भी कुल 8,133 मीट्रिक टन सोने का विशाल भंडार है, जो उसे दुनिया में सबसे आगे रखता है।
| देश | गोल्ड रिजर्व (मीट्रिक टन में) |
|---|---|
| अमेरिका | 8,133 |
| जर्मनी | 3,350 |
| इटली | 2,452 |
| फ्रांस | 2,437 |
| रूस | 2,327 |
| चीन | 2,306 |
| स्विट्जरलैंड | 1,040 |
| भारत | 880 |
साल 2025 सोने के बाजार में ऐतिहासिक रहा। इस साल सोने की मांग ने सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और साल भर में सोने की मांग 5,000 टन के पार निकल गई थी। पूरे साल में कीमतों ने एक-दो बार नहीं, बल्कि 53 बार अपने ही पुराने रिकॉर्ड तोड़े और नई ऊंचाइयों को छुआ। यह दिखाता है कि पिछले साल दुनिया भर में निवेशकों के बीच सोने को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है।
सोना किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए 'सेफ्टी नेट' की तरह काम करता है। वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ती है या मुद्रा कमजोर होती है, तब गोल्ड रिजर्व देश को वित्तीय भरोसा और स्थिरता देता है। केंद्रीय बैंक जैसे भारतीय रिजर्व बैंक ( Reserve Bank of India) अपने भंडार में सोना रखकर विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम करते हैं और संकट के समय इसे गिरवी रखकर इस्तेमाल के लिए नकद पैसा हासिल कर सकते हैं। साथ ही, ज्यादा गोल्ड रिजर्व होने से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा बढ़ता है, जिससे देश की क्रेडिट रेटिंग और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।