Health Influencers Good or Bad : इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर ना जाने कितने हेल्थ इंफ्लुएंसर हर दिन बीमारी दूर करने की गारंटी देते रहते हैं। हर हफ्ते 4 करोड़ यूजर्स AI से हेल्थ के सवाल जवाब खोज रहे हैं। ऐसे में ये समझना जरूरी है कि ये सबकुछ कितना सेफ है।
Health Influencers Good or Bad :"ये खा लो कैंसर कभी नहीं होगा, हार्ट अटैक से बचाती हैं ये चीजें…", ऐसे ना जाने कितनी वीडियो इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर होंगी जो बीमारी दूर करने की गारंटी देती हैं। हाल ही में एक खबर आई है कि रूस के मॉस्को का एक 17 साल का युवा इंटरनेट पर देखे गए एक वीडियो से इतना प्रभावित हुआ कि वो अपने ही शरीर से खून निकालकर पीना शुरू कर दिया। ऐसे कई केस भारत में भी देखने को मिलते हैं। हेल्थ सेक्टर के लिए ये एक नई चुनौती है और लोगों के लिए जोखिम। आइए, हम समझते हैं कि कैसे हेल्थ इंफ्लुएंसर आपकी हेल्थ को बिगाड़ने का काम कर रहे हैं।
जैसे हम मॉस्को वाली खबर को ही देख लें। बताया जा रहा है कि वो युवक शरीर में खून बढ़ाने के लिए अपना खून निकालकर पीने का काम कर रहा था। उसकी स्थिति गंभीर हो चुकी है कि खून की उल्टी करने लगा। अब उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां इलाज जारी है।
सोशल मीडिया के अलावा अब एआई से लोग इलाज करना शुरू कर चुके हैं। OpenAI की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि हर सप्ताह करीब 4 करोड़ यूजर्स मेडिकल और हेल्थ संबंधित जानकारी के लिए इस AI चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तरह आप समझ सकते हैं कि लोग ऑनलाइन डॉक्टरी सलाह लेने के लिए किस तरह से आतुर हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क में एक 60 साल के बुजुर्ग ने ChatGPT से पूछा कि अपने खाने से नमक यानी सोडियम क्लोराइड को कैसे हटाएं? इस पर ChatGPT ने सलाह दी कि सोडियम ब्रोमाइड यूज करें। आपको जानकार हैरानी होगी कि यह पहले 20वीं सदी में दवाओं में इस्तेमाल होता था, लेकिन अब इसे 'जहरीला' मानते हैं। पर, अधूरी जानकारी के कारण इस्तेमाल करने लगा और फिर कुछ दिन बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
सिर्फ दो केस से ही आप समझ सकते हैं कि ये कितना खतरनाक है!
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसीन पर प्रकाशित शोध में 12 स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ गहन साक्षात्कार के आधार पर ये आंका गया कि हेल्थ इंफ्लुएंसर के सलाह सही है या नहीं, क्यो असर हो सकता है?
शोध में बताया गया है कि सोशल मीडिया पर दो प्रकार के हेल्थ इंफ्लुएंसर हैं- डॉक्टर या हेल्थ एक्सपर्ट और सिर्फ हेल्थ इंफ्लुएंसर (जिनके पास कोई डिग्री नहीं)। इसमें ये समझाया गया है- एक दिन माया ने एक वीडियो डाला: "दोस्तों, मैंने अपनी दवाइयां छोड़ दी हैं और अब मैं सिर्फ इस खास जड़ी-बूटी का काढ़ा पीती हूं। मैं ठीक हो गई! #NaturalHealing"
हालांकि, माया का इरादा बुरा नहीं था, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि उसका यह अनुभव 'ओवर-जनरलाइज्ड' था। यानी, जो उसके लिए काम कर रहा था, वह शायद हजारों अन्य बीमार लोगों के लिए जानलेवा हो सकता था।
दूसरी तरफ थे डॉ. समीर, एक अनुभवी फिजिशियन जिन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपना अकाउंट बनाया था। वे एक 'हेल्थ एक्सपर्ट कंटेंट क्रिएटर' (HECC) थे। डॉ. समीर को चिंता होती थी जब मरीज उनके क्लीनिक आकर कहते, "डॉक्टर साहब, इंटरनेट पर एक इन्फ्लुएंसर ने कहा है कि यह दवा लेने की जरुरत नहीं है।"
कहानी में मोड़ तब आया जब माया के एक फॉलोअर ने वह काढ़ा पीकर अपनी हेल्थ बिगाड़ ली और वह डॉ. समीर के पास पहुंचा। डॉ. समीर ने महसूस किया कि अब चुप रहने का समय नहीं है। उन्होंने माया के वीडियो को 'डिबंक' (सच्चाई उजागर) करने के बजाय एक 'एजुकेशनल कोलैबोरेशन' का रास्ता चुना।
डॉ. समीर ने एक वीडियो बनाया जिसमें उन्होंने कहा, "माया का अनुभव उनके लिए सही हो सकता है, लेकिन विज्ञान कहता है कि हर शरीर अलग है। बिना डॉक्टरी सलाह के इलाज बदलना 'मिसइन्फोर्मेशन' (गलत सूचना) फैलाने जैसा है।"
यहां पर आप ये समझ सकते हैं कि किसी भी तरह की डॉक्टरी सलाह ऑनलाइन लेकर पालन करना खतरनाक है। चाहे वो जानकारी देने वाला कोई भी क्यों ना हो।
डॉ. जयेश शर्मा (कैंसर सर्जन) कहते हैं, कैंसर को लेकर भी कितने ज्ञानी बैठे हैं, ये इंटरनेट पर पता चलता है। वास्तव में ये हेल्थ इंफ्लुएंसर किसी वायरस से कम नहीं, ये मरीज के दिमाग पर हावी होते जा रहे हैं। मरीज भी हमारे पास आने के बाद हमसे उसको लेकर सवाल करते हैं। इसलिए, अब मैं खुद हेल्थ की गलत जानकारियों को लेकर सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाने का काम कर रहा हूं। इसके लिए ठोस नीति आनी चाहिए। अगर इन्हें रोका नहीं गया तो आने वाले समय पर एक बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।
डॉ. मनीष अरोड़ा (होम्योपैथिक) ने बताया, सोशल मीडिया पर होम्यो दवाओं को लेकर भी कई तरह की गारंटी करते हैं इंफ्लुएंसर। जबकि, खुद के सलाह से इन दवाओं को लेना जानलेवा हो सकता है। कई मरीज इस चक्कर में खुद को और बीमार बना देते हैं और फिर हमारे पास इलाज के लिए आते हैं।
इसके समाधान को लेकर दोनों डॉक्टर की राय है कि सरकार की ठोस नीति के साथ-साथ हमें खुद के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। आप भले अपनी जानकारी के लिए एआई या गूगल या सोशल मीडिया से जानकारी ले लें लेकिन, अंतिम निर्णय किसी डॉक्टर से सलाह लेकर ही लें।