Healthy Heart Dil ka sach series part 4: पिछले एपिसोड में हमने पढ़ा कि कैसे हार्ट अठैक से बचा जा सकता है, अब इस एपिसोड में जानें हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर, अगर आप डायबिटीज के शिकार हैं, तो यह जानकारी आपके बड़े काम की है...
Healthy Heart Dil ka sach series part 4: दिल का दौरा या Heart Attack कोई एक दिन में या अचानक आने वाली घटना या बीमारी नहीं है। डॉक्टर्स का कहना है कि इसके पीछे शरीर के अंदर वर्षों तक चलने वाली एक जटिल प्रक्रिया होती है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे नसों को नुकसान पहुंचाती है, जो ब्लॉकेज बनकर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा देती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में दो बातें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। एक तो शरीर में बनने वाली सूजन या Inflammation और धमनियों में जमा होने वाला प्लाक। दिलचस्प बात ये है कि इन दोनों प्रक्रियाओं का संबंध हमारे रोजमर्रा के खानपान और खासतौर पर ज्यादा मीठा और रिफाइंड कार्बोहाड्रेट से जुड़ा हुआ है।
एमबीबीएस, एमडी और हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. विनोद कोठारी कहते हैं कि अगर कोई भी शख्स दिल का जोखिम (Healthy Heart) कम करना चाहता है, तो सबसे पहली जरूरत है कि वो अपनी डाइट पर ध्यान दे। खासतौर पर उन चीजों को खाना बंद या कम करना होगा, जो शरीर में शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाती हैं। इनमें मीठे पेयपदार्थ खासतौर पर कोल्डड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, पैकेज्ड ज्यूस, प्रोसेस्ड स्नैक्स, मिठाइयों का ज्यादा सेवन। ये सभी चीजें अगर आपके खाने का हिस्सा हैं, तो जान लें कि ये शरीर में शुगर का लेवल तेजी से बढ़ाते हैं जिनसे हार्मोनल संतुलन प्रभावित हो सकता है।
कार्बोहाइड्रेट शरीर के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। इसलिए इन्हें पूरी तरह छोड़ना संभव नहीं है। लेकिन यह जरूरी है कि हम किस प्रकार के कार्बोहाइड्रेट का चयन करते हैं। रिफाइंड और जल्दी पचने वाले कार्बोहाइड्रेट शरीर में शुगर लेवल तेजी से बढ़ा देते हैं। जबकि फाइबरयुक्त कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे पचते हैं और शरीर को ऊर्जा देते हैं। ऐसे में आपको ध्यान देना होगा कि क्या कम करें? कार्बोहाइड्रेट वाले ऐसे पदार्थ जिन्हें कम करने की बेहद जरूरत है इन्हें आज ही छोड़ना या कम से कम करना सही होगा...
भोपाल एम्स के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (Endocrinologist) या हार्मोन एक्सपर्ट डॉ. अल्पेश गोयल कहते हैं कि ये सवाल लोग अक्सर करते हैं कि मीठा कम करने या छोड़ने की सलाह तो उन्हें दी जाती है जो डायबिटिक या शुगर के मरीज हों, जिन्हें वजन घटाना हो, इसका हार्ट की बीमारियों से क्या लेना-देना…? डॉ. गोयल बताते हैं कि यदि असल में यह संबंध मीठा खाने का नहीं, बल्कि हार्मोन इंसुलिन से जुड़ा है। जब हम शुगर या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट को डाइट ज्यादा मात्रा में शामिल करते हैं, तो शरीर का ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए ज्यादा इंसुलिन की आवश्यकता होती है। इसलिए पैंक्रियाज इस इंसुलिन हार्मोन को ज्यादा मात्रा में बनाने लगता है। इंसुलिन की ज्यादा मात्रा बनने की प्रक्रिया यदि लंबे समय तक बनी रहती है तो शरीर में कई तरह के मेटाबोलिक बदलाव शुरू हो सकते हैं।
लगातार बढ़े हुए इंसुलिन स्तर से शरीर धीरे-धीरे उसके प्रति कम संवेदनशील हो सकता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में इंसुलिन रेसिटेंस कहा जाता है। इसके कारणों में ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रख पाना मुश्किल हो जाता है। शरीर में सूजन की प्रक्रिया तेज हो सकती है। मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ये बड़े कारण हैं कि ज्यादातर एक्सपर्ट्स इसे दिल की बीमारियों से जोड़कर (Healthy Heart) देखते हैं।
जब शरीर को एनर्जी की जरूरत से ज्यादा ग्लूकोज मिलने लगता है, तो वह उसे बर्न या खर्च नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में लिवर एक्सट्रा ग्लूकोज को एक अलग रूप में बदलकर स्टोर कर देता है। यह प्रक्रिया शरीर में ट्राइग्लिसराइड नामक फैट के रूप में जमा होने लगती है। अगर लंबे समय तक स्थिति यही बनी रहे कि शरीर को जरूरत से ज्यादा ग्लुकोज मिल रहा है और लिवर उसे स्टोर करता जा रहा है, तो खून में ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ सकता है। जो दिल की सेहत के लिए जोखिम भरा माना जाता है।
डॉक्टर विक्रम वाटी बताते हैं कि नसों या धमनियों की अंदरूनी परत बेहद संवेदनशील होती है। जब लंबे समय तक ब्लड शुगर लेव अनकंट्रोल्ड यानी हाई लेवल पर बना रहता है, तो हार्मोनल असंतुलन के साथ ही अन्य कई कारणों से इस परत को नुकसान पहुंचने लगता है। शरीर इस नुकसान को ठीक करने की कोशिश करने लगता है। इसी प्रक्रिया के दौरान वहां फैट यानी वसा, कोलेस्ट्रॉल और अन्य तत्व जमा होने लगते हैं। धीरे-धीरे यही जमा पदार्थ प्लाक का रूप ले लेते हैं।
इस सवाल का जवाब देते हुए हार्ट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि एक बार शरीर में प्लाक बनने लग जाए तो इसके कारण रक्तवाहिकाएं संकरी होना शुरू हो जाती हैं। इनसे रक्त प्रवाह प्रभावित हो जाता है। रक्त का थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है। अगर यह थक्का दिल की नसों को रक्त पहुंचाने वाली रक्तवाहिनियों में बन जाता है, तो हार्ट अटैक हो सकता है।
डॉ. विनोद कोठारी बताते हैं कि शरीर में सूजन और मेटाबोलिक असंतुलन के कारणों में अकेला खानपान ही नहीं बल्कि लाइफस्टाइल से जुड़े कई कारण भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।
-लगातार मानसिक तनाव
-नींद की कमी
-अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड
इन कारकों का असर अलग-अलग नहीं बल्कि एकसाथ दिल की सेहत को प्रभावित कर सकता है।
-संतुलित आहार
-नियमित एक्सरसाइज
-तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन जैसी टेक्निक्स फॉलो करना
-कम से कम 7 घंटे की नींद जरूर लें
-नियमित तौर पर स्वास्थ्य की जांच करवाना
कई एक्सपर्ट्स डाइट पैटर्न या नियंत्रित उपवास की सलाह भी दे सकते हैं। लेकिन ऐसा अपने डॉक्टर से पूछने के बाद ही करें।
Healthy Heart Dial ka Sach Series part 4 पढ़कर आपको समझ आ गया होगा कि दिल की बीमारियां एक दिन या अचानक होने वाला घटनाक्रम नहीं है। शरीर में विकसित होने वाली लंबी प्रक्रिया का नतीजा है। ज्यादा मीठा, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और असंतुलित जीवनशैली शरीर में हार्मोनल बदला, सूजन और ट्राइग्लिसराइड बढ़ने जैसी स्थितियां पैदा कर सकते हैं। अगर इन कारकों को समय रहते नियंत्रित किया जाए, तो दिल की सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। हेल्दी हार्ट के लिए जानकारी देने वाली ये रिपोर्ट आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं। Healthy Heart की दिल का सच सीरीज के अगले पार्ट 5 में आप जानेंगे दिल से जुड़े ऐसे ही सच जो आपको आमतौर पर डॉक्टर्स कभी नहीं बताते। आगे की रोचक जानकारी के लिए जुड़े रहिए patrika.com के साथ