अमेरिकी फोर्स ने अफगान नेशनल आर्मी के पास 7 बिलियन डॉलर का मिलिट्री इक्विपमेंट छोड़ा, जिसमें 2.5 लाख राइफलें और 18,000 नाइट-विजन गॉगल्स शामिल हैं। इनमें से कई उपकरण पाकिस्तान में मिले हैं।
अफगानिस्तान में बगराम एयरबेस पर अमेरिका का लगभग 20 सालों तक कब्जा रहा। यह कभी अमेरिका के नेतृत्व वाले काउंटर टेररिज्म कैंपेन का नर्व सेंटर और स्पेशल ऑपरेशन्स का मेन हब हुआ करता था।
अगस्त 2021 में तालिबानी कब्जे के बाद अमेरिकी सेना अफगानिस्तान से वापस लौट गई। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल सितंबर में तालिबान सरकार से बगराम को वापस सौंपने की अचानक मांग की।
उन्होंने इस जगह को दुनिया के सबसे बड़े एयर बेस में से एक बताया। साथ ही कहा कि यह चीन के न्यूक्लियर हथियार बनाने की जगह से एक घंटे की दूरी पर है। हालांकि, उनकी बातों पर तालिबान ने तुरंत फटकार लगाई।
ट्रंप की बातों से पहले ही तालिबान सरकार ने काबुल के बाहर एयरफील्ड और दूसरी पुरानी अमेरिकी जगहों की सुरक्षा के लिए सैनिकों व जासूसों को तैनात कर दिया था।
2021 में कंट्रोल वापस पाने के बाद तालिबान ने पुराने अमेरिकी बेस को अपने सैनिकों के लिए हब और स्पेशल इकोनॉमिक जोन में बदलने के प्लान का ऐलान किया।
सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए प्रोपेगैंडा फुटेज में तालिबान ने बेस पर बहुत सारी एक्टिविटी दिखाई हैं। जिसमें मिलिट्री एक्सरसाइज, एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस और मिलिट्री परेड शामिल हैं।
हालांकि, सैटेलाइट इमेज कुछ और ही बताते हैं। कुछ अधिकारियों के इंटरव्यू से यह पता चलता है कि पैसों की कमी से जूझ रही और अलग-थलग पड़ी तालिबानी सरकार बगराम बेस का सीमित इस्तेमाल ही कर पाई है।
अधिकारी अब मानते हैं कि बेस का उनके पास लगभग कोई इकोनॉमिक इस्तेमाल नहीं है, लेकिन वे कहते हैं कि उनकी मिलिट्री इन फैसिलिटी का इस्तेमाल कर रही है।
द वाशिंगटन पोस्ट ने प्लैनेट लैब्स और वैंटोर की दी गई तीन दर्जन से ज्यादा सैटेलाइट इमेज का रिव्यू किया, जो 2021 की शुरुआत में जब अमेरिका का इन फैसिलिटी पर कंट्रोल था और तालिबान का राज स्थापित होने के चार साल बाद यानी इसी साल ली गई थीं।
तस्वीरों में देखा गया कि बेस पर टैंक, आर्मर्ड गाड़ियों और एयरक्राफ्ट के स्पेयर पार्ट्स मौजूद हैं। इसमें कई नकली एयरक्राफ्ट भी दिख रहे थे। स्टिमसन सेंटर थिंक
टैंक में दक्षिण एशिया के सीनियर फेलो असफंदयार मीर ने कहा- तालिबान को विरासत में मिले बहुत सारे उपकरण अब काम नहीं करते हैं।
जो सैटेलाइट तस्वीरें सामने आईं हैं। उससे पता चलता है कि बेस के पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में शिपिंग कंटेनर हैं। जो कभी ऑफिस, टेम्पररी घर और स्टोरेज
यूनिट के तौर पर काम करते थे। अब उन्हें हटा दिया गया है। ऐसा लगता है कि बेस को बाहर से दिखने से रोकने के लिए दीवार से बंद किया गया है।
यह पता चल नहीं पाया है कि तालिबान क्या छिपा रहा है। सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि पिछले चार सालों में वहां सिर्फ मामूली मिलिट्री एक्टिविटी हुई है।
बगराम का टारमैक कभी अमेरकी और अफगान लड़ाकू विमानों से भरा रहता था। अब उनकी जगह सीधे फुटपाथ पर पेंट किए गए विमानों की तस्वीरें हैं, जो ऊपर से देखने पर शायद धोखे के तौर पर इस्तेमाल की गई हैं।
शुरू में, तालिबान सरकार बगराम का इस्तेमाल मिलिट्री और सिविलियन दोनों मकसदों के लिए करना चाहती थी। वहां स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाने का प्लान था। लेकिन द पोस्ट को दिए एक बयान में तालिबान के एक प्रवक्ता ने पहली बार सबके सामने माना कि फिलहाल ऐसा कोई प्लान नहीं है।
प्रवक्ता अखुंदजादा अब्दुल सलाम जवाद ने कहा- टेक्निकल जांच के बाद, हम इस नतीजे पर पहुंचे कि मिलिट्री जगहों को इकोनॉमिक सेंटर में बदलने के लिए कई
बड़े डिमोलिशन और रिकंस्ट्रक्शन की जरूरत होगी। जो महंगा भी होगा और हमारे मिलिट्री सेक्टर के लिए नुकसानदायक भी होगा।
अमेरिकी स्पेशल इंस्पेक्टर जनरल फॉर अफगानिस्तान रिकंस्ट्रक्शन ने 2023 में बताया था कि अमेरिकी फोर्स ने अफगान नेशनल आर्मी के पास 7 बिलियन डॉलर से ज्यादा का मिलिट्री इक्विपमेंट छोड़ा है।
इसमें ढाई लाख से ज्यादा राइफलें थीं। इसके अलावा, लगभग 18,000 नाइट-विजन गॉगल्स थे। अब जानकारी मिली है कि इनमें से कई राइफलें और गॉगल्स पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में दिखाई दिए हैं।
छोड़े गए बेस पर अफगान तालिबान को प्लेन, हेलीकॉप्टर और आर्मर्ड गाड़ियां भी मिलीं, जिनका इस्तेमाल अफगान नेशनल आर्मी ने किया था।
सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि तालिबान ने बाद के सालों में अपने नए बेड़े को सेंट्रलाइज करने, जांचने और बचाने की एक ठोस कोशिश की।
कंधार में, जहां मई 2021 में अमेरिका ने एक बड़ा एयर बेस खाली कर दिया था और तालिबान ने उस पर कब्जा कर लिया था, तस्वीरों में वहां सैकड़ों गाड़ियां कई जगहों पर एक साथ खड़ी दिख रही हैं।
कुछ गाड़ियों को खाक कर दिया गया है और उनके चेसिस खुले मैदान में ढेर कर दिए गए हैं। काबुल एयरपोर्ट पर तस्वीरों से पता चलता है कि तालिबान सरकार 2021 से स्टोर किए गए या कबाड़ किए गए एयरक्राफ्ट को एप्रन पर ले जा रही है।
उधर, पाकिस्तान में अधिकारी और एनालिस्ट तालिबान शासन द्वारा एरियल एसेट्स को फिर से एक्टिवेट करने को लेकर चिंतित हैं।
एक सीनियर पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि तालिबान सरकार के पास स्किल्ड पायलट और टेक्नीशियन की कमी है, लेकिन वह ब्लैक मार्केट से स्पेयर पार्ट्स खरीदकर कुछ एयरक्राफ्ट की मरम्मत के नए तरीके ढूंढ रही है।
उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर बात की क्योंकि उन्हें पब्लिक में बोलने की इजाजत नहीं थी। पिछले महीने पाकिस्तानी और अफगान सेनाओं के बीच टकराव हुआ था, क्योंकि इस्लामाबाद ने आरोप लगाया था कि अफगान तालिबान तहरीक-ए-तालिबान को पनाह दे रहा है, ये आतंकवादी पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में बढ़ते विद्रोह को बढ़ावा दे रहे हैं।
हालांकि, अमेरिका बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन ने अमेरिकी डिफेंस अधिकारियों ने छोड़े गए इक्विपमेंट की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया था। पेंटागन ने पिछले
साल कहा था कि उसने दुश्मन के कब्जे के रिस्क सहित एंड-यूजर पर ध्यान से विचार करने के बाद अफगान सेना को हथियार और इक्विपमेंट दिए थे।
अधिकारियों ने कहा कि उनका हथियार वापस पाने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि, ट्रंप का मानना है कि ऐसा नहीं है। उन्होंने फरवरी में कहा था- मुझे लगता है कि हमें बहुत सारा सामान वापस मिल जाना चाहिए।
काबुल अभी भी अफगान की राजधानी है, लेकिन तालिबान के सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा और तालिबान के दूसरे सोच वाले नेता दक्षिणी शहर कंधार में रहते हैं।
कंधार में एक्टिविटी में अचानक आई कमी रात में भी स्पेस से दिखाई दे रही है। जो कंपाउंड पहले चौबीसों घंटे रोशन रहते थे, वे अब अंधेरे में रहते हैं। इसके उलट, काबुल एविएशन एक्टिविटी का अड्डा बना हुआ है।
काबुल एयरपोर्ट के पूर्वी हिस्से में तालिबान ने 2023 और 2024 में 10 सेंट्री टावर बनाए, जिससे उस इलाके के आसपास की सिक्योरिटी काफी बढ़ गई, जिसे अगस्त 2021 में अमेरिका के हटने के दौरान इस्लामिक स्टेट के सुसाइड बॉम्बर ने टारगेट किया था। इस हमले में 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।
(वाशिंगटन पोस्ट का यह आलेख पत्रिका.कॉम पर दोनों समूहों के बीच विशेष अनुबंध के तहत पोस्ट किया गया है)