Patrika Special News

Holika Dahan 2026: महामारी के बाद बदली परंपरा, बैगा के कहने पर यहां दशकों से नहीं जली होलिका… जानें अनसुनी कहानी

Holika Dahan 2026: जहां एक ओर अधिकांश स्थानों पर होलिका दहन की अग्नि प्रज्वलित कर उत्साहपूर्वक उत्सव मनाया जाता है, वहीं कुछ गांव आज भी अपनी अनोखी परंपराओं के कारण इस दिन होलिका दहन नहीं करते, जो इस त्योहार को और भी खास बनाता है।

2 min read
बैगा की मान्यता के कारण गांव में नहीं होता होलिका दहन (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Holika Dahan 2026: होली की खुमारी अब चढ़ने लगी है। लोग होलिका दहन के लिए लकड़ियां एकत्रित कर रहे हैं। वहीं महासमुंद से 15 किमी की दूरी पर स्थित गांव मुढ़ेना में पुरानी परंपरा के कारण होलिका दहन नहीं किया जाता है, जबकि होली के दिन रंग और गुलाल एक-दूसरे को लगाते हैं और हर्षोल्लास से पर्व मनाया जाता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

ये भी पढ़ें

Unique Holi: कहीं सात दिन पहले, कहीं 13 दिन तक जश्न…. छत्तीसगढ़ में सदियों से जीवंत है अनोखी होली परंपरा, जानें

गांव के बुजुर्ग ने बताई वजह

गांव के बुजुर्ग 76 वर्षीय राधेश्याम साहू बताते हैं, मुढ़ेना गांव पहले काफी गरीब हुआ करता था। पानी की सुविधा नहीं होने से गांव में कृषि कार्य भी नहीं होते थे। कोई दुर्घटना न हो और उस समय महामारी हैजा भी फैली हुई थी, जिसके कारण गांव के बैगा राम ज्यादातर मकान कच्चे थे, गांव में लाल के कहने पर होलिका दहन बंद कर दिया गया। इतना ही नहीं गांव में मेला, मड़ई और बाजार भी नहीं लगाया जाता है। जिसके कारण इसे कुंवारा गांव भी कहा जाता है।

मुढ़ेना के लोग बाजार भी अन्य गांव घोड़ारी में जाते हैं। गांव के युवा बच्चे होलिका दहन तो करना चाहते हैं, लेकिन गांव के बुजुर्ग पुरानी मान्यता के चलते पर्व नहीं मनाते हैं। गांव के सरपंच अरुण कुमार नेताम ने बताया कि गांव होलिका दहन नहीं किया जाता है। नई पीढ़ी के युवा भी पुरानी मान्यता को मानते आ रहे हैं।

गांव में इस विषय पर होती है चर्चा

गांव में होलिका दहन और बाजार लगने को लेकर चर्चा हर साल होती है। गांव के नरोत्तम देवदास, देवार सिन्हा, ऋतिक, सुरेश कोसले और राहुल निषाद ने बताया कि इस विषय पर बैठकों में चर्चा होती है। बाजार, मेला और होलिका दहन नहीं होने के कारण गांव को कुंवारा गांव भी कहा जाता है। गांव की जरूरतें अन्य गांव के बाजार, मेले से पूरी होती है।

Published on:
02 Mar 2026 03:34 pm
Also Read
View All

अगली खबर