
ममता कुजूर ने आदिवासी समाज पर लुटाई ‘ममता’ (photo source- Patrika)
जशपुर के छोटे से गांव घोलेंग से निकली ममता कुजूर आज उस बदलाव की मिसाल बन चुकी हैं, जिसकी कल्पना अक्सर सिर्फ योजनाओं और कागजों तक सीमित रह जाती है। Jashpur district के इस सुदूर इलाके में उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य आदिवासी समाज के उत्थान को बना लिया। उनका काम सिर्फ सेवा नहीं, बल्कि एक ऐसी सामाजिक क्रांति है, जिसने पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जैसे अत्यंत पिछड़े समुदायों तक साक्षरता की रोशनी पहुंचाई है।
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