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War and Inflation : दुनिया में युद्ध से बढ़ी महंगाई, भारत में भी पड़ा बेहद असर, जानें कैसे

War and Inflation Rate: दुनिया में महंगाई दर में बढ़ोतरी की कई वजहें हो सकती हैं। लेकिन, किसी भी दो देश के बीच संघर्ष होता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कम या ज्यादा जरूर पड़ता है। दुनिया में चल रहे संघर्षों का असर भारत पर भी पड़ रहा है। आइए इस बारे में पढ़ते हैं विस्तृत रिपोर्ट।

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Feb 20, 2026
दुनिया के दूसरे मुल्कों की जंग से भारत में बढ़ रही है महंगाई

War and Inflation Relationship: दुनिया में पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग देशों के बीच युद्ध चल रहा है या युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। इन संघर्षों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों को गहराई से प्रभावित किया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था आपस में इतनी जुड़ी हुई है कि किसी एक क्षेत्र में संघर्ष होने पर उसका प्रभाव पूरी दुनिया में महसूस किया जाता है। इनका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा, मुद्रा विनिमय दरों और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंचता है। खासकर विकासशील देशों में युद्धों के कारण महंगाई (Inflation) तेज़ी से बढ़ी है, जिससे जीवन यापन की लागत में भारी इज़ाफा हुआ है। जाहिर है कि भारत भी इनसे अछूता नहीं है।

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रूस में 1,000 रुपये प्रति किलो हो गया खीरा, लोगों ने कसे तंज

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस में महंगाई और कालाबाजारी तेजी से बढ़ रही है। इसका सीधा असर खाद्य वस्तुओं पर दिख रहा है। खीरे की कीमतें कई गुना बढ़कर 300 रूबल प्रति किलो (करीब 356 रुपये) से ऊपर पहुंच गई हैं, जबकि कुछ स्थानों पर 1000 रुपये प्रति किलो तक की खबरें सामने आ रही हैं। हालात ऐसे हैं कि कुछ सुपरमार्केट में खीरे की खरीद पर सीमा तय करनी पड़ी। सोशल मीडिया पर लोग इसे 'ग्रीन गोल्ड' कह रहे हैं और मजाक में लिख रहे हैं कि अब सलाद भी ईएमआई पर मिलेगा। रूस के केंद्रीय बैंक ने वार्षिक महंगाई 5.5% रहने का अनुमान जताया है।

गाजा में 5 रुपये का पारले जी 2400 रुपये में बिका था

पिछले साल जून महीने में फिलीस्तीन के गाजा से एक तस्वीर सामने आई, जो यह संकेत दे रही थी कि युद्ध के चलते सप्लाई चेन बाधित होने से महंगाई और कालाबाजारी में अपने चरम पर पहुंच जाती है। गाजा में भारत का एक पॉपुलर बिस्कुट ब्रांड पारले जी की कीमतें आसमान को छू गई। 5 रुपए वाले पारले जी बिस्कुट के एक पैकेट की कीमत 24 यूरो (लगभग 2400) रुपए पहुंच गई है। यह जानकारी गाजा में रहने वाले एक शख्स मोहम्मद जावेद ने एक्स पर दी ​थी।

जावेद ने एक्स पर लिखा था, 'आखिरकार लंबे इंतजार के बाद मुझे रफिफ के लिए उसका पसंदीदा बिस्कुट मिल गया। इसकी कीमत 1.5 यूरो से बढ़कर 24 यूरो पहुंच गई, लेकिन मैं रफिफ को उसका पसंदीदा बिस्कुट देने से मना नहीं कर सका।'

रूस-यूक्रेन युद्ध: भारत पर क्या हुआ असर?

वर्ष 2022 में शुरू हुआ (Russia-Ukraine War) आधुनिक समय के सबसे बड़े भू-राजनीतिक संघर्षों में से एक है। रूस दुनिया के प्रमुख तेल और गैस निर्यातकों में शामिल है, जबकि यूक्रेन गेहूं और मक्का जैसे अनाज का बड़ा उत्पादक है। रूस कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का प्रमुख निर्यातक है, जबकि यूक्रेन गेहूं और सूरजमुखी तेल का बड़ा उत्पादक है। युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। वैश्विक बाजार में जब तेल महंगा होता है, तो भारत में पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत बढ़ जाती है। इसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है, जिससे खुदरा महंगाई बढ़ती है। युद्ध के बाद कई देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई। परिणामस्वरूप, यूरोप, अफ्रीका और एशिया के कई देशों में ईंधन और खाद्य महंगाई बढ़ी।

रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव

  • यूरोप में ऊर्जा संकट
  • तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल
  • खाद्यान्न की वैश्विक कीमतों में वृद्धि
  • उर्वरकों की कमी

Israel-Hamas conflict: तेल की कीमत बढ़ने से भारत को पड़ा फर्क

इज़राइल-हमास संघर्ष (Israel-Hamas conflict) ने मध्य-पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी। इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ी, क्योंकि मध्य-पूर्व विश्व ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है। किसी भी प्रकार का तनाव तेल की कीमतों को अस्थिर बना देता है। तेल की कीमत बढ़ने से भारत में आयात बिल बढ़ता है और चालू खाता का घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने लगता है। तेल की कीमतें अस्थिर होने से रुपया कमजोर हो सकता है, जिससे आयातित वस्तुएं और महंगी हो जाती हैं। तेल महंगा होता है तो परिवहन लागत बढ़ती है, जिससे थोक और खुदरा वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। इसका असर एशियाई और अफ्रीकी देशों पर काफी पड़ा है।

मध्य-पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने से क्या पड़ा फर्क?

  • तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव
  • क्षेत्रीय व्यापार में गिरावट
  • निवेशकों का विश्वास कम होना
  • पर्यटन क्षेत्र को नुकसान

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ता है असर

युद्धों के कारण समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बाधाएं आती हैं। बीमा लागत बढ़ती है और माल ढुलाई महंगी हो जाती है। इसका सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक्स, उर्वरक, खाद्य तेल और औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों पर पड़ता है। भारत जैसे देश, जो कई आवश्यक वस्तुओं का आयात करते हैं, उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। इससे थोक और खुदरा महंगाई दोनों प्रभावित होती हैं।

  • काला सागर मार्ग बाधित होने से अनाज निर्यात प्रभावित
  • तेल टैंकर मार्गों में सुरक्षा जोखिम
  • बीमा लागत में वृद्धि

युद्धों का भारत पर क्यों पड़ा कम असर?

दुनिया में अलग-अलग मुल्कों में चल रहे युद्ध के दौरान भारत ने वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की खोज और रणनीतिक तेल खरीद जैसी नीतियों से कुछ हद तक असर को कम किया है। हालांकि, वैश्विक अस्थिरता का प्रभाव पूरी तरह टाला नहीं जा सकता। रिजर्व बैंक ब्याज दरों के माध्यम से महंगाई नियंत्रित करने की कोशिश करता है, लेकिन यदि वैश्विक कीमतें लगातार ऊंची रहें तो घरेलू स्तर पर भी दबाव बना रहता है।

देश20202021202220232024/25 (हालिया)
अर्जेंटीना36%48%72%133%200%+ (2024 में चरम, बाद में गिरावट)
तुर्की12%19%72%53%60% के आसपास
अमेरिका1.2%4.7%8-9%4.1%3%
ब्रिटेन0.9%2.6%9-11%7.4%3-4%
भारत6.6%5.5%6.7%5.4%5%
चीन2.5%0.9%2%0.2%0% या नकारात्मक
ऑस्ट्रेलिया0.9%2.9%6.6%5.6%3%
स्रोत: inflationfocus

क्यों युद्ध के चलते बढ़ती है महंगाई?

  1. आपूर्ति में कमी (Supply Shock)
  2. ऊर्जा कीमतों में वृद्धि
  3. मुद्रा अवमूल्यन
  4. सरकारी रक्षा खर्च में बढ़ोतरी
  5. निवेश और उत्पादन में गिरावट

युद्ध का विकसित बनाम विकासशील देशों पर असर

युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर अस्थिरता पैदा होने का असर विकसित देशों की तुलना में विकासशील देशों पर ज्यादा पड़ता है। विकसित देशों में ब्याज दर बढ़ाकर महंगाई को नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है। दूसरा, विकसित देशों में मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के चलते भी कम असर पड़ता है। वहीं विकासशील देशों में विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं, जिसका असर थोक और खुदरा वस्तुओं पर पड़ता है। ईंधन और खाद्य वस्तुओं की महंगाई भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और कई अफ्रीकी देशों की आबादी महसूस कर रही है।

महंगाई के चलते असंतोष और विद्रोह पैदा होता है

महंगाई दर में इजाफा होने से केवल आर्थिक समस्या पैदा नहीं होती है। यह सामाजिक असंतोष को भी जन्म देती है। इससे बेरोजगारी और गरीबी दर में बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। अंतत: इन सबके चलते सरकारों के खिलाफ असंतोष पैदा होता है, और राजनीतिक अस्थिरता पैदा होती है। श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल में युवा पीढ़ी देश में महंगाई, बेरोजगारी और तेजी से बढ़ रही असमानता के चलते विद्रोह कर चुकी है।

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