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Sports : माटी की खुशबू और अखाड़े की हुंकार: भीलवाड़ा के पुर की बेटियों ने कुश्ती के वैश्विक फलक पर रचा इतिहास

Sports News : भीलवाड़ा शहर के छोटे से उपनगर पुर की माटी ने आज देश और दुनिया में एक ऐसी इबारत लिख दी है, जिस पर पूरे राष्ट्र को गर्व है। अभावों की भट्टी में तपकर कुंदन बनी यहां की बेटियां आज अखाड़े में ताल ठोकते हुए विदेशों में भी भारत का तिरंगा शान से फहरा रही हैं। कभी दो वक्त की रोटी के संघर्ष और तंगहाली के साए में जीने वाले इन परिवारों की बेटियों ने अपनी मेहनत के दम पर सफलता के वे शिखर छू लिए हैं, जो अच्छे-अच्छों के लिए एक सपना होते हैं। पढ़िए अनिल सिंह चौहान की रिपोर्ट।
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Aug 19, 2026
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भीलवाड़ा के छोटे से कस्बे से निकलकर बेटियां विश्व खेल मंच पर अपना इतिहास लिख रही हैं। (Photo: Rajasthan Patrika)

Sports : भीलवाड़ा की बेटियों की खेल के मैदान में असाधारण सफलता के पीछे उनके पिताओं का वह कड़ा श्रम है, जो फैक्ट्रियों की भट्ठियों में तपे, ऑटोमोबाइल की दुकानों पर ग्रीस से हाथ काले किए, निर्माण स्थलों (कमाठणों) पर पसीना बहाया और यहाँ तक कि सड़कों पर फूल-मालाएं बेचकर अपनी लाडलियों के सपनों को पंख दिए। वर्ष 2017 में आई 'दंगल' फिल्म से मिली प्रेरणा और शिव व्यायामशाला के मुख्य कोच, एनआईएस कुश्ती कोच कल्याण विश्नोई तथा सह-कोच रामनिवास के समर्पण ने इस पूरी पृष्ठभूमि को हकीकत में बदल दिया। आज स्थिति यह है कि कभी इक्का-दुक्का बालिकाओं से शुरू हुए इस अखाड़े में रोजाना 50 से 60 लड़कियां सुबह-शाम तीन-तीन घंटे पसीना बहा रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय फलक पर गूँजा पुर की बेटियों का नाम

पुर की इन शेरनी बेटियों ने अंतरराष्ट्रीय अखाड़ों में अपनी कुश्ती के दांव-पेंच से दुनिया भर को अचंभित कर दिया है। अश्वनी विश्नोई ने वर्ष 2025 में एथेंस में आयोजित अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में देश के लिए स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) जीतकर इतिहास रच दिया। वहीं, संध्या विश्नोई ने वर्ष 2026 में अज़रबैजान में हुई अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक (सिल्वर मेडल) अपने नाम किया। इन दोनों बेटियों ने विदेशों की धरती पर भारत का मान बढ़ाकर यह साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों, तो संसाधन कभी रास्ते का रोड़ा नहीं बनते।

वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप की गोल्ड पदक विजेता अश्वनी विश्नोई (Photo: Rajasthan Patrika)

राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पदकों की बरसात

अंतरराष्ट्रीय मंचों के अलावा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी पुर की पहलवान बेटियों ने पदकों का अंबार लगा दिया है। राष्ट्रीय जूनियर कुश्ती प्रतियोगिता 2026 में कविता माली ने सिल्वर मेडल जीता। अंडर-15 राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में गरिमा बिश्नोई, गीतिका बिश्नोई, स्वेच्छा बिश्नोई और विनीता विश्नोई ने अपने दमख़म से ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए। अंडर-17 राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में प्रांजल बिश्नोई ने सिल्वर मेडल और हँसा विश्नोई ने ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया। इसके साथ ही, पूजा गाडरी ने ऑल इंडिया अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल तथा पायल सुखवाल ने राष्ट्रीय स्कूली कुश्ती प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर व्यायामशाला का नाम रोशन किया।

वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता संध्या विश्नोई

प्रतिनिधित्व और राज्य स्तर की चमक

सिर्फ पदक जीतने तक ही इनका सफर सीमित नहीं है, बल्कि शिव व्यायामशाला की कई अन्य प्रतिभावान छात्राएं भी अपनी चमक बिखेर रही हैं। प्रगति बिश्नोई, आंचल प्रजापत, आरती माली, निष्ठा बिश्नोई, वंशिका बिश्नोई और अंजू साहनी जैसी जुझारू बेटियां राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिताओं में राजस्थान का गौरवशाली प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वहीं कावि जाट, सिद्धि बिश्नोई, पूजा बलाई और अंजलि बिश्नोई जैसी उभरती पहलवानों ने राज्य स्तर पर अपनी जीत का परचम लहराया है।

ओलंपिक में पदक जीतने का लक्ष्य

पहलवान बेटियों का कहना है कि सरकारी स्तर पर सुविधा देय नहीं होने से पापा-मम्मी व परिजन उनके लिए कड़ी मेहनत करते है। और सुविधाएं जुटाते है। उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए वह भी अखाड़े में घंटों कड़ी मेहनत करती है। उनका अब एकमात्र और अंतिम लक्ष्य देश का प्रतिनिधित्व करते हुए ओलंपिक खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। इनका कहना है कि "जिंदगी की असली उड़ान अभी बाकी है, इन परिंदों का इम्तिहान अभी बाकी है। अभी तो मापी है मुट्ठीभर जमीन हमने, सारा आसमान अभी बाकी है।"

सरकार ने सिर्फ दस हजार का दिया इनाम

पुर के बा​शिंदे बताते है कि अभावों को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि ताकत बनाकर आगे बढ़ने वाली पुर की ये बेटियां आज देश की हर उस बेटी के लिए एक जीवंत प्रेरणा हैं जो सपनों को आंखों में बसाकर आसमान छूना चाहती है। लेकिन पीड़ा यह है कि सरकारी स्तर पर बेटियों को कोई भी सुविधा हासिल नहीं है। मुख्यमंत्री ने हाल ही कॉमनवेल्थ की पदक विजेता को एक करोड़ रुपए ​दिए, लेकिन वर्ल्ड रेसलिंग की रजत पदक विजेता संध्या विश्नोई को महज दस हजार का इनाम दिया, जो कि नाकाफी था