
Inflammation Heart Attack Risk: हार्ट अटैक का नाम आते ही सबसे पहले कोलेस्ट्रॉल और ब्लॉकेज पर बात होती है। लेकिन वैज्ञानिक शोध बता रहे हैं कि शरीर में महीनों या वर्षों तक बनी रहने वाली सूजन (Chronic Inflammation) भी धमनियों को नुकसान पहुंचाती है और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह सूजन अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में बनी रहती है, इसलिए इसे 'साइलेंट इंफ्लेमेशन' भी कहा जाता है।
लगातार बनी रहने वाली सूजन धमनियों की अंदरूनी परत (एंडोथीलियम) को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे वसा और अन्य पदार्थ धमनियों में जमा हो जाते हैं और प्लाक बनाते हैं। यदि यह प्लाक अस्थिर हो जाएं तो यह फट सकते हैं। इनके फटने से खून का थक्का बन सकता है। यह थक्का रक्त प्रवाह को रोक कर हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।
CANTOS Trial में 10,000 से ज्यादा लोगों पर अध्ययन किया गया। यह अध्ययन ऐसे मरीजों पर किया गया, जिन्हें पहले हार्ट अटैक आ चुका था। इन लोगों में सूजन का स्तर (hs-CRP) बढ़ा हुआ था। अध्ययन में पाया गया कि सूजन को निशाना बनाने वाली दवा से दोबारा होने वाली हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम कम हो गया। जबकि LDL कोलेस्ट्रॉल में कोई विशेष बदलाव नहीं आया। इस अध्ययन के नतीजों से इस धारणा को और मजबूती मिली कि सूजन भी हृदय रोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि हर व्यक्ति को ऐसी दवा लेनी चाहिए, बल्कि उपचार कैसे किया जाना है इसका निर्णय केवल डॉक्टर पर ही छोड़ देना चाहिए।
-पेट पर बढ़ती चर्बी
-डायबिटीज या प्रीडायबिटीज
-हाई ब्लड प्रेशर
-धूम्रपान
-कम नींद
-लगातार तनाव
-अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन
-शारीरिक निष्क्रियता
-ये सभी स्थितियां शरीर में लंबे समय तक सूजन बनाए रख सकती हैं।
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विष्णु शर्मा कहते हैं कि जरूरत के अनुसार hs-CRP, CRP, ESR, CBC और अन्य जांच लिखी जा सकती हैं। अकेले किसी एक टेस्ट से हार्ट अटैक का निदान नहीं होता। इन्हें मरीज की पूरी स्थिति के साथ देखा जाता है।
वैज्ञानिक बताते हैं कि सूजन एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है, जबकि कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और आनुवंशिक कारण भी हृदय रोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सीनियर कंसलटेंट फिजिशियन और डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. अंशुल वाषर्णेय के मुताबिक सूजन शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रक्रिया है। जब शरीर को चोट लगती है, कोई संक्रमण होता है या फिर कोई हानिकारक पदार्थ शरीर में प्रवेश करता है, तब इम्यून सिस्टम सफेद रक्त कोशिकाएं और साइटोकाइन्स जैसे रसायन छोड़ता है। ये हानिकारक तत्वों से लड़ते हैं और क्षतिग्रस्त ऊतकों को ठीक करने में लग जाते हैं। यही प्रक्रिया इंफ्लेमेशन या सूजन कहलाती है।
यदि आपके हाथ की उंगली या अंगूठे पर किसी भी तरह से चोट लग जाए तो वह हिस्सा लाल हो जाता है। हल्का गर्म महसूस होता है और इसी पर सूजन भी आ जाती है। आप उस हिस्से में दर्द महसूस करते हैं। यह एक इशारा है कि आपका शरीर उस घाव को भरने और संक्रमण से लड़ने का काम कर रहा है। लेकिन जब यह प्रक्रिया लंबे समय तक और बिना किसी चोट या संक्रमण के भी बनी रहे, तो यह शरीर के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। इस तरह की सूजन को ही क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन कहा जाता है।
अंशुल बताते हैं कि वैज्ञानिक तौर पर सूजन को दो भागों में बांटा गया है। तीव्र सूजन इसे एक्यूट इन्फ्लेमेशन कहा जाता है। यह अचानक होती है और कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाती है। इसमें चोट लगना, जल जाना, बैक्टीरिया या वायरस का संक्रमण होना, मधुमक्खी या किसी कीट के काटने पर यह सूजन आती है। ऐसी सूजन में लालिमा, सूजन, दर्द, गर्माहट और प्रभावित अंग का सामान्य काम प्रभावित होने जैसे लक्षण सामने आते हैं।
जबकि दीर्घकालीन या क्रॉनिक सूजन कुछ महीनों से लेकर वर्षों तक बनी रह सकती है। इसमें कई बार कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। इसीलिए इसे साइलेंट इन्फ्लेमेशन भी कहते हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। मोटापा, धूम्रपान, लगातार टेंशन रहना, पर्याप्त और नियमित नींद न लेना, शारीरिक सुस्ती या गतिविधियों की कमी, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन, कुछ ऑटोइम्यून रोग इसके मुख्य कारण हो सकते हैं।
क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई बार इसमें दर्द, बुखार या सूजन जैसे साफ लक्षण नजर नहीं आते हैं। व्यक्ति बिल्कुल सामान्य महसूस करता है और नजर भी आता है। लेकिन शरीर के अंदर ही अंदर नसों को, लिवर को, अग्नाश्य और दूसरे अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंच सकता है।
लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन से हार्ट अटैक, एथेरोस्क्लेरोसिस का जोखिम, ब्रेन स्ट्रोक, अल्जाइमर, फैटी लिवर, टाइप-2 डायबिटीज, गठिया जैसी परेशानियां, कुछ कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बनती हैं।
डॉ. अंशुल के मुताबिक यह सोचना कि सूजन केवल मोटे लोगों को ही हो सकती है, गलत है। क्योंकि किसी दुबले व्यक्ति को भी क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन हो सकती है। इसका संबंध सिर्फ मोटापे से नहीं बल्कि, गलत खान-पान, तनाव, धूम्रपान और नींद की कमी से भी है।
नहीं… ऐसा नहीं है। चोट के बाद वाली सूजन जरूरी है, जबकि महीनों तक बनी रहने वाली सूजन शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है।
जब hs-CRP बार-बार बढ़ रहा हो
जोड़ों में दर्द बना रहे
थकान लगातार हो रही हो
बार-बार संक्रमण हो
डाटबिटीज या मोटापा हो