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सूजन का हार्ट अटैक से संबंध! जानिए कैसे बढ़ा सकती है हृदयाघात का खतरा?

Inflammation Heart Attack Risk: हार्ट अटैक का कारण सिर्फ कोलेस्ट्रॉल या ब्लॉकेज ही नहीं, शरीर में आने वाली सूजन भी बढ़ा सकती है हार्ट अटैक रिस्क, यह है दिल का सबसे खामोश दुश्मन और कई गंभीर बीमारियों की जड़ भी...
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Jul 16, 2026
Inflammation Heart Attack Risk
Inflammation Heart Attack Risk: शरीर में होने वाली सूजन दिल के लिए हो सकती है बड़ा खतरा, जानें कब जाएं डॉक्टर के पास, कैसे बचें। (photo AI)

Inflammation Heart Attack Risk: हार्ट अटैक का नाम आते ही सबसे पहले कोलेस्ट्रॉल और ब्लॉकेज पर बात होती है। लेकिन वैज्ञानिक शोध बता रहे हैं कि शरीर में महीनों या वर्षों तक बनी रहने वाली सूजन (Chronic Inflammation) भी धमनियों को नुकसान पहुंचाती है और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह सूजन अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में बनी रहती है, इसलिए इसे 'साइलेंट इंफ्लेमेशन' भी कहा जाता है।

सूजन कैसे बनती है हार्ट अटैक की वजह

लगातार बनी रहने वाली सूजन धमनियों की अंदरूनी परत (एंडोथीलियम) को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे वसा और अन्य पदार्थ धमनियों में जमा हो जाते हैं और प्लाक बनाते हैं। यदि यह प्लाक अस्थिर हो जाएं तो यह फट सकते हैं। इनके फटने से खून का थक्का बन सकता है। यह थक्का रक्त प्रवाह को रोक कर हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।

क्या कहती हैं दुनिया की चर्चित रिसर्च

CANTOS Trial में 10,000 से ज्यादा लोगों पर अध्ययन किया गया। यह अध्ययन ऐसे मरीजों पर किया गया, जिन्हें पहले हार्ट अटैक आ चुका था। इन लोगों में सूजन का स्तर (hs-CRP) बढ़ा हुआ था। अध्ययन में पाया गया कि सूजन को निशाना बनाने वाली दवा से दोबारा होने वाली हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम कम हो गया। जबकि LDL कोलेस्ट्रॉल में कोई विशेष बदलाव नहीं आया। इस अध्ययन के नतीजों से इस धारणा को और मजबूती मिली कि सूजन भी हृदय रोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि हर व्यक्ति को ऐसी दवा लेनी चाहिए, बल्कि उपचार कैसे किया जाना है इसका निर्णय केवल डॉक्टर पर ही छोड़ देना चाहिए।

एमडी मेडिसिन डॉ. विनोद कोठारी से जानें किन लोगों को सावधान रहने की जरूरत

-पेट पर बढ़ती चर्बी
-डायबिटीज या प्रीडायबिटीज
-हाई ब्लड प्रेशर
-धूम्रपान
-कम नींद
-लगातार तनाव
-अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन
-शारीरिक निष्क्रियता
-ये सभी स्थितियां शरीर में लंबे समय तक सूजन बनाए रख सकती हैं।

डॉ. कोठारी बताते हैं ये लक्षण नजरअंदाज न करें

  • हर समय थकान
  • बार-बार संक्रमण
  • जोड़ों में दर्द
  • मसूड़ों से खून आना
  • पेट की समस्या लगातार बने रहना
  • ब्रेन फॉग (ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई)ये लक्षण कई कारणों से हो सकते हैं, इसलिए इनका मतलब अपने-आप हृदय रोग नहीं है। लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

कौन से टेस्ट मदद कर सकते हैं?

नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विष्णु शर्मा कहते हैं कि जरूरत के अनुसार hs-CRP, CRP, ESR, CBC और अन्य जांच लिखी जा सकती हैं। अकेले किसी एक टेस्ट से हार्ट अटैक का निदान नहीं होता। इन्हें मरीज की पूरी स्थिति के साथ देखा जाता है।

5 आदतें जो अंदरूनी सूजन घटाने में मदद कर सकती हैं

  • रोज कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि
  • पर्याप्त और नियमित नींद
  • फल, सब्जियां, साबुत अनाज और नट्स वाला संतुलित आहार
  • धूम्रपान और तंबाकू से दूरी
  • तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान या अन्य उपाय

वैज्ञानिक बताते हैं कि सूजन एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है, जबकि कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और आनुवंशिक कारण भी हृदय रोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जानें क्या है सूजन

सीनियर कंसलटेंट फिजिशियन और डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. अंशुल वाषर्णेय के मुताबिक सूजन शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रक्रिया है। जब शरीर को चोट लगती है, कोई संक्रमण होता है या फिर कोई हानिकारक पदार्थ शरीर में प्रवेश करता है, तब इम्यून सिस्टम सफेद रक्त कोशिकाएं और साइटोकाइन्स जैसे रसायन छोड़ता है। ये हानिकारक तत्वों से लड़ते हैं और क्षतिग्रस्त ऊतकों को ठीक करने में लग जाते हैं। यही प्रक्रिया इंफ्लेमेशन या सूजन कहलाती है।

इसे ऐसे समझें

यदि आपके हाथ की उंगली या अंगूठे पर किसी भी तरह से चोट लग जाए तो वह हिस्सा लाल हो जाता है। हल्का गर्म महसूस होता है और इसी पर सूजन भी आ जाती है। आप उस हिस्से में दर्द महसूस करते हैं। यह एक इशारा है कि आपका शरीर उस घाव को भरने और संक्रमण से लड़ने का काम कर रहा है। लेकिन जब यह प्रक्रिया लंबे समय तक और बिना किसी चोट या संक्रमण के भी बनी रहे, तो यह शरीर के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। इस तरह की सूजन को ही क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन कहा जाता है।

सूजन के प्रकार

अंशुल बताते हैं कि वैज्ञानिक तौर पर सूजन को दो भागों में बांटा गया है। तीव्र सूजन इसे एक्यूट इन्फ्लेमेशन कहा जाता है। यह अचानक होती है और कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाती है। इसमें चोट लगना, जल जाना, बैक्टीरिया या वायरस का संक्रमण होना, मधुमक्खी या किसी कीट के काटने पर यह सूजन आती है। ऐसी सूजन में लालिमा, सूजन, दर्द, गर्माहट और प्रभावित अंग का सामान्य काम प्रभावित होने जैसे लक्षण सामने आते हैं।

जबकि दीर्घकालीन या क्रॉनिक सूजन कुछ महीनों से लेकर वर्षों तक बनी रह सकती है। इसमें कई बार कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। इसीलिए इसे साइलेंट इन्फ्लेमेशन भी कहते हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। मोटापा, धूम्रपान, लगातार टेंशन रहना, पर्याप्त और नियमित नींद न लेना, शारीरिक सुस्ती या गतिविधियों की कमी, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन, कुछ ऑटोइम्यून रोग इसके मुख्य कारण हो सकते हैं।

क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन क्यों खतरनाक?

क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई बार इसमें दर्द, बुखार या सूजन जैसे साफ लक्षण नजर नहीं आते हैं। व्यक्ति बिल्कुल सामान्य महसूस करता है और नजर भी आता है। लेकिन शरीर के अंदर ही अंदर नसों को, लिवर को, अग्नाश्य और दूसरे अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंच सकता है।

लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन से हार्ट अटैक, एथेरोस्क्लेरोसिस का जोखिम, ब्रेन स्ट्रोक, अल्जाइमर, फैटी लिवर, टाइप-2 डायबिटीज, गठिया जैसी परेशानियां, कुछ कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बनती हैं।

दूर कर लें ये मिथ- क्या सिर्फ मोटे लोगों में होती है सूजन

डॉ. अंशुल के मुताबिक यह सोचना कि सूजन केवल मोटे लोगों को ही हो सकती है, गलत है। क्योंकि किसी दुबले व्यक्ति को भी क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन हो सकती है। इसका संबंध सिर्फ मोटापे से नहीं बल्कि, गलत खान-पान, तनाव, धूम्रपान और नींद की कमी से भी है।

भारत में क्यों बढ़ रहा खतरा, जानें बड़े कारण

  • भारत में डायबिटीज मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है
  • मोटापा और पेट की चर्बी भी आम हो चली है
  • अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का सेवन बढ़ा है
  • शारीरिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं
  • नींद और तनाव की समस्या अब आम हो चली है

क्या हर सूजन बुरी होती है?

नहीं… ऐसा नहीं है। चोट के बाद वाली सूजन जरूरी है, जबकि महीनों तक बनी रहने वाली सूजन शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है।

डॉक्टर से कब मिलें?

जब hs-CRP बार-बार बढ़ रहा हो
जोड़ों में दर्द बना रहे
थकान लगातार हो रही हो
बार-बार संक्रमण हो
डाटबिटीज या मोटापा हो

AIIMS कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. विक्रम वटी के मुताबिक जानें क्या करें और क्या नहीं?

क्या करें?

  • हर दिन 30 मिनट चलें
  • पर्याप्त नींद लें
  • फल सब्जियां और साबुत अनाज खाएं
  • तनाव कम करें
  • धूम्रपान छोड़ें

क्या न करें

  • अल्ट्रा प्रोसेज्ड फूड
  • मीठे पेय
  • लंबे समय तक बैठे रहना
  • देर रात तक जागना
  • तंबाकू का सेवन
Updated on:
16 Jul 2026 04:49 pm
Published on:
16 Jul 2026 04:49 pm