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Israel-Lebanon Crisis: इजराइल-लेबनान के बीच 78 वर्षों से युद्ध के हालात, क्या अमेरिका के दखल से मध्य पूर्व में आएगी शांति?

Israel-Lebanon Crisis: इजराइल और लेबनान के बीच शांति की स्थापना के लिए अमेरिका में समझौते की कोशिश की जा रही है। इन दोनों देशों के बीच 78 वर्षों से युद्ध के हालात बने रहते हैं। आइए दोनों के बीच संघर्षों के इतिहास को टटोलने की कोशिश करते हैं। आइए, समझने की कोशिश करते हैं कि क्या दोनों के बीच शांति स्थापित हो सकेगी।

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Apr 15, 2026
इजराइल-लेबनान के बीच शांति स्थापना के लिए अमेरिका में वार्ता जारी है। (Photo: IANS)

Israel-Lebanon Conflict: लेबनान और इज़राइल का संघर्ष मध्य पूर्व (Middle East Crisis) की सबसे जटिल और लंबे समय से चल रही संघर्षों में से एक है। इस झगड़े की नींव 1948 में इजराइल (Israel Crisis) के गठन के साथ ही पड़ गई थी। इजराइल के गठन के साथ ही अरब के साथ युद्ध शुरू हो गया और लाखों फिलिस्तीनी शरणार्थी अपने घरों से विस्थापित होकर पड़ोसी देशों, खासकर लेबनान में जाकर बस गए। लेबनान में जा बसे इन शरणार्थियों ने आगे चलकर दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया। अब दोनों देशों के बीच समझौते की बात चल रही है। आइए दोनों देशों के बीच संघर्षों (Israel-Lebanon Conflict Story) की पूरी कहानी और समझौते की ताजा कहानी जानते हैं।

क्या इजराइल-लेबनान के बीच हो पाएगा समझौता?

हम पहले ताजे घटनाक्रम के बारे में जानते हैं। इजराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच एक महीने से अधिक समय से लगातार चल संघर्षों के बाद मंगलवार को वाशिंगटन में दशकों बाद पहली प्रत्यक्ष कूटनीतिक वार्ता शुरू हो पाई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे 'ऐतिहासिक अवसर' बताया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि तत्काल किसी बड़े समझौते की उम्मीद नहीं है।

'दशकों के विवाद को जल्दी सुलझाया नहीं जा सकता'

रुबियो ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इन वार्ताओं को संभव बनाने को लेकर बहुत उत्साहित है, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 'हम दशकों के इतिहास और जटिलताओं के खिलाफ काम कर रहे हैं,' जिन्हें जल्दी सुलझाया नहीं जा सकता। वहीं हिज़्बुल्लाह ने इन प्रत्यक्ष वार्ताओं का विरोध किया है। वह इस वार्ता में शामिल नहीं हुआ। इसके उलट ईरान समर्थित इस समूह ने वार्ता शुरू होते ही उत्तरी इज़राइल पर हमले तेज कर दिए।

Photo: Xinhua via IANS)

78 वर्षों से लगातार दोनों देशों के बीच युद्ध के हालात

हिज़्बुल्लाह के विरोध के बावजूद, ये वार्ताएं उन दो देशों के लिए एक बड़ा कदम हैं जिनके बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं है। 1948 में इज़राइल की स्थापना के बाद से ही आधिकारिक तौर पर दोनों देश युद्ध की स्थिति में हैं। हालिया संघर्ष 2 मार्च को शुरू हुआ, जब हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इज़राइल पर रॉकेट दागे। यह हमला अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के कुछ दिनों बाद हुआ था। अब आइए दोनों देशों के बीच जारी करीब 8 दशकों के संघर्षों के इतिहास को खंगालते हैं।

इजराइल की पैदाइश के साथ ही हुई संघर्ष की शुरुआत

लेबनान और इज़राइल के बीच संघर्ष मध्य पूर्व की सबसे जटिल और लंबे समय से चल रही भू-राजनीतिक टकरावों में से एक है। यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच सीमा विवाद तक सीमित नहीं है। इस विवाद में धार्मिक, राजनीतिक, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हित भी गहराई से जुड़े हुए हैं। इसकी जड़ें 20वीं सदी के मध्य में पैदा हुई परिस्थितियों में हैं और आज तक अलग-अलग रूपों में जारी हैं। यह संघर्ष वर्ष 1948 में इजराइल के जन्म के साथ ही शुरू हो गया था।

(Photo: Xinhua via IANS)

इस फसाद में फिलिस्तीनी संगठनों की क्या रही भूमिका?

फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) ने 1960 और 1970 के दशक में लेबनान के दक्षिणी हिस्से को इज़राइल के खिलाफ हमलों के लिए आधार बना लिया था। इसके जवाब में इज़राइल ने कई मौकों पर लेबनान में सैन्य कार्रवाई की। इस समय लेबनान खुद भी लेबनानी गृह युद्ध (1975-1990) से जूझ रहा था, जिससे स्थिति और अधिक जटिल होती चली गई।

1982 में इज़राइल ने लेबनान पर किया था जोरदार हमला

इजराइल-लेबनान संघर्ष में एक बड़ा मोड़ 1982 में आया, जब उसने लेबनान पर जोरदार तरीके से सैन्य कार्रवाई (Operation Peace for Galilee) को अंजाम दिया। इसका उद्देश्य फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) को खत्म करना था। पीएलओ एक प्रमुख राजनीतिक और अर्ध-सैन्य संगठन है, जिसकी स्थापना 1964 में फिलिस्तीनी जनता का प्रतिनिधित्व करने और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने के उद्देश्य से की गई थी। इसका जन्म अरब लीग के समर्थन से हुआ था। इस हमले के दौरान इज़राइल की सेना लेबनान की राजधानी बेरूत तक पहुंच गई थी। अंतरराष्ट्रीय दखल के बाद पीएलओ को लेबनान छोड़ना पड़ा।

Photo: Xinhua via IANS)

ईरान के समर्थन से हिज़्बुल्लाह का हुआ गठन

लेबनान (1975–1990) गृह युद्ध से बुरी तरह से जूझ रहा था। ऐसे में ईरान के समर्थन से 1982 में हिज़्बुल्लाह का गठन हुआ। ईरान की इस्लामिक क्रांति (1979) के बाद उसने 'इस्लामी प्रतिरोध' को बढ़ावा देना शुरू किया। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने लेबनान में शिया लड़ाकों को प्रशिक्षण देने का काम किया। इतना ही नहीं, ईरान ने हिज़्बुल्लाह को वित्तीय, सैन्य और वैचारिक स्तर पर भरपूर समर्थन प्रदान किया। दरअसल, हिज़्बुल्लाह का मुख्य उद्देश्य इज़राइल के खिलाफ संघर्ष करना और लेबनान में अपनी राजनीतिक-सैन्य शक्ति स्थापित करना रहा है। यह संगठन आज भी इज़राइल के खिलाफ सक्रिय है।

इज़राइल ने 18 साल बाद अपनी सेना वापस बुला ली

इजराइली सेना दक्षिण लेबनान में हिज्बुल्लाह के साथ लगभग 18 वर्षों तक संघर्ष के बाद आखिकार वर्ष 2000 में अपने वतन वापस लौट आई। इज़राइल का दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई को अंजाम देने का प्रमुख उद्देश्य अपनी उत्तरी सीमा को सुरक्षित करना था। हालांकि, हिज़्बुल्लाह ने गुरिल्ला युद्ध और लगातार हमलों के जरिए इज़राइली सेना पर दबाव बनाए रखा। हिज़्बुल्लाह ने इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में प्रचारित किया और अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखीं। इससे हिज़्बुल्लाह की लोकप्रियता और ताकत बढ़ी। संगठन ने इज़राइल के खिलाफ अपनी सैन्य और रणनीतिक गतिविधियां अभी भी जारी रखी हुई है।

जब हिज़्बुल्लाह ने इज़राइली सैनिकों का कर लिया था अपहरण

वर्ष 2006 में एक बार फिर से इजराइल और लेबनान के बीच बड़ा संघर्ष शुरू हो गया, जिसे लेबनान युद्ध 2006 कहा जाता है। यह संघर्ष हिज़्बुल्लाह द्वारा इज़राइल के सिर्फ दो सैनिकों के अपहरण कर लेने के चलते हुआ। इसके जवाब में इज़राइल ने लेबनान में व्यापक हवाई और जमीनी हमले किए। हिज़्बुल्लाह ने भी रॉकेट हमलों से इजराइल को मुंहतोड़ जवाब दिया। यह युद्ध लगभग 34 दिनों तक चला और इसमें हजारों लोग मारे गए और बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ।

इज़राइल-हमास युद्ध 2023 के बाद फिर से अशांत हुए हालात

लेबनान और इज़राइल के बीच आज भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच कभी भी संघर्ष की शुरुआत हो जाती है। इजराइल की उत्तरी और लेबनान के दक्षिणी सीमा पर संघर्ष लगातार जारी रहता है। इस इलाके में हिज़्बुल्लाह की पकड़ बहुत मजबूत है। हाल के वर्षों में इज़राइल-हमास युद्ध 2023 के बाद इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। हिज़्बुल्लाह ने गाजा में हमास के समर्थन में इज़राइल पर रॉकेट से हमले किए, जिसके जवाब में इज़राइल ने भी लेबनान में हवाई हमले किए।

Published on:
15 Apr 2026 03:39 pm
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