Jabalpur Cruise Incident: जबलपुर में बरगी क्रूज हादसा मध्यप्रदेश समेत देशभर में वॉटर टूरिज्म की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठाता है, विदेशों में बिना सुरक्षा क्रूज या शिप आगे बढ़ना तो दूर ट्रिप के लिए कोई तैयारी भी नहीं कर सकते, लेकिन भारत इसी सुरक्षा व्यवस्था में हर बार सबसे पीछे खड़ा नजर आता है...
Jabalpur Cruise Incident: मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे ने एमपी समेत भारत भर में वॉटर टूरिज्म सुरक्षा नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुनिया के कई देश ऐसे हैं जहां एक छोटी सी बोट भी तभी पानी पर तैरती नजर आती है, जब उसके सुरक्षा नियम-कायदों को भली-भांति जांच लिया जाता है। इन देशों में सुरक्षा गाइडलाइन, अनिवार्य सेफ्टी ड्रिल और ओवरलोडिंग पर जीरो टॉलरेंस जैसी नीति लागू हैं। लेकिन भारत में लापरवाही, ओवरलोडिंग और अनदेखी ही अक्सर हादसों का कारण बनी है। समझ से परे ये है कि आखिर भारत में हादसे के बाद ही क्यों सुरक्षा व्यवस्थाओं की बात की जाती है। वहीं सिस्टम अपनी गलतियों का ठीकरा प्राकृतिक आपदाओं के नाम पर मढ़ता नजर आता है।
सुरक्षा व्यवस्थाओं का ये ढोल अगर हादसों से पहले पीट लिया जाए तो आखिर इसमें बुराई क्या है? लेकिन जिम्मेदारों से लेकर टूरिस्ट तक कोई भी इसकी जहमत नहीं उठाना चाहता… पढ़ें संजना कुमार की रिपोर्ट..
मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के फेमस टूरिस्ट प्लेस हनुवंतिया में रिलायंस के एक पूर्व ऑफिसर पत्नी समेत डूब गए थे। 2024 के इस हादसे में जान गंवाने वाली दंपती लसूडिा के निरंजनपुर की डायमंड स्क्वेयर में रहने वाले भगवान सिंह धाकड़ हनुवंतिया टापू पर छुट्टियां मनाने आए थे। इंदौर में रिलायंस कंपनी के पूर्व जनरल मैनेजर 66 साल भगवान सिंह जब अपनी बत्नी सुनीता बाई के साथ एमपी टूरिज्म के रिसोर्ट में रुके थे।
1- 2022 में राजधानी भोपाल में भारी बारिश और आंधी तूफान के कारण बड़े तालाब में आफत बनकर आई थी। इसमें बोटों के साथ ही टूरिस्ट के लिए चल रहा क्रूज भी डूब गया था। हालांकि शुक्र था कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई थी। उस समय विशाखापट्टनम से स्पेशल टीम को बुलाया गया था। ये टीम सैल्वेजिंग बैलून साथ लाई थी। इसी की मदद से क्रूज को पानी की गहराइयों से ऊपर लाया गया था। इस क्रूज का नाम था लेक प्रिंसेस।
2- 2019 में भी भोपाल के बड़े तालाब में चलने वाला क्रूज समुद्री लहरों में फंस गया था। लेकिन इस दौरान यह किसी मौसम का या पानी का खेल नहीं था। बल्कि ये क्रूज मछलियों के लिए फैलाए गए जाल में उलझ गया था। आधे घंटे बाद इसे निकाला जा सका। लेकिन तब तक 55 यात्रियों को मुश्किल का सामना करना पड़ा।
मध्य प्रदेश के जबलपुर बरगी डैम की तरह है उत्तरप्रदेश के वृंदावन में भी टूरिस्ट की बोट पलट गई थी। 9 अप्रैल को हुए इस हादसे में 10 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। देर रात तक सर्च ऑपरेशन जारी रहा और 5 घंटे की मशक्कत के बाद बोट गहरे पानी में नीचे दलदल में फंसी मिली। हादसे के कारणों में ओवरलोडिंग और पुल के ढांचे से टकराव बताए गए थे।
18 दिसंबर 2024 की शाम मुंबई से खबर आई नेवी की स्पीड बोट ने फेरी बोट को टक्कर मार दी, हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। गेटवे ऑफ इंडिया से एलीफेंटा के बीच यह फेरी चलाई जाती थी। हादसे में नेविगेशन में चूक सामने आई थी। वहीं यह रूट भीड़भाड़ा वाला क्षेत्र था। इस हादसे के कारणों में भी सेफ्टी नियमों की अनदेखी सामने आई। वहीं ट्रैफिक कंट्रोल की कमी भी दिखाई दी थी। बताया गया कि फेरी में क्षमता से ज्यादा यात्री सवार थे। उसी दिन रूट पर पहले से भीड़भाड़ को लेकर अलर्ट भी जारी किया गया था।
2023 के इस हादसे में समुद्र किनारे बोट पलट गई। हादसे में करीब 22 लोगों की मौत हो गई। इनमें मरने वालों में बड़ी संख्या उन मासूम बच्चों की थी, जो बोट में सवार थे। जांच में सामने आया बोट में क्षमता से ज्यादा लोग भरे थे। रात में ऑपरेशन के साथ ही सेफ्टी नियमों की अनदेखी भी सामने आई। इस मामले में बोट के लाइसेंस को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी थीं। बताया गया कि कई यात्री बिना लाइफ जैकेट के ही बोट पर सवार थे।
आंध्र प्रदेश की गोदावरी नदी में 2019 में हादसा हुआ। पापीकोंडालु जा रही टूरिस्ट बोट नदी में डूब गई। इस भयावह हादसे के वक्त 60 से ज्यादा लोग बोट में सवार थे। इनमें से 23 को सुरक्षित बचा लिया गया। लेकिन 13 लोगों की मौत ने हड़कंप मचा दिया था। प्रदेश सरकार ने पीड़ित परिवारों को 10 लाख रुपए मुआवजे की घोषणा की थी। हादसों के कारणों में ओवरलोड होने के साथ ही मौसम खराब होना भी सामने आया था। वहीं अनऑथराइज्ड ऑपरेशन की बात भी सामने आई थी। कई शव तो हादसे कई दिनों बाद तक मिले। बोट पर विदेशी टूरिस्ट भी सवार थे।
18 जनवरी 2024 गुजरात के इतिहास में दर्ज हो गया। यहां वडोदरा की हरणी झील में एक भीषण हादसा हुआ। 12 स्कूली बच्चों और 2 शिक्षकों समेत कुल 14 लोगों की बोट हादसे में मौत हो गई थी। यह निजी स्कूल के स्टूडेंट थे और पिकनिक मनाने आए थे। जांच में सामने आया था कि नाव में क्षमता से ज्यादा यात्री सवार थे और 11 बच्चों ने लाइफ जैकेट तक नहीं पहनी थी। हादसे में सामने आया था कि ओवरलोडिंग और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया गया था। पुलिस ने बोट ठेकेदार और संचालक समेत 18 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। बताया जाता है कि यह घटना गुजरात के सबसे दर्दनाक हादसों में गिनी जाती है।
अमेरिका और यूरोपीय देशों में भी क्रुज या बोट से वॉटर टूरिज्म का ट्रेंड आम है। लेकिन इन देशों में नियमों की अनदेखी करना भारी पड़ता है, वहीं स्थानीय स्तर पर भी सख्ती से नियमों का पालन करवाना और करना अनिवार्य है।
कुल मिलाकर हम कह सकते हैं, विदेशों में अगर सुरक्षा व्यवस्था में जरा भी खामी मिलती है, तो ट्रिप बंद कर दी जाती है
लेकिन भारत में पहले ट्रिप का मजा और बाद में सुरक्षा व्यवस्था की चूक सजा बन जाती है।
क्रूजेज ऑफ गोवा है इनके वीडियोज देखने चाहिए। क्रूज बोट एक शिप की तरह होते हैं। इनकी कैपिसिटी 70-80 होती है। इनमें लाइफ जैकेट्स होते हैं इमरजेंसी के लिए। लोग यहां सेल्फी लेते हैं। डीजे डांस होते हैं। ये सब लोग लाइफ जैकेट पहनकर नहीं करना चाहते। गाइडलाइन 100 फीसदी फॉलो की जा रही थी। क्रूज पर सभी लोग लाइफ जैकेट्स पहनकर बैठे थे। ये जरूर है कि अचानक इमरजेंसी हुई तो डिस्ट्रीब्यूशन में थोडी़ देर जरूर लग गई।
हमारे सभी क्रूज एप्रूव्ड हैं, हर पांच साल में मीडियम रिफिट (क्रूज की ऐसी सर्विसिंग जिसमें उसके ढांचे के साथ ही इंजन और सेफ्टी सिस्टम की गहराई से जांच और मरम्मत) कराते हैं। जैसे नेवल शिप्स होते हैं। साल में एक बार हम इन्हें पानी के ऊपर लाते हैं। ताकि इनके हल का मेंटेनेंस कर सकें, इनके रडर आदि को साफ कर सकें उन पर पेंट करते हैं। यह प्रक्रिया बीचिंग कहलाती है। यानी किसी भी शिप, बोट या क्रूज बोट का किनारे पर लाकर पूरी तरह से मेंटेनेंस करना। इसके अलावा रूटीन मेंटेंन्स हर दिन किया जाता है। इस क्रूज बोट का भी 6 महीने पहले भी मीडियम रिफिट करवाया है। इसके हल इतने मजबूत हैं कि पिछले 5 घंटे से जेसीबी से इन्हें तोड़ा जा रहा है, लेकिन यह टूट भी नहीं रहे हैं।
जब मौसम का येलो अलर्ट जारी किया जाता है, इसका मतलब होता है कि सिर्फ वार्निंग है कि हवाएं जरा तेज हैं, संभाल कर क्रूज चलाएं। इसके बाद ऑरेंज और फिर रेड अलर्ट जारी किया जाता है।
हादसे के पहले बरमूड़ा ट्राइंगल (एक मिनी सुनामी फिनोमिना) बन गया था। इसमें लो प्रेशर के कारण अचानक भयंकर बवंडर बना। आज शनिवार 2 मई की सुबह भी ऐसा हुआ। मौसम की इस स्थिति में हवाओं के पॉकेट्स बन जाते हैं। ये पॉकेट्स विंड को सर्कुलेट करते हैं। इससे पानी की ऊंची-ऊंची लहरें बन जाती हैं। ये शिप को या बोट को ऊपर-नीचे करती हैं, इसे रोलिंग और पिचिंग कहते हैं। शिप को टर्न करने के लिए शिप में रडर लगे होते हैं, वे इन लहरों के कारण पानी से बाहर निकलने लगते हैं और शिप आउट ऑफ कंट्रोल हो जाते हैं। इस विंड कंडिशन में क्रूज बोट कैप्टन ने भी क्रूज को वापस लाने की कोशिश की थी। इस हादसे में भी मौसम की यही खतरनाक स्थिति बनी, जो अनप्रीडिक्टेबल और जोखिम भरी साबित हुई।
लेकिन शिप को इस स्थिति में किनारे नहीं लाया जा सकता था। यहां किनारे पर रॉक्स हैं। अगर इसे किनारे लाया भी जाता, तो चट्टानों से टकराकर क्रूज टूट सकता था और बोट में मौजूद सभी यात्रियों को बचाना मुश्किल हो जाता।
एक वन इन रेयर फिनोमिना है, जो में 10 लाख बार में केवल एक बार ही ऐसा होता है। इस प्रक्रिया में दो वेव एंटी वेव्ज बन गईं। हमारे इस क्रूज में दो हल हैं। ये मॉस्ट स्टेबल क्रूज है वर्ल्ड का। इन्हें ऐसे डिजाइन किया जाता है कि ये कभी भी पलटते नहीं हैं। लेकिन इस रेयर केस में एक वेव पानी के नीचे चली गई और दूसरी वेव ने दूसरे हल को ऊपर उठा लिया, उसने क्रूज झुका दिया, जिससे क्रूज बोट में एक तरफ पानी भर गया।
उसी समय हवा का तेज झोंका 70-80 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आया और उसने क्रूज को और ज्यादा झुका दिया। इस बार इंजन में पानी भर गया और क्रूज आंशिक रूप से पानी में झुकने लगा। ऐसी स्थिति बनी इसीलिए 21 लोगों की जान बचाई जा सकी।
हम मानते हैं कि हादसे में कई लोगों की जानें गई हैं। लेकिन यह वास्तव में एक प्राकृतिक आपदा थी। जो अचानक आई और चली गई। हमारी ओर से हर तरह की गाइडलाइन फॉलो की जाती है। 100 प्रतिशत नियमों का पालन किया जाता है। ये क्रूज मेरे ही डिजाइन किए हुए हैं, इनका एक्चुअल स्वरूप यही है। 20 साल से हम प्रदेश में क्रूज चला रहे हैं। 2006 से अभी तक एक भी हादसा ऐसा नहीं हुआ। ऐसे हादसे फ्रीक हादसे कहलाते हैं।