
Emotional Shopping : 'रिटेल थेरेपी' (Retail therapy) अब सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। अक्सर हम मजाक-मजाक में एक-दूसरे को शॉपिंग करने की सलाह देते हुए इसे बोल देते हैं। हम जब भी उदास होते हैं, तनाव में होते हैं या बोरियत महसूस करते हैं, तो अक्सर हमारा हाथ अपने फोन की ओर जाता है और कुछ ही मिनटों में ई-कॉमर्स (E-commerce) ऐप्स पर स्क्रॉल करने लगते हैं। इसे ही मनोवैज्ञानिक 'इमोशनल शॉपिंग' या 'कंपल्सिव बाइंग' (Compulsive buying) कहते हैं।
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