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घर बन रहा कत्लगाह : झालावाड़ में दो साल में 20 हत्याओं में परिजन और रिश्तेदार ही निकले हत्यारे

जयप्रकाश सिंह की पत्रिका स्पेशल रिपोर्ट : झालावाड़ में दो साल में 20 हत्याओं में परिजन और रिश्तेदार ही हत्यारे निकले हैं। इससे रिश्तों पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
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Sep 29, 2026
jhalawar crime news
प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT

झालावाड़। जिस घर में साथ बैठकर रोटी खाई, उसी घर में खून बह गया… जिस रिश्ते से जिंदगी भर साथ की उम्मीद थी, वही जान का दुश्मन बन गया। कहीं पति-पत्नी का रिश्ता हत्या में बदल गया तो कहीं चाचा-भतीजे और दादा-पोते जैसे रिश्ते खूनी टकराव में बदल गए। झालावाड़ में दो साल में सामने आए बीस हत्या और दहेज हत्या के मामले रिश्तों के टूटते भरोसे की ऐसी तस्वीर पेश करते हैं, जो झकझोर देती है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2025 और 2026 के दौरान 13 हत्या और 7 दहेज हत्या के मामले दर्ज हुए। इन घटनाओं में आरोपी और मृतक के बीच कोई अनजान रिश्ता नहीं था। वे एक-दूसरे के अपने थे। विवाद, रंजिश, घरेलू कलह, दहेज और अन्य पारिवारिक कारणों के बीच रिश्तों की डोर इतनी टूटी कि उसका अंत जान लेने तक पहुंच गया।

अमित कुमार, एसपी झालावाड़ ने कहा- "परिवार के सदस्य की हत्या की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि इसमें सिर्फ एक जिंदगी खत्म नहीं होती। मृतक का परिवार हमेशा के लिए अपना सदस्य खो देता है और आरोपी का परिवार भी उसके बाद सामाजिक, कानूनी और भावनात्मक संकट में फंस जाता है।"

सात फेरों का रिश्ता… और अंत मौत पर

22 अगस्त 2025 को झालरापाटन में हरचकन्द की मौत का मामला सामने आया। पुलिस के अनुसार उसका शव चारपाई पर मिला और पत्नी रेखा पास बैठी थी। पूछताछ में रेखा ने पति की हत्या करना बताया।

27 जनवरी 2026 को घाटोली थाना इलाके में देवीलाल ने पत्नी कन्याबाई उर्फ रामकन्याबाई के साथ धारदार हथियार से मारपीट की। पत्नी की मौत हो गई।
दोनों घटनाओं में रिश्ता वही था, जिसे जीवनभर साथ निभाने का माना जाता है।

दहेज बनी मौत की वजह

पारिवारिक हिंसा से जुड़े मामलों में दहेज के मामले भी सामने आए। पुलिस के अनुसार 2025-26 के दौरान 7 दहेज हत्याओं हुई।

घाटोली में दहेज के लिए प्रताड़ना के बाद महिला की आत्महत्या का मामला दर्ज हुआ। मनोहरथाना और अकलेरा में भी दहेज प्रताड़ना के बाद महिलाओं की मौत से जुड़े मामले सामने आए। विवाह के बाद जिस घर को नई जिंदगी की शुरुआत बनना था, वहीं दहेज की मांग और प्रताड़ना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।

दादा को पोते ने ही मार डाला

29 अप्रैल 2026 को पनवाड़ थाना इलाके खेत में धारदार हथियार से वार कर 70 वर्षीय रामगोपाल की उसके पोते ने हत्या कर दी।

चाचा-भतीजे में रंजिश, चाकू और फरसा चला

26 जून 2026 को खानपुर थाना इलाके में हरिओम ने अपने काका 50 वर्षीय नेमीचन्द पर चाकू से वार किया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद 9 जुलाई 2026 सारोला थाना इलाके में सत्यवान ने अपने चाचा जगन्नाथ पर फरसे से वार कर हत्या कर दी।

करीबी रिश्तों में विवाद अचानक नहीं बढ़ता। कई बार लंबे समय से चली आ रही रंजिश, घरेलू कलह, आर्थिक तनाव, संपत्ति विवाद, दहेज, शक या संवाद की कमी धीरे-धीरे तनाव को गहरा करती है।

जब बातचीत बंद हो जाती है और नाराजगी भीतर जमा होती रहती है, तो छोटी बात भी बड़े टकराव का कारण बन सकती है। विवाद किसी भी परिवार में हो सकता है, लेकिन जब संवाद खत्म हो जाए और तनाव हिंसा में बदलने लगे तो उसका अंजाम बेहद भयावह हो सकता है।

विवेक नन्दवाना, लीगल एक्सपर्ट कहते हैं- "पारिवारिक विवाद को केवल घरेलू मामला कहकर टालना खतरनाक हो सकता है। जान से मारने की धमकी, हथियार दिखाना, घर में बंद करना, पीछा करना या बार-बार हिंसा की चेतावनी गंभीर संकेत हैं। ऐसे मामलों में समझौते से पहले संबंधित व्यक्ति की सुरक्षा और स्वतंत्र सहमति सुनिश्चित करना जरूरी है। परिवार का दायित्व हर कीमत पर रिश्ता बचाना नहीं, बल्कि सदस्यों की सुरक्षा करना है। संपत्ति विवाद में दस्तावेज और कानूनी रास्ता अपनाएं, जबकि रिश्तों में तनाव होने पर संवाद, परामर्श या कानूनी सहायता ली जा सकती है। समय पर शिकायत और सुरक्षा का कदम एक जीवन बचा सकता है।"

Updated on:
29 Sept 2026 05:34 pm
Published on:
29 Sept 2026 05:34 pm