
प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT
पाली। अपराधी अक्सर यही सोचकर वारदात करता है कि अंधेरे में उसे कोई देख नहीं रहा। सड़क सुनसान है, आसपास कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और वारदात के बाद वह किसी दूसरे रास्ते से निकल जाएगा। लेकिन अब अपराध के बाद कहानी इतनी आसानी से खत्म नहीं होती। कहीं घर के बाहर लगा कैमरा, कहीं दुकान का कैमरा, कहीं पेट्रोल पंप की रिकॉर्डिंग तो कहीं चौराहे पर लगा कैमरा अपराधी की वह हरकत दर्ज कर रहा होता है, जिसका उसे खुद अंदाजा नहीं होता। प्रदेश में पुलिस के लिए यही कैमरा अब ‘तीसरी आंख’ बनता जा रहा है।
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