Junk Foods Public Health Risk in India: देश में जंक फूड का बाजार और उपभोग तेजी से बढ़ रहा है। यह 10 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ते हुए 2024 में 2.58 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके चलते देश में कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। एक्सपर्ट बता रहे हैं कि जंक फूड और कैंसर के बीच क्या रिश्ता है?
Junk Food relation with Breast Cancer : ताजा खाना खाने की बजाय दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत में भी तेती से बढ़ रहा है। छोटे बच्चों और जेन जी जेनरेशन के लिए जंक फूड (जैसे बर्गर, पिज़्ज़ा, पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय, इंस्टेंट नूडल्स आदि) जीवन-शैली का हिस्सा बन चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में हुए कई वैज्ञानिक अध्ययनों से यह संकेत मिला है कि जंक फूड के अधिक इस्तेमाल से स्तन कैंसर (Breast Cancer) समेत 12 अन्य तरह के कैंसर का खतरा 2 फीसदी तक बढ़ सकता है। जंक फूड कैसे किसी की स्वास्थ्य को इतना ज्यादा खतरा पैदा करता है, इसे एक्सपर्ट से समझते हैं।
जंक फूड सीधे कैंसर पैदा नहीं करता बल्कि यह कई जैविक और जीवनशैली संबंधी प्रक्रियाओं के माध्यम से जोखिम को बढ़ाता है।
क्यों जंक फूड के अत्यधिक उपयोग से किसी के जीवन को इतना खतरा पैदा हो जाता है? जंक फूड आम तौर पर अत्यधिक प्रसंस्कृत (Ultra-processed Food) खाद्य पदार्थ होते हैं। इनमें बहुत अधिक चीनी, नमक, ट्रांस-फैट, कृत्रिम रंग-सुगंध और प्रिज़र्वेटिव होते हैं, जबकि फाइबर, विटामिन और खनिज कम होते हैं। उदाहरण के लिए चिप्स, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड मिठाइयां, प्रोसेस्ड मीट आदि।
दरअसल इन खाद्य पदार्थों को स्वादिष्ट और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रिजर्वेटिव्स का उपयोग किया जाता है। खाद्य पदार्थों को गलने, सड़ने से बचाने के लिए बतौर प्रिजर्वेटिव्स कई तरह के रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि इनका नियमित और अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। आइए इसे लखनऊ की डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव से आसान भाषा में समझते हैं।
उन्होंने पत्रिका से बातचीत में कहा कि भारत में पिछले 200-250 वर्षों में गेहूं खाने का चलन बढ़ा है। अब चक्की में गेहूं पिसवाकर खाने का चलन कम हुआ। आप सभी ने अनुभव किया होगा कि चक्की वाले आटे में कुछ दिनों में ही कीड़े लगने लग जाते थे और हमारी मां-बहनें आटे में से कीड़े को छानकर बाहर निकालती थीं और फिर रोटी बनाती थीं। अब उसकी जगह पैकेज्ड आटे इस्तेमाल में आने लगे हैं। उसमें बहुत लंबे समय तक कीड़े नहीं लगते हैं, क्योंकि उसमें प्रिजर्वेटिव्स मिलाया जाता है। इसी तरह चिप्स, बिस्कुट, कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड मिठाइयां, प्रोसेस्ड मीट आदि को लंबे समय तक बचाए रखने के लिए उसमें प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं ताकि उन चीजों को कीड़े नहीं खा सकें। मतलब जिसको कीड़े नहीं खा सकते हैं, उसको हम खा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि आटे की तरह बहुत सारे पैकेज्ड फूड में प्रिजर्वेटिव्स मिलाया जाता है। इसके अलावा व्हाइट शूगर भी किसी के स्वास्थ्य को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। जंक फ़ूड ज़्यादातर लिवर को अफेक्ट करता है दूसरे मैदे से बने पदार्थ इन्सुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाते हैं जिनसे पैंक्रियास पर ज़ोर पड़ता है और ओबेसिटी और डायबिटीज जल्दी घेर लेती है ।
कई वैज्ञानिक शोधों में यह पाया है कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का अधिक उपभोग करना स्तन कैंसर के जोखिम से बढ़ा सकता है। एक रिसर्च के अनुसार जिन लोगों के आहार में ऐसे खाद्य पदार्थ सबसे अधिक थे, उनमें स्तन कैंसर का जोखिम लगभग 10% तक अधिक पाया गया। इसी तरह एक अन्य विश्लेषण में पाया गया कि यदि किसी व्यक्ति के भोजन में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की मात्रा 10% से ज्यादा होता है, तो उसमें स्तन कैंसर का खतरा लगभग 5% तक बढ़ सकता है। एक और अध्ययन में यह भी पाया गया कि इन खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से स्तन कैंसर से मृत्यु का जोखिम भी बढ़ सकता है।
यूं तो स्तन कैंसर को महिलाओं की बीमारी मानी जाती है लेकिन चिकित्सा अध्ययनों के अनुसार पुरुषों में स्तन कैंसर के मामले कुल स्तन कैंसर मामलों का लगभग 1% से भी कम होते हैं। यानी हर 100 स्तन कैंसर मरीजों में लगभग 1 मरीज पुरुष हो सकता है। यदि शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर अधिक हो जाए और टेस्टोस्टेरोन कम हो जाए, तो स्तन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। अधिकतर मामलों में यह बीमारी 60–70 वर्ष की उम्र के बाद देखने को मिलती है।
जंक फूड में कैलोरी बहुत अधिक मात्रा में होती है। यही वजह है कि इसके लगातार सेवन से मोटापा बढ़ता है। मोटापा स्तन कैंसर का एक बड़ा जोखिम कारक है क्योंकि शरीर में अतिरिक्त वसा से एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो स्तन कैंसर कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा दे सकता है।
प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शरीर में दीर्घकालिक सूजन पैदा कर सकते हैं। यह सूजन डीएनए को नुकसान पहुंचाने और कैंसर कोशिकाओं के विकास में योगदान कर सकती है। जंक फूड में कई प्रकार के रासायनिक एडिटिव्स, इमल्सीफायर और संरक्षक होते हैं। कुछ शोधों में यह पाया गया है कि ऐसे रसायन हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं और कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। एक और सच यह है कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकता है।
जंक फूड्स खाने से सीधे तौर पर कैंसर होता है? इसके जवाब में डॉ. चंद्रशेखर झा बताते हैं कि लैसेंट और ब्रिट्रिश जर्नल में प्रकाशित शोधों से यह जानकारी सामने आई है कि जंक फूड्स का सेवन कैंसर की संभावनाओं को बढ़ा देता है। यदि किसी कैंसर का खतरा किसी में 10 प्रतिशत है तो जंक फूड का सेवन उसमें 2 फीसदी का इजाफा कर सकता | जंक फूड की हाई कैलोरी मोटापा को बढ़ाती जो करीब 13 कैंसर के खतरों में प्रमुख कारक है | इस तरह से जंक फूड स्तन ( ब्रेस्ट), बड़ी आंत( कोलोरेक्टल) आमाशय( स्टमक) , अग्नाशय( पैंक्रियाज) के खतरों को बढ़ाने में मुख्य योगदान देता है |
अल्ट्रा प्रोसेस फूड में क्या ऐसा होता है, जो कैंसर की संभावना को बढ़ाने का काम करता है? इस सवाल के जवाब में डॉ. झा कहते हैं, 'जंक फूड में सिर्फ कैलोरी ज्यादा नहीं होती। इसमें ऐसे तत्व होते हैं जो सेवन करने वाले व्यक्ति के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं। व्यक्ति की कोशिकाओं के विकास को प्रभावित करता है।
जंक फूड में अधिक चीनी होती है। इससे रक्त शर्करा और इंसुलिन का स्तर बढ़ता है। लंबे समय तक ऐसा रहने से कोशिकाओं की वृद्धि बढ़ सकती है, जिससे कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
लोग जब जंक फूड अधिक खाने के आदी हो जाते हैं तब फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों की मात्रा उनकी थालियों में से गायब होने लग जाती हैं। इंसानों द्वारा प्राकृतिक और ताजे खानों की उपेक्षा करना इंसान की बड़ी भूल होती है क्योंकि प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर होते हैं जो कैंसर से बचाव में मदद करते हैं।
जंक फूड का प्रभाव तब और अधिक बढ़ जाता है जब कोई व्यक्ति शराब और सिगरेट का सेवन करने लग जाए। इनके अलावा अगर ऐसे व्यक्ति अगर किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि ना करे तो मुश्किल और बढ़ती जाती है। अगर जंक फूड रेगुलर खाने वाला मोटापे का शिकार हो और उसके पारिवारिक इतिहास में लाइफ स्टाइल डिजिज शामिल हो तो मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। जंक फूड अकेले ही जोखिम को बढ़ाने में सक्षम है, लेकिन इसके साथ अन्य वजह भी हों तो हालात और भी मुश्किल पैदा कर सकते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के दैनिक भोजन का बड़ा हिस्सा (20–30% या उससे ज्यादा) अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से आता है तो दीर्घकाल में कैंसर और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि कभी-कभार जंक फूड खाने से तत्काल कैंसर हो जाएगा।
भारत में जंक फूड का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। बाजार अनुसंधान संस्था Euromonitor के अनुसार, इन उत्पादों का बाजार आकार 2019 से 10 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ते हुए 2024 में 2.58 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अनुमान है कि यह 2029 तक बढ़कर 3.98 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा।
वास्तव में पैकेज्ड (अत्यधिक प्रोसेस्ड और अधिक कैलोरी वाले) खाद्य पदार्थों की घरेलू भोजन बजट में हिस्सेदारी 2015 में 6.5 प्रतिशत से बढ़कर 2019 में 12 प्रतिशत हो गई, यानी लगभग दोगुनी हो गई। इसी अवधि में घर के बाहर खाने पर खर्च भी 32 प्रतिशत बढ़कर 2015 में 61,900 करोड़ रुपये से 2019 में 82,000 करोड़ रुपये हो गया। यह जानकारी ग्लोगल फूड पॉलिसी रिपोर्ट, 2024 (Global Food Policy Report 2024) में दी गई है।
जंक फूड के सेवन को कम करके और ताजी साग व सब्जियां या ताजा भोजन करने से स्तन कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ताजे और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में एंटी एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं।