Eye Makeup with Kajal: क्या आपका काजल आपकी आंखों को बीमार कर रहा है? जानिए कैसे काजल आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। नेत्र विशेषज्ञ डॉ. जयदीप शर्मा से विस्तार से समझें
Eye Kohl: काजल सदियों से भारतीय श्रृंगार का अभिन्न हिस्सा रहा है। चाहे नवजात बच्चा हो या दुल्हन, आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए काजल का इस्तेमाल होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी आंखों की खूबसूरती बढ़ाने वाला यह काला टीका गंभीर इंफेक्शन और बीमारियों का कारण भी बन सकता है? काजल का गलत इस्तेमाल आपकी आंखों की रोशनी तक को प्रभावित कर सकता है। आइए डॉक्टर जयदीप शर्मा से काजल से होने वाले इंफेक्शन और उनसे बचाव के तरीके समझते हैं।
चिकित्सा विज्ञान (Ophthalmology) के अनुसार, हमारी आंखें शरीर का सबसे नाजुक हिस्सा हैं। जब हम काजल लगाते हैं, तो वह सीधे आंखों की 'म्यूकस मेम्ब्रेन' (Mucus Membrane) के संपर्क में आता है। इंफेक्शन होने के मुख्य कारण हैं जैसे
मेइबोमियन ग्लैंड्स का ब्लॉक होना (Blockage of Meibomian Glands)
हमारी पलकों के किनारों पर छोटी-छोटी तेल ग्रंथियां होती हैं जिन्हें 'मेइबोमियन ग्लैंड्स' कहते हैं। ये ग्रंथियां एक खास तेल निकालती हैं जो आंसुओं को जल्दी सूखने नहीं देता। काजल लगाने से ये छेद बंद हो जाते हैं, जिससे आंखों में सूखापन (Dry Eye) और 'स्टाई' (Stye/बिलनी) जैसी गांठें बन सकती हैं।
बाजार में मिलने वाले कई काजल और आईलाइनर में लेड (शीशा), मरकरी (पारा) और पैराबेंस (Parabens) जैसे तत्व होते हैं। लंबे समय तक इनका इस्तेमाल 'कॉर्नियल अल्सर' या आंखों की सतह पर जख्म का कारण बन सकता है। बैक्टीरिया का पनपना (Bacterial Contamination) काजल की डिब्बी या पेंसिल अक्सर लंबे समय तक चलती है। बार-बार इस्तेमाल करने से इसमें बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। पुराने काजल का उपयोग करने से कंजंक्टिवाइटिस (Conjunctivitis) या 'आंख आना' जैसी समस्या आम है।
अक्सर माना जाता है कि घर पर बादाम या दीये की लौ से बनाया गया काजल सुरक्षित होता है। लेकिन एक्सपर्ट्ज़ इसके प्रति आगाह करते हैं। घर के बने काजल में 'कार्बन' की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसके अलावा, इसे बनाते समय स्वच्छता (Hygiene) का ध्यान न रखने से इसमें फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
काजल से होने वाली प्रमुख बीमारियां
अगर आप काजल के बिना नहीं रह सकते, तो इन सावधानियों को जरूर बरतें:
अपना काजल किसी से शेयर न करें: मेकअप प्रोडक्ट्स साझा करने से बैक्टीरिया का ट्रांसफर त्वरित गति से होता है।
एक्सपायरी डेट का ध्यान रखें: काजल को खोलने के 3-4 महीने बाद बदल देना चाहिए।
सोने से पहले मेकअप हटाएं: रात को सोते समय काजल साफ करना अनिवार्य है। इसके लिए मिसेलर वॉटर या नारियल तेल का इस्तेमाल करें।
वॉटरलाइन के बाहर लगाएं: काजल को पलकों के अंदर लगाने के बजाय पलकों की जड़ों के बाहर (Lash line) लगाएं।
'हाइपोएलर्जेनिक' ( Hypoallergenic) काजल का चुनाव कैसे करें?
उन्होने इस सवाल के जवाब में बताया, हाइपोएलर्जेनिक' (Hypoallergenic) काजल का मतलब है ऐसा उत्पाद जिसे विशेष रूप से संवेदनशील आंखों के लिए बनाया गया है ताकि एलर्जी का खतरा कम से कम हो। इसका चुनाव करते समय इन सुझावों का पालन करें।
काजल की डिब्बी या पेंसिल में बैक्टीरिया कैसे पनपते हैं और क्या एक ही काजल को लंबे समय तक इस्तेमाल करने से 'कंजंक्टिवाइटिस' (आंख आना) का खतरा रहता है?
उन्होने बताया , काजल लगाने का तरीका ही बैक्टीरिया के लिए रास्ता खोल देता है। जब हम काजल की पेंसिल को अपनी आंखों की वॉटरलाइन (Waterline) पर रगड़ते हैं, तो आंखों की नमी, मृत कोशिकाएं (Dead cells) और पलकों पर मौजूद प्राकृतिक तेल पेंसिल की नोक पर चिपक जाते हैं। जब इसे वापस डिब्बी या ढक्कन में रखा जाता है, तो बंद और नमी वाली जगह बैक्टीरिया (जैसे Staphylococcus) पनपते है। साथ ही, बार-बार डिब्बी खोलने से हवा में मौजूद धूल-कण भी इसके अंदर चले जाते हैं।
क्या एक ही काजल को लंबे समय तक इस्तेमाल करने से 'कंजंक्टिवाइटिस' का खतरा बढ़ जाता है?
उन्होने कहा, काजल की भी एक 'शेल्फ लाइफ' होती है। 3-4 महीने से ज्यादा पुराना काजल इस्तेमाल करने से उसमें बैक्टीरिया की संख्या इतनी बढ़ जाती है कि वह संक्रमण फैलाने लगता है। इससे न केवल कंजंक्टिवाइटिस (आंख आना), बल्कि कॉर्नियल इंफेक्शन का खतरा भी रहता है। संक्रमण से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपना काजल कभी किसी से साझा (Share) न करें और समय पूरा होते ही उसे बदल दें।
बाजार में मिलने वाले काजल में मौजूद लेड (शीशा), मरकरी या पैराबेन्स आंखों की कोर्निया को कैसे नुकसान पहुंचा सकते हैं?
उन्होने बताया , बाजार में मिलने वाले सस्ते या खराब गुणवत्ता वाले काजल में मौजूद लेड (शीशा), मरकरी (पारा) और पैराबेन्स आंखों के लिए बेहद जहरीले होते हैं। जब ये केमिकल आंखों के सीधे संपर्क में आते हैं, तो ये सुरक्षात्मक 'टियर फिल्म' को नष्ट कर देते हैं। लेड और मरकरी आंखों की बाहरी पारदर्शी परत यानी कॉर्निया पर रासायनिक जलन (Chemical irritation) पैदा करते हैं, जिससे धीरे-धीरे कॉर्निया पर सूक्ष्म खरोंचें या जख्म (Corneal Abrasions) बन सकते हैं। वहीं पैराबेन्स का इस्तेमाल प्रिजर्वेटिव के रूप में होता है, जो आंखों की कोशिकाओं में सूजन पैदा कर सकता है। लंबे समय तक इनका उपयोग कॉर्निया की संवेदनशीलता कम कर सकता है और गंभीर स्थिति में दृष्टि (Vision) को स्थायी रूप से धुंधला कर सकता है।
काजल लगाने के बाद होने वाली खुजली, लालिमा या पानी आने को क्या हमें सामान्य समझना चाहिए या यह किसी गंभीर इंफेक्शन का संकेत है?
उन्होने बताया , काजल लगाने के बाद होने वाली खुजली, लालिमा या पानी आने को कभी भी सामान्य नहीं समझना चाहिए। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आपकी आंखें उस उत्पाद के प्रति संवेदनशील हैं या उसमें मौजूद रसायनों से आपको 'कांटेक्ट डर्मेटाइटिस' ( Contact dermatitis) या एलर्जी हो रही है। प्रारंभ में यह मामूली जलन लग सकती है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना गंभीर संक्रमण (जैसे ब्लेफेराइटिस या कंजंक्टिवाइटिस) को निमंत्रण देना है। यदि पानी आने के साथ आंखों में चुभन या धुंधलापन महसूस हो, तो यह कॉर्नियल डैमेज का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत काजल का उपयोग बंद करें और आंखों को ठंडे पानी से धोकर डॉक्टर की सलाह लें।
हमारी पलकों के किनारों पर तेल बनाने वाली 'मीबोमियन ग्रंथियां' (Meibomian Glands) होती हैं। क्या काजल इन्हें बंद कर देता है? अगर ये बंद हो जाएं, तो क्या इससे 'स्टाई' (गुहेरी या बिलनी) होने का डर रहता है?
उन्होने बताया , काजल इन ग्रंथियों के लिए एक अवरोधक की तरह काम करता है। मीबोमियन ग्रंथियां पलकों के किनारों पर स्थित होती हैं और आंसुओं को सूखने से बचाने के लिए तेल का स्राव करती हैं। जब हम काजल को वॉटरलाइन या पलकों की जड़ों पर लगाते हैं, तो इसके बारीक कण इन सूक्ष्म छिद्रों को पूरी तरह ब्लॉक (बंद) कर देते हैं। एक बार जब ये ग्रंथियां बंद हो जाती हैं, तो तेल अंदर ही जमा होने लगता है, जिससे वहां बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। यही स्थिति 'स्टाई' (गुहेरी या बिलनी) का मुख्य कारण बनती है, जिसमें पलक पर दर्दनाक गांठ हो जाती है। लंबे समय तक ऐसा होने से ग्रंथियां स्थायी रूप से काम करना बंद कर सकती हैं।
क्या काजल आंखों की प्राकृतिक नमी (Tear Film) को प्रभावित करता है? क्या इससे 'ड्राई आई' की समस्या बढ़ सकती है?
उन्होने बताया, काजल आंखों की प्राकृतिक नमी यानी 'टियर फिल्म' (Tear Film) को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। हमारी टियर फिल्म तीन परतों से बनी होती है, जिसमें बाहरी परत तेल (Lipid) की होती है। काजल लगाने से पलकों की तेल ग्रंथियां ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे आंसुओं की यह सुरक्षात्मक परत कमजोर पड़ जाती है और आंसू बहुत जल्दी सूखने लगते हैं। जब आंखों की नमी तेजी से खत्म होती है, तो यह 'इवेपोरेटिव ड्राई आई' (Evaporative Dry Eye) की समस्या को जन्म देती है। इसके कारण आंखों में हमेशा किरकिरापन, जलन और भारीपन महसूस होता है। लंबे समय तक काजल का इस्तेमाल इस समस्या को और बढ़ा सकता है, जिससे आंखों की सतह पर सूजन का खतरा भी रहता है।
रात को बिना काजल साफ किए सो जाने से आंखों की सेहत पर क्या बुरा असर पड़ता है? इसे साफ करने के लिए सबसे सुरक्षित तरीका क्या है (जैसे- बेबी ऑयल या मिसेलर वॉटर)?
उन्होने बताया, रात को बिना काजल साफ किए सो जाने से आंखों पर 'क्रॉनिक इरिटेशन' का खतरा बढ़ जाता है। नींद के दौरान काजल के कण आंखों के अंदर जाकर जम जाते हैं, जिससे कॉर्निया पर खरोंच आ सकती है और सुबह उठने पर आंखें लाल व सूजी हुई मिल सकती हैं। यह लंबे समय में पलकों के झड़ने (Madarosis) और संक्रमण का कारण भी बनता है। इसे साफ करने का सबसे सुरक्षित तरीका मिसेलर वॉटर या नारियल तेल है। रूई के फाहे (Cotton pad) पर मिसेलर वॉटर लेकर पलकों पर कुछ सेकंड रखें और फिर हल्के हाथों से पोंछें। बेबी ऑयल भी एक अच्छा विकल्प है क्योंकि यह आंखों की कोमल त्वचा के लिए सौम्य होता है। कभी भी आंखों को जोर से रगड़कर काजल न छुड़ाएं।
छोटे बच्चों की आंखों में काजल डालना कितना खतरनाक हो सकता है? क्या इससे उनकी आंखों की रोशनी या टियर डक्ट्स (आंसू की नली) ब्लॉक हो सकती हैं?
उन्होने बताया, छोटे बच्चों की आंखें वयस्कों की तुलना में कहीं अधिक संवेदनशील होती हैं। नवजात शिशुओं में काजल डालना काफी खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह उनकी टियर डक्ट्स (आंसू की नली) को ब्लॉक कर सकता है। अगर यह नली बंद हो जाए, तो आंखों से लगातार पानी आने और गंभीर संक्रमण (Infection) का खतरा रहता है। इसके अलावा, काजल में मौजूद लेड (सीसा) बच्चे के शरीर में अवशोषित होकर उनके विकास को प्रभावित कर सकता है। काजल लगाने के दौरान हाथ या सलाई से आंखों की पुतली पर खरोंच लगने का डर रहता है, जिससे आंखों की रोशनी पर बुरा असर पड़ सकता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, बच्चों की प्राकृतिक चमक ही उनकी सुंदरता है, उन्हें काजल की आवश्यकता नहीं होती।
क्या घर पर जलाकर बनाया गया काजल (बादाम या दीये का काजल) बाहर के काजल से ज्यादा सुरक्षित है, या उसमें मौजूद 'कार्बन' भी आंखों को नुकसान पहुंचाता है?
उन्होने बताया, घर पर बना काजल (बादाम या दीये की लौ से तैयार) पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। भले ही इसमें बाहर के काजल की तरह हानिकारक केमिकल्स या लेड न हो, लेकिन इसमें 'कार्बन' (कालिख) की मात्रा बहुत अधिक होती है। यह कार्बन कण आंखों में सूक्ष्म रगड़ पैदा कर सकते हैं, जिससे जलन और लाली की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, घर पर काजल बनाते समय स्वच्छता (Hygiene) का ध्यान रखना कठिन होता है। मैं अक्सर इसे लगाने की सलाह नहीं देता क्योंकि यह 'टियर फिल्म' को प्रदूषित कर आंखों की प्राकृतिक नमी को नुकसान पहुंचाता है। मैं अक्सर इसे लगाने की सलाह नहीं देता क्योंकि यह 'टियर फिल्म' को प्रदूषित कर आंखों की प्राकृतिक नमी को नुकसान पहुंचाता है। मैं काजल नहीं लगाने की हमेशा सलाह देता हूंं और अगर कोई लगाता है तो उसे बहुत सावधानी के साथ सोने से पहले साफ कर ले।
काजल साफ करने के लिए इसका उपयोग कैसे करें