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Kanha Tiger Reserve: कान्हा ने मां से बिछड़े 15 शावकों को बनाया जंगल का ‘किंग’, दहाड़ से गुलजार हो रहा पूरा क्षेत्र

Kanha Tiger reserve : मध्यप्रदेश में पन्ना और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व कान्हा के तैयार बाघों की दहाड़ से गुलजार हो रहे हैं। शावकों को 11 हेक्टेयर के प्राकृतिक बाड़े में इंसानों से दूर जंगल में शिकार करने का कड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस बारे में विस्तार से पढ़िए मनीष गर्ग की विशेष रिपोर्ट।
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Aug 26, 2026
Kanha Tiger Reserve
कान्हा में देश का पहला री-वाइल्डिंग सेंटर खुला है। (Photo: Rajasthan Patrika)

Kanha Tiger Reserve : कान्हा टाइगर रिजर्व का मुक्की परिक्षेत्र वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में देश में एक अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। वर्ष 2007 में स्थापित देश के इस पहले 'री-वाइल्डिंग सेंटर' ने अब तक मां से बिछड़े या रेस्क्यू किए गए 15 बेसहारा शावकों को फिर से पूरी तरह ‘जंगली’ बनाकर जंगलों में सुरक्षित लौटाया है। आज इस सेंटर की बदौलत पन्ना और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व नौरादेही रिजर्व नए बाघों से गुलजार हो रहे हैं।

11 हेक्टेयर में फैला 'मिनी जंगल'

शावकों को इंसानी छाप से दूर रखने के लिए 11 हेक्टेयर का एक विशेष बाड़ा बनाया गया है। 3.7 मीटर ऊंची मजबूत चेन-लिंक बाड़ से घिरे इस इलाके में कृत्रिम नहीं, बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक वातावरण है। इसमें प्राकृतिक जलस्रोत, घना जंगल, घास के मैदान और चट्टानें शामिल हैं, ताकि शावकों को लगे कि वे खुले जंगल में ही रह रहे हैं। यहाँ करीब डेढ़ से दो साल की कड़ी मेहनत के बाद शावक मुख्य जंगल में छोड़े जाने के लायक तैयार होते हैं।

लाइव पढ़ाया जा रहा है शिकार का पाठ

शावकों की प्राकृतिक शिकार क्षमता को जीवित करने के लिए मुख्य बाड़े से सटा 35 हेक्टेयर का एक शाकाहारी वन्यजीव बाड़ा बनाया गया है। इसमें चीतल जैसे जानवरों को रखा जाता है। शावकों को इस बाड़े में ले जाकर खुद शिकार करना सिखाया जाता है, ताकि जंगल में छूटने के बाद उन्हें भोजन के लिए किसी पर निर्भर न रहना पड़े।

500 मीटर दूर कंट्रोल रूम से नजर

शावकों में इंसानी आदतें न पनपें, इसके लिए बाड़े की बाहरी दीवारों को स्थानीय घास से ढककर अपारदर्शी बनाया गया है। निगरानी के लिए बाड़े में 4 लकड़ी के वॉच टावर और 500 मीटर दूर एक हाई-टेक कंट्रोल रूम बनाया गया है। वनकर्मी दूर रहकर ही कैमरों और टावर से हर गतिविधि पर नजर रखते हैं।

नर्सरी का काम करता है क्वारंटाइन हाउस

जंगल से रेस्क्यू कर लाए गए 3 माह से 1 वर्ष तक के छोटे शावकों को सबसे पहले क्वारंटाइन हाउस में रखा जाता है। यहाँ दो अलग-अलग हिस्से हैं ताकि एक साथ दो अलग-अलग शावकों की देखभाल हो सके। जब शावक शारीरिक रूप से मजबूत और शिकार में दक्ष होने लगते हैं, तब उन्हें बड़े बाड़े में शिफ्ट किया जाता है।

दर्ज होता है शावक की एक-एक गतिविधि

कान्हा प्रबंधन शावकों के व्यवहार, उनकी दैनिक सेहत, शिकार करने की टाइमिंग और मेडिकल जांच का एक-एक रिकॉर्ड निर्धारित प्रारूप में दर्ज करता है। इसी डेटा के आधार पर तय होता है कि शावक अब खुले जंगल में जाने के लिए कितना तैयार है।

सफल मॉडल को देखने दूसरे प्रदेशों से भी आ रहे लोग

कान्हा टाइगर रिजर्व क्षेत्र संचालक रवींद्र मणि त्रिपाठी ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि यह देश का पहला री-वाइल्डिंग सेंटर है। हमारा मकसद सिर्फ शावकों का पालन-पोषण करना नहीं, बल्कि उनकी नैसर्गिक जंगली प्रवृत्तियों को पुनर्जीवित करना है। कान्हा के इस सफल मॉडल को सीखने के लिए राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के वन अधिकारी यहाँ आते हैं। राजस्थान ने तो कान्हा की तर्ज पर अपने यहाँ भी री-वाइल्डिंग सेंटर शुरू किया है।

Updated on:
26 Aug 2026 05:57 pm
Published on:
26 Aug 2026 05:54 pm