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Udayagiri Caves : मैं उदयगिरि हूं… 20 गुफाओं में समेटे हूं विदिशा का सदियों पुराना इतिहास

Udayagiri : मैं उदयगिरि हूं...। विदिशा की धरती पर सदियों से खड़ा वह मौन इतिहास हूं, जिसने राजाओं का वैभव देखा है। धर्म और आस्था के बदलते स्वरूपों को महसूस किया है और पत्थरों पर तराशी गई उन कहानियों को आज तक संभालकर रखा है, जिन्हें समय भी मिटा नहीं सका। मेरी पहाड़ी पर बनी 20 गुफाएं केवल चट्टानों को काटकर बनाए गए कक्ष नहीं हैं, बल्कि गुप्तकालीन कला, स्थापत्य, धर्म और तत्कालीन राजनीतिक-सामाजिक जीवन की जीवित निशानियां हैं। विदिशा के इतिहास का मानवीकरण करते हुए अजीत शुक्ला ने विशेष रिपोर्ट लिखी है। आप भी पढ़िए।
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भारत

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Swatantra Mishra

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अजीत शुक्ला

Aug 26, 2026

Udayagiri History

पढ़िए उदयगिरी का इतिहास (Photo: Rajasthan Patrika)

Udayagiri Caves : मेरी पहचान का सबसे चमकदार अध्याय गुप्तकाल से जुड़ा है। चौथी-पांचवीं शताब्दी के दौरान सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के समय मेरा वैभव अपने शिखर पर पहुंचा। मेरी गुफाओं में उत्कीर्ण शिलालेख आज भी उस दौर की कहानी सुनाते हैं। इनमें चंद्रगुप्त द्वितीय के मंत्री और संधिविग्रहिक वीरसेन का उल्लेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इन अभिलेखों से यह प्रमाणित होता है कि मेरा संबंध गुप्तकालीन सत्ता और उसके प्रमुख व्यक्तियों से रहा था।

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