
सरकारी अस्पतालों में इलाज से लेकर जांच तक के लिए निजी भागीदारी बढ़ाई जाएगी। (Photo: Anugrah Soloman)
Government Hospital : दिल्ली में हुई हालिया बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल के विस्तार की संभावनाओं पर मंथन हुआ। दूसरी ओर, जयपुर के मेट्रो मास अस्पताल को अनुबंध की शर्तों की पालना नहीं करने पर नोटिस जारी होना इस मॉडल की निगरानी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। यानी एक तरफ सरकार अस्पताल बनाएगी, जमीन देगी, उपकरण और आधारभूत ढांचा खड़ा करेगी। दूसरी तरफ संचालन में निजी भागीदारी बढ़ाने की तैयारी होगी। ऐसे में मूल सवाल यही है जब सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में लगातार निवेश हो रहा है, तो किन सेवाओं को पीपीपी में देना जरूरी है और उसके लिए सरकार की लागत, निजी सेवा प्रदाता की कमाई और मरीज को मिलने वाली सुविधा का संतुलन कैसे तय होगा?
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