Chia Seed Farming in CG: बालोद जिले में कृषि के क्षेत्र में एक नई और सकारात्मक बदलाव की बयार बह रही है। पारंपरिक फसलों के बीच अब किसान वैकल्पिक और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
Chia Seed Farming in CG: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में कृषि के क्षेत्र में एक नई और सकारात्मक बदलाव की बयार बह रही है। पारंपरिक फसलों के बीच अब किसान वैकल्पिक और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी क्रम में चिया सीड की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जो कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल के रूप में उभर रही है।
इस बदलाव के पीछे ग्राम जगन्नाथपुर निवासी योगेश्वर देशमुख का महत्वपूर्ण योगदान है, जो किसानों को आधुनिक तकनीक और बाजार की समझ के साथ इस खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
योगेश्वर देशमुख ने जिले के किसानों को चिया सीड की खेती के लिए प्रशिक्षित किया और उन्हें इसकी बुवाई से लेकर कटाई तक की पूरी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने किसानों को यह भी बताया कि कैसे कम संसाधनों में इस फसल से बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है। उनके मार्गदर्शन में कई किसानों ने इस फसल को अपनाया और अब बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं।
अर्जुंदा तहसील के ग्राम सिब्दी निवासी प्रगतिशील किसान डॉ. संदीप बेलचंदन ने अपने नवाचार और दूरदर्शिता से जिले में चिया सीड की खेती को नई पहचान दिलाई है। उन्होंने लगभग 3 एकड़ भूमि में इस फसल का सफल उत्पादन कर यह साबित किया है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ नए विकल्पों को अपनाएं, तो कम संसाधनों में भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है।
डॉ. बेलचंदन ने न केवल इस फसल को अपनाया, बल्कि इसकी तकनीकी बारीकियों को समझते हुए वैज्ञानिक तरीके से खेती की, जिससे उन्हें अच्छे उत्पादन की उम्मीद है। उनका मानना है कि चिया सीड की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम आती है, सिंचाई की जरूरत भी सीमित होती है और बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है।
उनके इस प्रयास ने आसपास के किसानों को भी प्रेरित किया है, जो अब उनके खेतों का निरीक्षण कर इस नई फसल के बारे में जानकारी ले रहे हैं और इसे अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। इस तरह डॉ. बेलचंदन का प्रयोग न केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी बन रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में कृषि के नए मॉडल के रूप में उभर रहा है।
चिया सीड को ‘सुपरफूड’ के रूप में वैश्विक पहचान मिल चुकी है, जिसके चलते इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इस फसल के विपणन के लिए मध्यप्रदेश की नीमच मंडी एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है, जहां किसानों को अच्छी कीमत मिल रही है। बालोद के किसान भी अब अपनी उपज यहां बेचने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
चिया सीड को एक “सुपरफूड” माना जाता है, क्योंकि इसमें शरीर के लिए जरूरी कई पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत है, जो हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, पाचन तंत्र को मजबूत करने और शरीर की ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है।
नियमित सेवन से यह वजन नियंत्रित रखने, ब्लड शुगर संतुलित करने और इम्युनिटी बढ़ाने में भी सहायक होता है। साथ ही, इसमें मौजूद पोषक तत्व हड्डियों को मजबूत बनाने और त्वचा व बालों को स्वस्थ रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे यह संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी साबित होता है।
जिले के अन्य किसान भी अब इस खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। डॉ. बेलचंदन के खेत का निरीक्षण कर किसान नई तकनीकों को समझ रहे हैं और इसे अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। यह पहल धीरे-धीरे जिले में एक नई कृषि क्रांति का रूप ले रही है, जो किसानों की आय बढ़ाने में सहायक साबित हो सकती है।
चिया सीड की खेती को खास बनाती है इसकी कम लागत और कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन देने की क्षमता। यह फसल कम पानी में भी आसानी से तैयार हो जाती है, जिससे उन क्षेत्रों के किसानों के लिए यह एक बेहतर विकल्प बनकर उभरी है जहां सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं है। इसके साथ ही इसमें कीटनाशकों की आवश्यकता भी बहुत कम होती है, जिससे न केवल लागत घटती है बल्कि पर्यावरण और मिट्टी की सेहत भी बेहतर बनी रहती है।
कम समय में तैयार होने वाली इस फसल से किसानों को जल्दी उत्पादन मिल जाता है, जिससे उनकी आय का चक्र तेज होता है। यही कारण है कि छोटे और सीमांत किसान, जिनके पास सीमित संसाधन होते हैं, इस खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। बाजार में चिया सीड की बढ़ती मांग और अच्छे दाम मिलने की संभावना इसे और भी लाभकारी बनाती है, जिससे यह फसल भविष्य में किसानों के लिए आय का मजबूत और टिकाऊ स्रोत साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को सही मार्गदर्शन और बाजार की सुविधाएं मिलती रहें, तो चिया सीड की खेती आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए आय का बड़ा स्रोत बन सकती है। यह फसल न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि कृषि के क्षेत्र में नवाचार को भी बढ़ावा दे रही है।