Mount Vesuvius: इटली में माउंट वेसुवियस के फटने से दो शहर तबाह हो गए और 16 हजार लोग मारे गए। अब उन शहरों में रौनक लौट रही है। आइए यहां पढ़ते हैं पूरी कहानी।
Mount Vesuvius Eruption: इटली का माउंट वेसुवियस (Mount Vesuvius) 79 ईस्वी में 24 अगस्त के दिन फटा और खौलता हुआ लावा और गैस दो शहरों में घुस आया। जीते और जागते दो शहर पूरी तरह से तबाह हो गए। इन दो शहरों के अलावे आसपास की आबादी वाले गांव और शहरों में काफी तबाही मची थी। यह बताया जाता है कि दो प्राचीन शहर ज्वालामुखी की राख के नीचे 1600 वर्षों तक दफन रहे।
Disaster of Mount Vesuvius: इटली के नैप्लस की खाड़ी में माउंट वेसुवियस ज्वालामुखी फटा और गर्म लावा और जहरीला गैस पोम्पेई (Pompeii) और हरकुलेनियम (Herculaneum) में बहुत तेजी से फैलता गया। इसके चलते तापमान इतना ज्यादा बढ़ गया कि इंसान, जानवर, जंगल सबकुछ पिघल गए और जब तापमान कम हुआ तो ये पत्थर जैसे कठोर वस्तु में बदल गए। ईटली के ये दो प्राचीन शहर नष्ट हो गए।
16 Thousand People Killed after Mount Vesuvius eruption: ज्वालामुखी के फटने से लावा और जहरीले गैस फैलने से दोनों शहरों का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया और ऑक्सीजन के स्तर में काफी कमी आ गई। इसके चलते दोनों शहरों में मौजूद करीब 16 हजार लोगों का दम घुटने और दिमाग की नस फटने से मौत हो गई।
दोनों शहर जहां नेस्तानाबूद हुए थे, उन स्थलों की खुदाई 18वीं शताब्दी के मध्य में हुई और वहां से इंसानी सभ्यता के बहुत सारे प्रमाण मिले। इन स्थलों की खुदाई से पुरातत्व के आधुनिक विज्ञान का उदय हुआ। साक्ष्य के तौर पर भारी कपड़े, शरद ऋतु के ताजे फल और सब्जियां अवशेष के तौर पर मिले। वहां से शराब के जार भी पाए गए। हालांकि 24 अगस्त की तारीख को व्यापक तौर पर स्वीकार कर लिया गया है लेकिन खुदाई के बाद विद्वानों का मानना है कि यह घटना अक्टूबर और नवंबर महीने में हुई होगी।
खोज में यह भी पाया गया कि एक इंसान का मस्तिष्क शीशे में तब्दील हो गया। उसका शव पहली बार 1960 के दशक में कॉलेज ऑफ़ द ऑगस्टेल्स नामक एक इमारत में मिला था। वह सम्राट ऑगस्टस के प्रशंसक था और उसकी मृत्यु 14 ईस्वी में हुई थी। शोध में यह पाया गया कि वह युवक कॉलेज का संरक्षक था। उनके अवशेषों की वर्ष 2018 में पुनः जांच की गई।
Mount Vesuvius last eruption: माउंट वेसुवियस में आखिरी बार 1944 में ज्वालामुखी फटा था। पिछले 8 दशकों से यहां शांति है और इन दोनों शहरों में जीवन फिर से लौटने लगा है। यूनेस्को ने इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित कर दिया है।