
Education in MP: जबलपुर जिले के बरगी बांध के लबालब पानी में जलसमुद्र की तरह लहरें उठ रही हैं। इन्हीं तेज लहरों के बीच एक छोटी नाव आगे बढ़ती है। उसमें बैठे हैं स्कूल जाने वाले 10 मासूम… न किसी के पास लाइफ जैकेट है, न नाव की सुरक्षा का कोई इंतजाम। यह एक दिन का जोखिम नहीं, बल्कि कठौतिया गांव के बच्चों की रोज की पढ़ाई की मजबूरी है।
बरगी बांध के डूब क्षेत्र में बसे करीब 300 आबादी वाले कठौतिया गांव की एकीकृत माध्यमिक शाला में 25 बच्चे अध्ययनरत हैं। इनमें बढ़ैयाखेड़ा के चार और कठौतिया टोला के छह बच्चे रोज बांध का करीब 600 मीटर जलभराव नाव से पार कर स्कूल पहुंचते हैं।
बढ़ैयाखेरा और कठौतिया टोला से स्कूल तक सड़क मार्ग से करीब छह किलोमीटर का सफर है। आने-जाने में बच्चों को रोज करीब 12 किलोमीटर का फेरा लगाना पड़ता है। साइकिल की सुविधा नहीं होने से छह बच्चे खास तौर पर परेशान हैं। ऐसे में जलभराव पार करने के लिए नाव ही उनका सहारा बन गई है। नाविक को सप्ताह या महीने के हिसाब से किराया दिया जाता है।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्कूल के शिक्षक अभिषेक यादव और बाला प्रसाद पटेल भी नाव से स्कूल पहुंचते हैं। कई बार उन्हें खुद पतवार थामनी पड़ती है। गहरे पानी में बच्चों के साथ किसी भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बच्चे जब तक शाम को सुरक्षित घर नहीं लौटते, माता-पिता की चिंता बनी रहती है। हैरानी यह है कि 23 जुलाई को डीपीसी योगेश शर्मा भी नाव से स्कूल पहुंचकर निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी बच्चों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था नहीं हो सकी।
बच्चों के पास लाइफ जैकेट तक नहीं हैं। प्रशासन ने न सुरक्षित नाव उपलब्ध कराई और न ही सुरक्षा उपकरण। ग्रामीण विजय कुमार का कहना है कि पढ़ाई जरूरी है, लेकिन बच्चों की जान से बड़ी कोई चीज नहीं। बरगी का पानी बढ़ा होने के बावजूद बच्चे रोज नाव से आ-जा रहे हैं। आठवीं के बाद बच्चों को करीब आठ किलोमीटर दूर जमफार जाना पड़ता है। वहीं कठौतिया टोला को इसी गांव का हिस्सा मानने के कारण बच्चों को साइकिल योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कठौतिया-बढ़ैयाखेड़ा को मंडला जिले में शामिल किया जाना चाहिए। वहां से संपर्क मार्ग सुविधाजनक है। प्रशासनिक सीमाओं और भौगोलिक स्थिति के बीच गांव के बच्चों को शिक्षा के लिए रोज जोखिम उठाना पड़ रहा है।
डीपीसी योगेश शर्मा ने कहा कि नाव से जाकर स्कूल का निरीक्षण किया है। बढ़ैयाखेड़ा और कठौतिया टोला के बच्चे तथा शिक्षक नाव से स्कूल जाते हैं। बच्चों के लिए लाइफ सपोर्ट जैकेट की व्यवस्था के लिए शीघ्र पहल की जाएगी। स्कूल भवन की मरम्मत के लिए 2.90 लाख रुपए स्वीकृत हो चुके हैं। बारिश के बाद काम कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि गांव को मंडला जिले में मर्ज किया जाना चाहिए, क्योंकि वहां से संपर्क मार्ग है और यहां से निगरानी में भी समस्या होती है।