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Indigenous Goods: विदेशी सामान से मोहभंग! भारत में लोकल प्रोडक्ट्स को लेकर बढ़ा भरोसा, चीन-अमेरिका रह गए पीछे

Indigenous Goods: 63% भारतीय विदेशी सामानों के आयात पर कड़ी पाबंदियां लगाना चाहते हैं। इस मामले में भारत ने अमेरिका और चीन जैसे देशों को भी बहुत पीछे छोड़ दिया है। एक सर्वे में सामने आया है कि अब देश के लोग विदेशी ब्रांड्स की जगह स्वदेशी और लोकल उत्पादों को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। जानिए पूरी रिपोर्ट।

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May 05, 2026
विदेशी सामान पर पाबंदी (AI)

Indigenous Goods: एक वक्त था जब देश में विदेशी सामान को लेकर देश में बड़ा क्रेज था। आम लोग विदेशी ब्रांड के कपड़े, जूते, घड़ी और गाड़ी का इस्तेमाल करने वालों को 'बड़ा आदमी' कहकर बुलाते थे। लेकिन अब लोगों का रुख पूरी तरह बदलत रहा है। 'इप्सोस' (Ipsos) ने एक ग्लोबल सर्वे किया है। इसके मुताबिक, भारत के लोग चाहते हैं कि विदेशी सामान के आयात पर ज्यादा से ज्यादा पाबंदियां लगाई जाएं। लोग अब विदेशी चीजों को छोड़कर ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना रहे हैं।

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विदेशी सामान पर लगाम

मई-जून 2025 के दौरान इप्सोस द्वारा 43 देशों में 33,083 लोगों के बीच एक सर्वे किया गया। इस सर्वे में 16 से 74 साल तक के लोगों से यह जानने की कोशिश की गई कि क्या उनके देश में विदेशी सामान के आने पर रोक लगाने के लिए व्यापारिक पाबंदियां लगाई जानी चाहिए? ग्लोबल लेवल पर देखा जाए तो औसतन 48% लोग मानते हैं कि विदेशी सामान पर कुछ लगाम होनी चाहिए। भारत में हर 10 में से 6 से ज्यादा लोग कहते हैं कि बाजार में विदेशी सामान की बाढ़ को कंट्रोल करना जरूरी है।

इंडोनेशिया विदेशी सामानों पर लगाम के मामले में सबसे आगे

विदेशी सामानों पर लगाम लगाने के मामले में इंडोनेशिया के लोग दुनिया में सबसे आगे निकल गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इंडोनेशिया की जनता अपनी लोकल मार्केट को लेकर गंभीर है। इंडोनेशिया के करीब 92% लोग यह मानते हैं कि उनके देश में बाहर से आने वाले माल पर भारी पाबंदियां लगनी चाहिए। दुनिया के किसी भी दूसरे देश के मुकाबले इंडोनेशिया में यह मांग सबसे ज्यादा है। लोग विदेशी सामानों के मुकाबले अपनी घरेलू चीजों को ज्यादा महत्त्व देना चाहते हैं।

विदेशी माल पर रोक लगाना बेहद जरूरी

इस लिस्ट में इंडोनेशिया के बाद भारत दूसरे नंबर पर है। देश के करीब 63% लोग यह मानते हैं कि विदेशी सामानों की एंट्री पर लगाम लगनी चाहिए। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय अब अपने स्थानीय कारोबार और स्वदेशी बाजार को बचाने के लिए काफी गंभीर हो गए हैं। लोगों का मानना है कि अगर घरेलू व्यापार को मजबूती देनी है, तो बाजार में विदेशी माल के बढ़ते दखल को रोकना बेहद जरूरी है।

इकोनॉमी मजबूत करने की सोच काफी मजबूत

यूरोप और एशिया के विकसित देशों में भी अब विदेशी सामान को लेकर लोगों का नजरिया बदलने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस के 58% लोग मानते हैं कि उनके देश के बाजार में विदेशी माल की एंट्री कम होनी चाहिए। वहीं, तकनीक के मामले में आगे रहने वाले दक्षिण कोरिया का हाल भी कुछ ऐसा ही है, 52% लोग विदेशी सामानों पर पाबंदी लगाने के पक्ष में हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि दुनिया के बड़े देशों में अब अपनी लोकल इकोनॉमी को सुरक्षित रखने की सोच काफी मजबूत होती जा रही है।

महाशक्तियां इस मामले में काफी पीछे

दुनिया की बड़ी महाशक्तियां इस मामले में काफी पीछे नजर आ रही हैं। चीन, जो खुद पूरी दुनिया के बाजारों में अपना सामान भर देता है, वहां के सिर्फ 47% लोग ही विदेशी आयात पर रोक लगाने की बात कह रहे हैं। वहीं अगर अमीर और विकसित देशों की बात करें, तो अमेरिका में 37%, जापान में 35% और जर्मनी में महज 34% लोग ही विदेशी सामान पर पाबंदी लगाने के पक्ष में हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत और इंडोनेशिया जैसे देश अपने लोकल बाजार को लेकर काफी गंभीर हैं, जबकि अमेरिका और चीन जैसे देश अभी भी विदेशी सामान के आने को लेकर ज्यादा खुले हुए हैं।

क्वालिटी में किसी से कम नहीं है देसी माल

एक समय था जब लोगों को लगता था कि देसी सामान की क्वालिटी अच्छी नहीं होती। लेकिन आज भारतीय कंपनियां हर क्षेत्र में विदेशी कंपनियों को कड़ी टक्कर दे रही हैं। चाहे वो मोबाइल फोन हो, कपड़े हों, दवाइयां हों या फिर गाड़ियां। आज लोग विदेशी कारों के मुकाबले टाटा और महिंद्रा जैसी भारतीय कंपनियों की गाड़ियां शान से खरीद रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि ये गाड़ियां ज्यादा सुरक्षित और मजबूत हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में भी भारतीय कंपनियां अब बहुत अच्छा काम कर रही हैं। डिजिटल पेमेंट (UPI) में भारत ने अमेरिका और यूरोप को भी बहुत पीछे छोड़ दिया है और देश के उत्पादों पर भरोसा बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि 63% भारतीय चाहते हैं कि सरकार विदेशी आयात पर और ज्यादा टैक्स या कस्टम ड्यूटी लगाए ताकि विदेशी सामान महंगा हो जाए और लोग स्वदेशी सामान ही खरीदें।

रोजगार और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर

विदेशी सामान पर पाबंदी चाहने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण रोजगार भी है। आज का युवा पढ़-लिख कर नौकरी चाहता है। अगर भारत में विदेशी माल धड़ल्ले से बिकता रहेगा, तो यहां फैक्टरियां कैसे लगेंगी? और अगर फैक्टरियां नहीं लगेंगी, तो नौकरियां कहां से आएंगी? भारतीय यह बात बहुत अच्छी तरह समझ गए हैं कि 'अपना पैसा, अपने देश में' रहना चाहिए।

जब सरकार विदेशी सामान पर टैक्स बढ़ाती है, तो विदेशी कंपनियों को मजबूरन भारत में ही अपनी फैक्टरी लगानी पड़ती है। एप्पल (Apple) जैसी दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी का उदाहरण सामने है। जब भारत ने मोबाइल आयात पर सख्ती की, तो एप्पल को भारत में ही अपने आईफोन (iPhone) बनाने पड़े। इससे हजारों भारतीयों को सीधा रोजगार मिला। जनता अब इसी मॉडल को हर सेक्टर में देखना चाहती है। लोगों का कहना है कि विदेशी कंपनियों को भारत के इतने बड़े बाजार में अपना माल बेचना है, तो उन्हें वो माल भारत में ही बनाना होगा।

विदेशी कंपनियों के लिए खतरे की घंटी

यह सर्वे उन विदेशी कंपनियों के लिए खतरे की घंटी है, जो भारत को सिर्फ एक बड़ा बाजार समझकर यहां से बस अपना मुनाफा कमाने के चक्कर में हैं। 100 लोगों में से 60 से ज्यादा भारतीय अपनी सोच बदल चुके हैं और वह विदेशी माल की इस बाढ़ के खिलाफ खड़े हैं। भारतीय ग्राहक पहले से कहीं ज्यादा जागरूक और स्मार्ट हो गया है, वह खरीदारी करते वक्त यह जरूर देखता है कि सामान 'मेड इन इंडिया' है या नहीं।

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Published on:
05 May 2026 10:00 am
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