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Appendicitis: एपेंडिक्स का ‘मास्टर सिग्नल’ नाभि से शुरू होकर दाईं तरफ क्यों खिसकता है दर्द? जानिए एक्सपर्ट्स से

Stomach Pain v/s Appendicitis: नाभि के पास दर्द और फिर निचले-दाहिने हिस्से में शिफ्ट होना एपेंडिक्स का संकेत है! गैस्ट्रो कि विशेषज्ञ से जानिए क्यों बदलती है एपेंडिक्स के दर्द की जगह।
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Jul 23, 2026
Appendix Pin killer stomach ache Appendectomy Ovarian Cyst
एपेंडिक्स के दर्द की पहचान कैसे करें, जानिए। ( Photo: AI)

Appendicitis : पेट में दर्द होना एक ऐसी समस्या है, जिसे ज्यादातर लोग हल्के में ले लेते हैं। कभी इसे चूर्ण या पाचक खाकर दबाने की कोशिश की जाती है, तो कभी गैस या बदहजमी का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेट दर्द का हर पैटर्न साधारण नहीं होता? गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की मानें तो पेट दर्द का एक खास पैटर्न ऐसा भी है, जो किसी सामान्य गैस का नहीं बल्कि आपके शरीर के अंदर पनप रही एक मेडिकल इमरजेंसी का सीधा इशारा होता है।

यदि आपके पेट में दर्द पहले नाभि (Belly Button) के आसपास हल्का-हल्का शुरू होता है और 12 से 24 घंटे के भीतर धीरे-धीरे खिसककर पेट के नीचे दाहिने हिस्से (Lower Right Abdomen) में जम जाता है, तो इसे भूलकर भी नजरअंदाज न करें। यह क्लासिक लक्षण होता है एपेंडिसाइटिस (Appendicitis) का। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर पेट का यह दर्द अपनी जगह क्यों बदलता है, इसके पीछे का विज्ञान क्या है, और कौन से वे लक्षण हैं जो बताते हैं कि आपको तुरंत अस्पताल भागने की जरूरत है।

आखिर दर्द अपना 'रास्ता' क्यों बदलता है?

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट बताते हैं कि दर्द का यह खिसकना इंसान के नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) के काम करने के अनोखे तरीके पर निर्भर करता है। इस प्रक्रिया को डॉक्टर्स दो चरणों में बांटते हैं:

  • पहला चरण (नाभि के आसपास मीठा-मीठा दर्द): हमारी बड़ी आंत से जुड़ा एक छोटा सा अंग होता है, जिसे एपेंडिक्स कहते हैं। जब इसमें कोई इन्फेक्शन, मल का टुकड़ा या रुकावट आती है, तो इसके अंदर दबाव बढ़ने लगता है और सूजन शुरू होती है। शुरुआत में आंतरिक अंगों की नसें रीढ़ की हड्डी के उसी हिस्से में सिग्नल भेजती हैं जहाँ से नाभि की नसें जुड़ी होती हैं। इसे 'विसरल पेन' (Visceral Pain) कहा जाता है। यही वजह है कि शुरुआती 6 से 12 घंटों में मरीज को दर्द का सटीक ठिकाना समझ नहीं आता और वह नाभि के आसपास ही महसूस होता है।
  • दूसरा चरण (निचले-दाहिने हिस्से में तेज टीस): जैसे-जैसे समय बीतता है (लगभग 12 से 24 घंटे के अंदर), एपेंडिक्स की सूजन काफी बढ़ जाती है। सूजन इतनी बढ़ जाती है कि एपेंडिक्स पेट की अंदरूनी दीवार (पैरिएटल पेरिटोनियम) को छूने लगता है। इस अंदरूनी दीवार में बहुत ही संवेदनशील नसें होती हैं, जो दर्द का सटीक लोकेशन बताने में सक्षम होती हैं। जैसे ही यह संपर्क बनता है, नाभि के आसपास का धुंधला दर्द खत्म होकर सीधे पेट के निचले-दाहिने हिस्से (Right Lower Quadrant) में शिफ्ट हो जाता है और बहुत तेज व चुभने वाला बन जाता है। मेडिकल भाषा में इस खास पॉइंट को मैकबर्नीज पॉइंट (McBurney's Point) कहा जाता है।

एपेंडिक्स के 5 बड़े वॉर्निंग साइंस

केवल दर्द ही नहीं, बल्कि शरीर इसके साथ कुछ और भी गंभीर इशारे देता है। यदि दर्द के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो मामला पक्का एपेंडिसाइटिस का हो सकता है:

क्या इस दर्द की वजह कुछ और भी हो सकती है?

हालांकि नाभि से दाईं ओर दर्द का खिसकना एपेंडिक्स का सबसे बड़ा लक्षण है, लेकिन डॉक्टर्स जांच (जैसे अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन) के जरिए इन अन्य संभावनाओं को भी खारिज करते हैं:

  • किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी): पथरी का दर्द आमतौर पर कमर या पीठ के निचले हिस्से से शुरू होकर आगे पेट और जांघ की तरफ आता है।
  • आंतों का इन्फेक्शन: इसमें पूरे पेट में ऐंठन के साथ-साथ दस्त (Loose Motions) की समस्या मुख्य होती है।
  • महिलाओं में गायनेक समस्याएं: राइट ओवेरियन सिस्ट (Ovarian Cyst) का फटना या पेल्विक इन्फेक्शन (PID) भी इसी हिस्से में तेज दर्द पैदा कर सकता है।

पत्रिका के सवाल-जवाब डॉ. शुभम अग्रवाल के साथ

लोग इस दर्द को सामान्य गैस, बदहजमी या एसिडिटी समझकर टाल देते हैं। कैसे अंतर समझे कि यह नॉर्मल गैस का दर्द है या एपेंडिक्स का?

यह सच है कि शुरुआती अपेंडिसाइटिस (Appendicitis) के लक्षण अक्सर गैस, बदहजमी या एसिडिटी जैसे लगते हैं, जिस कारण लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण संकेत हैं जो इन दोनों स्थितियों के बीच अंतर करने में मदद कर सकते हैं। मुख्य अंतर जैसे:

  • दर्द का स्थान और स्वभाव: सामान्य गैस या बदहजमी में दर्द अक्सर पूरे पेट में महसूस होता है और खाना खाने के बाद बढ़ सकता है। आमतौर पर गैस निकलने, डकार आने या शौच के बाद दर्द में राहत मिलती है। इसके विपरीत, अपेंडिसाइटिस का दर्द एक विशेष क्रम में चलता है। यह शुरुआत में नाभि के आसपास महसूस होता है और कुछ घंटों के भीतर पेट के दाहिने निचले हिस्से (Right Lower Abdomen) में स्थिर हो जाता है।
  • दर्द की तीव्रता: समय के साथ अपेंडिसाइटिस का दर्द कम होने के बजाय बढ़ता जाता है। चलने, खांसने, छींकने या अचानक झटके लगने पर यह दर्द और भी तीव्र हो जाता है।
  • अन्य लक्षण: अपेंडिसाइटिस में दर्द के साथ-साथ भूख न लगना, मतली (जी मिचलाना), उल्टी, हल्का बुखार और शारीरिक कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।

यदि पेट के दाहिने निचले हिस्से को दबाने पर तेज दर्द हो या दबाव हटाते समय दर्द और अधिक बढ़ जाए (Rebound Tenderness), तो यह अपेंडिसाइटिस का एक गंभीर संकेत हो सकता है। हर व्यक्ति में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में ये संकेत कम स्पष्ट या अलग हो सकते हैं। इसलिए, यदि पेट दर्द लगातार बढ़ रहा हो या 4-6 घंटे से अधिक समय तक बना रहे, तो घरेलू उपचार के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

यदि मरीज इस दर्द को नज़रअंदाज करता रहे, तो कितने समय (घंटों) के अंदर एपेंडिक्स फटने (Rupture) का खतरा बन जाता है?

एपेंडिसाइटिस एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। यदि समय पर इसका इलाज न मिले, तो एपेंडिक्स में सूजन बढ़ने के कारण उसमें रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है और अंततः वह फट सकता है। आमतौर पर लक्षण शुरू होने के 24 से 72 घंटे के भीतर एपेंडिक्स फटने (Perforation/Rupture) का खतरा काफी बढ़ जाता है। हालांकि, यह समय हर मरीज में अलग-अलग हो सकता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, मधुमेह (Diabetes) के मरीजों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity) वाले लोगों में यह प्रक्रिया और भी तेज हो सकती है। एपेंडिक्स फटने के बाद उससे निकलने वाला संक्रमित पदार्थ पूरे पेट में फैल जाता है, जिससे पेरिटोनिटिस (Peritonitis - पेट की अंदरूनी झिल्ली का गंभीर संक्रमण) हो सकता है या पेट में मवाद/पस (Abscess) बन सकती है। यह एक जानलेवा स्थिति बन सकती है, जिसके कारण मरीज को ICU में भर्ती करने, लंबे समय तक एंटीबायोटिक देने और अधिक जटिल सर्जरी करने की आवश्यकता पड़ सकती है।इसलिए, समय पर जांच और इलाज अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि पेट दर्द के साथ बुखार, उल्टी और पेट के दाहिने निचले हिस्से में लगातार बढ़ता दर्द महसूस हो, तो इसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

एपेंडिक्स के मामले में पेनकिलर खाना कितना खतरनाक हो सकता है?

एपेंडिक्स के दर्द में बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर (दर्द निवारक) खाना बेहद जानलेवा साबित हो सकता है। पेनकिलर लेने से दर्द कुछ समय के लिए दब जाता है, जिससे मरीज को लगता है कि वह ठीक हो रहा है। लेकिन अंदर एपेंडिक्स में सूजन और इन्फेक्शन लगातार बढ़ता रहता है। दर्द न होने के कारण मरीज अस्पताल पहुंचने में देरी कर देता है।एपेंडिक्स में लक्षण शुरू होने के 24 से 72 घंटे के भीतर एपेंडिक्स फटने (Perforation) का जोखिम बढ़ जाता है। पेनकिलर खाने से यह चेतावनी देने वाला दर्द छिप जाता है और अंदर ही अंदर एपेंडिक्स फट सकता है।

इसके अन्य गंभीर परिणाम:

  • पेरिटोनाइटिस (Peritonitis): एपेंडिक्स फटने से संक्रमित मवाद पूरे पेट में फैल जाता है, जो एक जानलेवा स्थिति है।
  • अंगों को नुकसान: बिना सलाह पेनकिलर लेने से पेट में अल्सर और किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

क्या पेट पर गरम पानी की थैली से सिकाई करना या चूर्ण/काढ़ा पीना इस स्थिति को और बिगाड़ सकता है?

भारत में पेट दर्द होने पर लोग अक्सर गरम पानी की सिकाई, घरेलू चूर्ण, काढ़े या अन्य नुस्खे अपनाने लगते हैं। हालांकि, यदि दर्द का कारण एपेंडिसाइटिस है, तो ये उपाय बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं माने जाते।

  • गरम पानी की सिकाई करने से प्रभावित हिस्से में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे एपेंडिक्स में सूजन और संक्रमण और तेज़ी से फैल सकता है। यद्यपि इस पर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, फिर भी डॉक्टरी सलाह यही कहती है कि ऐसी स्थिति में गरम सिकाई से बचना ही उचित है।
  • दर्द में चूर्ण, काढ़ा, जुलाब (Laxative) लेने या बार-बार भोजन करने से भी स्थिति बिगड़ सकती है। ध्यान रखें कि यदि आगे चलकर आपातकालीन ऑपरेशन (सर्जरी) की आवश्यकता पड़ती है, तो मरीज का खाली पेट रहना बेहद जरूरी होता है।

आज के समय में लैप्रोस्कोपिक (दूरबीन) सर्जरी से रिकवरी कितनी आसान और तेज हो गई है?

आधुनिक चिकित्सा में लैप्रोस्कोपिक एपेंडेक्टॉमी (Laparoscopic Appendectomy) ने मरीजों की रिकवरी प्रक्रिया को काफी आसान और सुरक्षित बना दिया है। इस तकनीक में पेट पर बड़ा चीरा लगाने के बजाय केवल 3 से 4 छोटे चीरे लगाए जाते हैं और कैमरे (लैप्रोस्कोप) की सहायता से एपेंडिक्स को बाहर निकाल दिया जाता है।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के मुख्य लाभ

  • कम दर्द: पारंपरिक (ओपन) सर्जरी की तुलना में ऑपरेशन के बाद दर्द बहुत कम होता है।
  • कम रक्तस्राव: सर्जरी के दौरान खून का बहना न के बराबर होता है।
  • संक्रमण का कम जोखिम: छोटे चीरों के कारण घाव में इंफेक्शन का खतरा काफी कम रहता है।
  • अस्पताल से जल्दी छुट्टी: मरीज को अस्पताल में बहुत कम समय बिताना पड़ता है।
  • तेज रिकवरी: मरीज सर्जरी के बाद जल्दी उठकर चल-फिर सकता है।
  • काम पर जल्द वापसी: व्यक्ति अपने सामान्य कामकाज और नौकरी पर तेजी से लौट सकता है।
  • छोटे निशान (कॉस्मेटिक लाभ): पेट पर सर्जरी के बड़े दाग के बजाय केवल छोटे-छोटे निशान ही रह जाते हैं।

रिकवरी में कितना समय लगता है?

यदि समय रहते एपेंडिक्स का ऑपरेशन हो जाए और वह फटा न हो, तो अधिकांश मरीज 24 से 48 घंटे में अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाते हैं और लगभग 1 से 2 सप्ताह में पूरी तरह सामान्य जीवन में लौट आते हैं। यदि एपेंडिक्स पहले ही फट चुका हो या पेट में संक्रमण अधिक फैल गया हो, तो मरीज को ठीक होने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।

Updated on:
23 Jul 2026 10:43 am
Published on:
23 Jul 2026 10:43 am