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Night Routine : मजबूत दिल और लंबी उम्र का सीक्रेट, कार्डियोलॉजिस्ट से समझें रात का ‘नॉन-नेगोशिएबल’ रूटीन

Night Routine: क्या रात में आपका ब्लड प्रेशर नेचुरल तरीके से ड्रॉप होता है? सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट से समझें 'नोक्टर्नल डिपिंग' और दिल को सालों-साल जवान रखने वाला नाइट रूटीन।
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Jul 08, 2026
Healthy Heart Cardiovascular Health Longevity Habits
लंबी उम्र और स्वस्थ दिल का सीक्रेट!( Photo :AI)

Night Routine affects Heart health : आज के समय में 'हेल्दी लाइफ' और 'लंबी उम्र' (Longevity) पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण कार्डियोवैस्कुलर डिजीज यानी दिल की ​बीमारियां (Cardiovascular Disease) हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अब 30 से 40 साल के युवा भी साइलेंट हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो रहे हैं।

अक्सर हम दिल को स्वस्थ रखने के लिए सुबह की वॉक (Morning Walk), जिम और डाइट पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन शाम और रात के रूटीन को नजरअंदाज कर देते हैं। कार्डियोलॉजिस्ट का मानना है कि आपके दिल की असली रिकवरी और मरम्मत रात के समय होती है। आप ऐसी 'नॉन-नेगोशिएबल' (यानी जिनसे किसी भी कीमत पर समझौता न किया जा सके) शाम की आदतों को अपनाएं, जो न सिर्फ आपकी नींद की क्वालिटी को बेहतरीन बनाती हैं, बल्कि आपके दिल की उम्र को भी कई साल बढ़ा देती हैं।

कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम कैसे काम करता है?

डॉ. आरिफ खान के साथ पत्रिका की खास बातचीत

अक्सर कहा जाता है कि सोने से 3 घंटे पहले डिनर कर लेना चाहिए। देर रात भारी खाना खाने से हमारे दिल की धड़कन (Heart Rate) और ब्लड प्रेशर पर रात में क्या असर पड़ता है?

लेट नाइट डिनर (Dinner) से हमारे पाचन तंत्र (Digestive System) में ब्लड फ्लो (Blood Flow) बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और वह जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाता है। पाचन तंत्र में ब्लड फ्लो को बनाए रखने के लिए हमारे हार्ट की आर्टरीज (दिल की धमनियों) को बहुत ज्यादा काम करना पड़ता है। दूसरी बात यह है कि जब पेट की मांसपेशियों और पेट के आसपास भोजन को पचाने की गतिविधि बढ़ती है, तो उससे 'ट्रांसिएंट हार्ट रेट' (अस्थायी रूप से दिल की धड़कन) भी बढ़ जाती है। आमतौर पर हमारे स्लीप साइकिल (नींद के चक्र) में एक ऐसा समय आता है जब रात में हमारा ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट सामान्य से थोड़ा नीचे गिरते हैं (ड्रॉप होते हैं), जिससे दिल को आराम मिलता है। लेकिन जब हम देर रात खाना खाते हैं, तो ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को जितना नॉर्मल ड्रॉप होना चाहिए, वह नहीं हो पाता और दिल की एक्टिविटी बढ़ी रहती है। देर रात का भोजन हमारे नर्वस सिस्टम को भी एक्टिवेट कर देता है, जिससे हमारी स्लीप साइकिल डिस्टर्ब होती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट रेट भी बढ़ जाती है।

देर रात खाना खाने से एक बड़ी समस्या यह भी होती है कि हमारे शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ जाता है। सामान्य तौर पर अगर हम रात का खाना जल्दी खा लेते हैं, तो सोते समय तक शरीर में इंसुलिन का स्तर (Level) कम हो जाता है, जो कि नॉर्मल है। लेकिन लेट नाइट डिनर करने से इंसुलिन का लेवल कम नहीं हो पाता, जिससे इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity) पर बहुत बुरा असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में शरीर की मेटाबॉलिक डिमांड (Metabolic Demand) बढ़ जाती है। मेटाबॉलिक डिमांड बढ़ने के कारण पल्पिटेशन (दिल की धड़कन तेज होना या घबराहट होना) की समस्या होने लगती है और ब्लड प्रेशर भी अचानक बढ़ (Transient Rise) जाता है।

अगर कोई व्यक्ति रोजाना अलग-अलग समय पर सोता है (जैसे कभी रात 10 बजे तो कभी 2 बजे), तो इससे दिल की धमनियों (Arteries) पर क्या दीर्घकालिक (Long-term) असर पड़ता है?

सोने का समय तय नहीं होना या अनियमित तरीके से सोने का रूटीन हमारी सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। अनियमित नींद के कारण शरीर में इन्फ्लेमेशन (अंदरूनी सूजन) बढ़ती है, जिससे दिल की धमनियों में 'प्लाक फॉर्मेशन' (Artery Plaque) यानी कचरा जमा होने लगता है। यही प्लाक आगे चलकर ब्लॉकेज पैदा करता है और हार्ट अटैक की वजह बनता है। इसके अलावा, सोने का समय तय न होने से हमारा प्लेटलेट एक्टिवेशन सिस्टम पूरी तरह डिस्टर्ब हो जाता है, जिससे खून के थक्के (Blood Clots) जमने का खतरा बढ़ जाता है। जब हम समय पर और पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो शरीर की मेटाबॉलिक एक्टिविटी अनियंत्रित रूप से बढ़ जाती है। इसका सीधा असर हमारे ब्लड प्रेशर और पल्स रेट पर पड़ता है, जो लंबे समय तक हाई रहने लगते हैं। लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर दिल की धमनियों में स्टिफनेस (सख्ती) पैदा कर देता है। धमनियों के सख्त होने से क्रोनिक हाइपरटेंशन, ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती हैं। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स हमेशा एक निश्चित समय पर सोने और पर्याप्त नींद लेने की सलाह देते हैं, ताकि हमारे नर्वस सिस्टम को आराम मिल सके और शरीर का ब्रेकडाउन होने से बच जाए।

गहरी नींद (Deep Sleep) के दौरान हमारा दिल खुद को कैसे रिपेयर करता है? क्या अधूरी नींद सीधे तौर पर हार्ट अटैक का कारण बन सकती है?

गहरी नींद (Deep Sleep) सीधे तौर पर तो हार्ट अटैक को प्रभावित नहीं करती है, लेकिन अप्रत्यक्ष (Indirect) रूप से इसका दिल की सेहत से बहुत गहरा संबंध है

  • हार्ट रेट को सामान्य रखना : एक अच्छी और गहरी नींद हमारे हार्ट रेट को ड्रॉप (कम) रखती है। दिनभर की भागदौड़ के कारण जो धड़कन तेज रहती है, डीप स्लीप उसे सामान्य स्तर (Normal Heart Rate) पर लाती है। इससे दिल की एक्टिविटी थोड़ी धीमी हो जाती है और उसे रिकवरी व आराम करने का पूरा समय मिल जाता है।
  • ब्लड प्रेशर को कम रखना : गहरी नींद हमारे ब्लड प्रेशर को भी कम रखने में मदद करती है। सोते समय जब ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट नियंत्रित रहते हैं, तो दिल की वेसल्स (धमनियों) और पूरे हार्ट को आराम मिलता है।
  • इन्फ्लेमेशन और थक्के (Clots) का कम होना : जब दिल और उसकी वेसल्स को पूरा आराम मिलता है, तो शरीर में इन्फ्लेमेशन (अंदरूनी सूजन) कम होती है। यही इन्फ्लेमेशन धमनियों में खून का थक्का (Clot) जमने की मुख्य वजह होती है। इसलिए, अच्छी नींद मिलने से थक्का जमने की संभावना और ऐसी घटनाएं काफी कम हो जाती हैं।
  • नर्वस सिस्टम को आराम देना : दिनभर काम करने की वजह से हमारा नर्वस सिस्टम लगातार एक्टिव रहता है। अगर 24 घंटे हमारी शारीरिक मशीनरी बिना आराम के काम करती रहेगी, तो शरीर का ब्रेकडाउन होना तय है और कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। डीप स्लीप इस नर्वस सिस्टम को शांत करती है और इसे 'ओवर-ड्राइव' होने से बचाती है।

सोने से ठीक पहले मोबाइल या टीवी स्क्रीन देखने से जो स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं, वे हमारे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को रात भर किस तरह प्रभावित करते हैं?

मोबाइल और लैपटॉप जैसी स्क्रीन्स से निकलने वाली 'ब्लू लाइट' (Blue Light) हमारे शरीर में 'मेलाटोनिन' (Melatonin) हार्मोन के उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित करती है। मेलाटोनिन वही हार्मोन है जो हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से बनता है और हमें गहरी नींद लाने में मदद करता है। स्क्रीन टाइम बढ़ने से यह हार्मोन कम बनता है, जिससे नींद उड़ जाती है।

जब नींद की कमी होती है या स्लीप साइकिल डिस्टर्ब होती है, तो शरीर पर इसका गंभीर असर पड़ता है। सही ढंग से न सो पाने के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, पल्पिटेशन (दिल की धड़कन तेज होना या घबराहट) की समस्या होती है और अंततः हार्ट अटैक का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। इस स्थिति से बचने का एकमात्र उपाय यह है कि सोने के समय मोबाइल, टीवी और अन्य गैजेट्स को पूरी तरह से ऑफ (बंद) कर दें। रात को इनका इस्तेमाल कम से कम होना चाहिए। हम जब सोते समय भी स्क्रीन देखते हैं, तो हमारा नर्वस सिस्टम उस लाइट को ग्रहण करता रहता है और दिमाग लगातार एक्टिव मोड में रहता है, जिससे नींद आना असंभव हो जाता है। यही वजह है कि दिल को सुरक्षित रखने के लिए रात को सोने से पहले स्क्रीन टाइम को कम करना बेहद जरूरी है।

कई लोग कहते हैं कि वे रात को चाय या कॉफी पीकर भी आराम से सो जाते हैं। क्या कैफीन नींद में खलल डाले बिना भी दिल पर दबाव बना सकता है?

कैफीन (चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स) हमारे शरीर को अंदरूनी रूप से गंभीर रूप से प्रभावित करती है। जब इसकी वजह से हमारी स्लीप साइकिल (नींद का चक्र) बाधित होती है, तो शरीर का नर्वस सिस्टम उत्तेजित (एक्टिवेट) हो जाता है, जिससे हार्ट बीट (दिल की धड़कन) बढ़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप, कई लोगों को पल्पिटेशन यानी दिल की धड़कन तेज होने या अचानक घबराहट महसूस होने की समस्या हो सकती है। इसके साथ ही, नींद पूरी न होने (Sleep Deprivation) के कारण शरीर में कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर भी बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ मानसिक तनाव और अधूरी नींद अप्रत्यक्ष रूप से (Indirectly) दिल को भारी नुकसान पहुंचाती है, जिससे आगे चलकर कोरोनरी आर्टरी डिसीज (धमनियों की बीमारी) और हार्ट अटैक का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है।

आजकल 30 से 40 साल के युवाओं में साइलेंट हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले बहुत बढ़ गए हैं। क्लिनिक में आपके पास आने वाले युवाओं में सबसे आम शुरुआती लक्षण (Warning Signs) क्या होते हैं?

आजकल 30 से 40 वर्ष के युवाओं में साइलेंट हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जब भी ऐसे युवा मरीज हमारे पास आते हैं, तो अमूमन वे सीने में दर्द या सीने में जलन जैसी शिकायतें लेकर आते हैं। युवाओं में अक्सर रात को देर तक काम करने और उसके बाद स्नैक्स खाकर तुरंत सो जाने की आदत देखी जाती है, जो आगे चलकर दिल की गंभीर बीमारियों की वजह बनती है। घबराहट और बेचैनी जैसे सामान्य लक्षणों के अलावा, ऐसी स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात मरीज की फैमिली हिस्ट्री (पारिवारिक इतिहास) को जानना होता है। यदि परिवार में पहले भी किसी को कम उम्र में हार्ट अटैक आया हो या किसी की असमय मृत्यु हुई हो, तो जोखिम बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में हमारी पहली प्राथमिकता 'बेसिक कार्डियक चेकअप' कराने की होती है, जिसमें टीएमटी (TMT) टेस्ट शामिल है। ध्यान रहे, टीएमटी टेस्ट हमेशा किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की मौजूदगी और देखरेख में ही होना चाहिए, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति होने पर मरीज को तुरंत संभाला जा सके।

रात के समय या सुबह के वक्त अगर किसी को अचानक छाती में भारीपन या बेचैनी महसूस हो, तो अस्पताल पहुंचने से पहले 'गोल्डन ऑवर' में उसे और उसके परिवार को तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए?

Updated on:
08 Jul 2026 11:04 am
Published on:
08 Jul 2026 11:04 am