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अब फूलों से खिलेगी किस्मत… शिवरीनारायण बन रहा पुष्प हब, किसानों की पसंद बनी गेंदा खेती

Flower Hub in CG: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में फूलों की खेती तेजी से बढ़ रही है, जहां गेंदा उत्पादन 30 से बढ़ाकर 200 हेक्टेयर तक ले जाने की तैयारी है और शिवरीनारायण को पुष्प हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

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अब फूलों से खिलेगी किस्मत... शिवरीनारायण बन रहा पुष्प हब, किसानों की पसंद बनी गेंदा खेती(photo-patrika)

Flower Hub in CG: छत्तीसगढ़ का जांजगीर-चांपा जिला अब सिर्फ धान उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है। यहां खेती का नया ट्रेंड तेजी से उभर रहा है- फूलों की खेती। खासकर गेंदे के फूल ने किसानों की किस्मत बदलनी शुरू कर दी है। पिछले साल जहां महज 30 हेक्टेयर में इसकी खेती हुई थी, वहीं इस बार इसे बढ़ाकर करीब 200 हेक्टेयर तक ले जाने की तैयारी है। उद्यानिकी विभाग इस पहल के जरिए शिवरीनारायण क्षेत्र को “पुष्प हब” के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है।

Flower Hub in CG: पुष्प हब की ओर बढ़ते कदम

शिवरीनारायण और उसके आसपास के गांव- खोरसी, तनौद समेत छह गांवों को इस योजना में शामिल किया गया है। इस क्षेत्र का चयन खास रणनीति के तहत किया गया है, क्योंकि शिवरीनारायण मंदिर न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश का प्रमुख आस्था केंद्र है। यहां सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, जिससे फूलों की स्थायी मांग बनी रहती है। यही वजह है कि यहां फूलों की खेती को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर ही मांग और आपूर्ति का संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।

धान से दोगुनी आय का आकर्षण

पारंपरिक धान की खेती की तुलना में फूलों की खेती किसानों को अधिक मुनाफा दे रही है। यही कारण है कि अब किसान धीरे-धीरे इस ओर आकर्षित हो रहे हैं। कम समय में ज्यादा उत्पादन और बेहतर बाजार मूल्य ने गेंदे की खेती को फायदे का सौदा बना दिया है।

महिला किसानों की सफलता की कहानी

पामगढ़ ब्लॉक के लोहर्सी गांव की किसान दिनेश्वरी पटेल ने 1 एकड़ 24 डिसमिल जमीन में गेंदे की खेती की। इसमें करीब 40 हजार रुपये की लागत आई, जबकि एक सीजन में उन्हें 2.40 लाख रुपये की आय हुई। यह आमदनी पारंपरिक धान की खेती से कई गुना ज्यादा है। दिनेश्वरी की यह सफलता अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

युवाओं और किसानों का बढ़ता रुझान

खोरसी गांव के किसान छोटेलखन ने भी धान की कम आमदनी से परेशान होकर फूलों की खेती की ओर रुख किया। उन्होंने सवा एकड़ में गेंदा लगाया, जिससे करीब 80 क्विंटल उत्पादन हुआ। बाजार में 30 से 40 रुपये प्रति किलो के भाव से उन्हें करीब ढाई लाख रुपये की आय हुई। इस तरह के उदाहरणों ने क्षेत्र में फूलों की खेती को तेजी से लोकप्रिय बना दिया है।

सरकार और विभाग का सहयोग

उद्यानिकी विभाग किसानों को इस नई खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। विभाग की ओर से अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन और बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इस खेती को अपनाएं। सहायक संचालक उद्यान रंजना माखीजा के अनुसार, “इस साल 200 हेक्टेयर में गेंदा की खेती का लक्ष्य रखा गया है, जिससे शिवरीनारायण क्षेत्र को पुष्प हब के रूप में विकसित किया जा सके।”

स्थानीय बाजार और मांग का फायदा

शिवरीनारायण जैसे धार्मिक स्थल पर पूजा-पाठ और आयोजनों के लिए फूलों की लगातार मांग रहती है। पहले इन फूलों की आपूर्ति बाहर से होती थी, लेकिन अब स्थानीय उत्पादन बढ़ने से किसानों को सीधे बाजार मिल रहा है और परिवहन लागत भी कम हो रही है।

आर्थिक बदलाव की नई राह

फूलों की खेती न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं—जैसे फूलों की पैकिंग, ट्रांसपोर्ट और मार्केटिंग।

Published on:
04 May 2026 11:33 am
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