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डिप्रेशन को मात देकर भारवि वैष्णव बनीं युवाओं के लिए उम्मीद की मिसाल, पत्रिका से बोलीं- आत्मविश्वास ही ताकत

Raipur News: आज के समय में युवाओं में डिप्रेशन और मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में कई युवा अपनी समस्याएं किसी से साझा नहीं कर पाते और अकेले ही इस संघर्ष से जूझते रहते हैं।

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Mar 16, 2026
डिप्रेशन से जूझीं भारवि वैष्णव, अब छात्रों को दे रहीं सहारा (फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG News: आज के समय में युवाओं में डिप्रेशन और मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में कई युवा अपनी समस्याएं किसी से साझा नहीं कर पाते और अकेले ही इस संघर्ष से जूझते रहते हैं। इसी बीच रायपुर के सी.जी. कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्रशासनिक अधिकारी भारवि वैष्णव ऐसे युवाओं के लिए सहारा बन रही हैं। खास बात यह है कि वे खुद भी कभी डिप्रेशन के दौर से गुजर चुकी हैं और अब अपने अनुभव के आधार पर छात्रों को इससे बाहर निकालने में मदद कर रही हैं।

पत्रिका से बातचीत में भारवि वैष्णव ने बताया कि आज के युवा छोटी-छोटी बातों को दिल पर ले लेते हैं और उन्हें छोड़ नहीं पाते। यही बातें धीरे-धीरे मानसिक बोझ बनकर डिप्रेशन का कारण बन जाती हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे अगर हम लंबे समय तक हाथ में फोन पकड़े रखें तो दर्द होने लगता है, वैसे ही नकारात्मक बातों को लंबे समय तक मन में रखने से मानसिक दबाव बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि नकारात्मक बातों को छोड़कर आगे बढ़ना सीखा जाए।

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भारवि वैष्णव कहती हैं कि जीवन में कई चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने हमेशा खुद पर विश्वास रखा। उनका मानना है कि आत्मविश्वास ही इंसान को हर मुश्किल से बाहर निकाल सकता है।

कॉलेज के कई छात्र-छात्राएं अपनी समस्याएं उनसे साझा करते हैं

भारवि बताती हैं कि कॉलेज के कई छात्र-छात्राएं अपनी समस्याएं उनसे साझा करते हैं। बातचीत और मार्गदर्शन के माध्यम से वे उन्हें मानसिक तनाव से बाहर आने में मदद करती हैं। उनका कहना है कि संवाद और विश्वास ही इस समस्या से निकलने का पहला कदम है।

सवाल: क्या आप भी कभी डिप्रेशन से गुजरी हैं?

जवाब: हां, शादी के बाद एक समय ऐसा आया जब मैं डिप्रेशन में चली गई थी। उस दौर से बाहर आने में करीब एक साल लगा। इस दौरान मेरी मां और परिवार ने मेरा साथ दिया, जिससे मैं धीरे-धीरे संभल पाई।

सवाल: युवाओं को डिप्रेशन से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब: किसी भी समस्या को मन में दबाकर नहीं रखना चाहिए। परिवार, दोस्तों या भरोसेमंद व्यक्ति से अपनी बात जरूर साझा करनी चाहिए। सकारात्मक सोच और खुलकर बातचीत डिप्रेशन से बाहर निकलने में काफी मदद करती है।

सवाल: जिन युवाओं के पास बात करने वाला कोई नहीं होता, वे क्या करें?

जवाब: ऐसे में माता-पिता को ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि बच्चे खुलकर अपनी बात कह सकें। आत्मविश्वास बनाए रखना भी बहुत जरूरी है।

केस स्टडी 1: लोन का बोझ बना मानसिक तनाव की वजह

कॉलेज की एक छात्रा ने बताया कि उसने पढ़ाई के लिए लोन लिया था। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उसे यह कदम उठाना पड़ा, लेकिन बाद में यही बात उसके लिए मानसिक तनाव का कारण बन गई। उसे लगातार इस बात की चिंता रहती थी कि वह लोन कैसे चुकाएगी। बाद में जब उसने अपनी समस्या भारवि वैष्णव से साझा की तो बातचीत और मार्गदर्शन से उसे काफी हिम्मत मिली और धीरे-धीरे वह इस तनाव से बाहर आ सकी।

केस स्टडी 2: अकेलेपन से बढ़ा मानसिक दबाव

भिलाई की एक छात्रा पढ़ाई के लिए घर से दूर रहती थीं। दोस्तों से दूरी और परिवार से कम बातचीत के कारण वे खुद को अकेला महसूस करने लगीं। धीरे-धीरे उन्हें लगातार उदासी और चिंता ने डिप्रेशन में डाल दिया था। बाद में कॉलेज के काउंसलिंग और बातचीत के माध्यम से उन्होंने इस स्थिति से बाहर निकलना शुरू किया।

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Updated on:
16 Mar 2026 05:44 pm
Published on:
16 Mar 2026 05:43 pm
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