Pancreatic Cancer: पुरुषों में महिलाओं की तुलना में आग्नाशय कैंसर का जोखिम क्यों क्यों बढ़ रहा है? इस कैंसर का आमतौर पर शुरूआती दौर में पता नहीं चल पाता है, क्योंकि इसके लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे दिखते हैं। इसके शुरूआती लक्षण कैसे होते हैं? इसके जोखिमों को कम करने के लिए क्या-क्या करना चाहिए? इस बारे में सबकुछ आसान भाषा में और विस्तार से जयपुर के एसएमएस अस्पताल के एक्सपर्ट डॉ. सुधीर महर्षि से जानिए।
Pancreatic Cancer : अग्नाशय (Pancreas) हमारे शरीर का एक छोटा सा हिस्सा है, लेकिन इसका काम बहुत बड़ा है। आजकल पुरुषों में अग्नाशय के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसे 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है। आखिर क्यों पुरुषों को ही यह बीमारी ज्यादा निशाना बना रही है और वे कौन से शुरुआती संकेत हैं, जिन्हें पहचानकर जान बचाई जा सकती है?
वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, पुरुषों में अग्नाशय के कैंसर की दर महिलाओं से लगभग 30% से 50% अधिक होती है। इसके पीछे कई जैविक और जीवनशैली संबंधी कारक जिम्मेदार हैं। आइए समझते हैं कि ऐसा क्यों है।
अग्नाशय (Pancreas) पेट के पीछे स्थित एक ग्रंथि है। इसकी कोशिकाएं जब अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं, तब यह ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यह दो तरह का होता है:
अग्नाशय कैंसर के लक्षण शुरुआती चरणों में बहुत सूक्ष्म होते हैं, जिसके कारण इसका पता अक्सर देरी से (Advanced Stage) चलता है।
उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर किस स्टेज पर है:
पुरुषों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपनी जीवनशैली में सुधार करें ताकि जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।
आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों में यह बीमारी महिलाओं से अधिक है, इसका मुख्य जैविक (Biological) कारण क्या है?
पत्रिका से बात करते उन्होंने बताया, पुरुषों में अग्नाशय (Pancreas) कैंसर के अधिक होने के पीछे जैविक (Biological) और हार्मोनल कारण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्या आधुनिक जीवनशैली और 'प्रोसेस्ड फूड' का इस कैंसर से कोई सीधा संबंध है?
उन्होनें बताया, आधुनिक जीवनशैली और प्रोसेस्ड फूड का अग्नाशय के कैंसर से बहुत गहरा और सीधा संबंध है।
पेट दर्द या पाचन की समस्या को अक्सर लोग सामान्य मानते हैं। वे कौन से संकेत हैं जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
उन्होनें बताया, पेट के दर्द या पाचन की गड़बड़ी को हर बार सामान्य समझना भारी पड़ सकता है। अग्नाशय के कैंसर के मामले में ये संकेत बेहद गंभीर होते हैं।
अचानक से शुगर (Diabetes) बढ़ जाना अग्नाशय के कैंसर का संकेत कैसे हो सकता है?
उन्होनें बताया, अग्नाशय (Pancreas) का मुख्य काम इंसुलिन बनाना है, जो शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है। जब अग्नाशय में कैंसर की कोशिकाएं पनपने लगती हैं, तो वे इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं या शरीर की इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया को बदल देती हैं। इसे 'न्यू-ऑनसेट डायबिटीज' कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति को अचानक 50 साल की उम्र के बाद शुगर होती है, जबकि उसके परिवार में किसी को डायबिटीज नहीं है, तो यह ट्यूमर का शुरुआती संकेत हो सकता है। वास्तव में, कैंसर अग्नाशय की कार्यक्षमता को बाधित कर देता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक अनियंत्रित हो जाती है। इसे नजरअंदाज करना बीमारी को गंभीर बना सकता है।
जो लोग लंबे समय से धूम्रपान या शराब का सेवन कर रहे हैं, क्या उनमें Pancreatic Cancer किस तरह से होता है ?
उन्होनें बताया, धूम्रपान और शराब का लंबे समय तक सेवन अग्नाशय को दोहरी मार देता है। सिगरेट के धुएं में मौजूद हानिकारक रसायन रक्त के जरिए अग्नाशय तक पहुंचकर कोशिकाओं के DNA को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर देते हैं। यह क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के अनियंत्रित विकास को जन्म देता है, जो ट्यूमर का रूप ले लेता है। वहीं, अत्यधिक शराब अग्नाशय में जहरीले तत्व पैदा करती है, जिससे वहां 'क्रोनिक पैन्क्रियाटाइटिस' (Chronic Pancreatitis) हो जाती है। यह निरंतर रहने वाली सूजन स्वस्थ ऊतकों को नष्ट कर उन्हें कैंसर कोशिकाओं में तब्दील कर देती है। जब कोई व्यक्ति इन दोनों के साथ सेवन करता है, तो अग्नाशय की मरम्मत करने की क्षमता खत्म हो जाती है और कैंसर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
क्या 40-50 की उम्र के बाद पुरुषों को नियमित स्क्रीनिंग करवानी चाहिए?
उन्होनें बताया, अग्नाशय कैंसर के लिए कोई सामान्य 'ब्लड टेस्ट' उपलब्ध नहीं है जिसे रूटीन चेकअप माना जाए। लेकिन, यदि किसी पुरुष का पारिवारिक इतिहास (Family History) रहा है या वे लंबे समय से धूम्रपान कर रहे हैं, तो उन्हें सतर्क रहना चाहिए। 40-50 की उम्र के बाद, यदि पाचन में लगातार दिक्कत हो या पेट के ऊपरी हिस्से में खिंचाव महसूस हो, तो अल्ट्रासाउंड या एमआरआई (MRI) की सलाह दी जाती है। इस उम्र के बाद पुरुषों को अपने लिवर और अग्नाशय की स्थिति जानने के लिए साल में एक बार विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लेना चाहिए।
क्या भारत में इस कैंसर का इलाज अब शुरुआती स्टेज पर पूरी तरह संभव है?
उन्होनें बताया, भारत में अब पैन्क्रियाटिक कैंसर का शुरुआती स्टेज पर इलाज पूरी तरह संभव है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं जैसे बड़े केंद्रों में उपलब्ध विशेषज्ञता के कारण, यदि कैंसर केवल अग्नाशय तक सीमित है, तो सर्जरी (जैसे व्हिपल प्रोसीजर) के जरिए इसे सफलतापूर्वक निकाला जा सकता है। भारत में अब रोबोटिक सर्जरी, उन्नत रेडिएशन और प्रभावी कीमोथेरेपी उपलब्ध है, जो इलाज को बेहतर बनाती हैं। इसकी शुरुआत में पहचान होने पर मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि, चुनौती यह है कि अधिकांश मामले देरी से पकड़ में आते हैं। इसलिए, यदि कैंसर 'स्टेज 1' या 'स्टेज 2' में डायग्नोज हो जाए, तो आधुनिक उपचार के मेल से मरीज एक सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है।
अग्नाशय को स्वस्थ रखने के लिए 'सुपरफूड्स' या डाइट में किन बदलावों की आप सलाह देंगे?
याद रखें, पर्याप्त पानी पीना और चीनी का कम सेवन करना अग्नाशय के लिए सबसे बड़ा 'सुपरफूड' है।