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Pancreatic Cancer: क्यों पुरुषों के अग्नाशय पर ज्यादा हमला कर रहा है कैंसर? डॉक्टर से जानिए

Pancreatic Cancer: पुरुषों में महिलाओं की तुलना में आग्नाशय कैंसर का जोखिम क्यों क्यों बढ़ रहा है? इस कैंसर का आमतौर पर शुरूआती दौर में पता नहीं चल पाता है, क्योंकि इसके लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे दिखते हैं। इसके शुरूआती लक्षण कैसे होते हैं? इसके जोखिमों को कम करने के लिए क्या-क्या करना चाहिए? इस बारे में सबकुछ आसान भाषा में और विस्तार से जयपुर के एसएमएस अस्पताल के एक्सपर्ट डॉ. सुधीर महर्षि से जानिए।

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May 12, 2026
पेट का सामान्य दर्द कहीं कैंसर तो नहीं?

Pancreatic Cancer : अग्नाशय (Pancreas) हमारे शरीर का एक छोटा सा हिस्सा है, लेकिन इसका काम बहुत बड़ा है। आजकल पुरुषों में अग्नाशय के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसे 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है। आखिर क्यों पुरुषों को ही यह बीमारी ज्यादा निशाना बना रही है और वे कौन से शुरुआती संकेत हैं, जिन्हें पहचानकर जान बचाई जा सकती है?

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पुरुषों में अधिक जोखिम क्यों?

वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, पुरुषों में अग्नाशय के कैंसर की दर महिलाओं से लगभग 30% से 50% अधिक होती है। इसके पीछे कई जैविक और जीवनशैली संबंधी कारक जिम्मेदार हैं। आइए समझते हैं कि ऐसा क्यों है।

  • धूम्रपान की उच्च दर: सिगरेट और तंबाकू का सेवन महिलाओं के मुकाबले पुरुष अधिक करते हैं। तंबाकू में मौजूद कार्सिनोजेन्स (Carcinogens) सीधे तौर पर अग्नाशय की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • व्यावसायिक जोखिम: पुरुष कई ऐसे जोखिम वाले नौकरियों में होते हैं, जहां उन्हें रसायनों, कीटनाशकों और धातु के धुएं के संपर्क में आना पड़ता है।
  • खान-पान की आदतें: उच्च वसा युक्त आहार (High-Fat Diet) और अधिक रेड मीट का सेवन पुरुषों में अधिक देखा जाता है, जो कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।
  • शराब का सेवन: अत्यधिक शराब अग्नाशय में सूजन (Pancreatitis) पैदा करती है, जो बाद में कैंसर का रूप ले सकती है।

Understanding the Disease: अग्नाशय कैंसर को समझना

अग्नाशय (Pancreas) पेट के पीछे स्थित एक ग्रंथि है। इसकी कोशिकाएं जब अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं, तब यह ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यह दो तरह का होता है:

  • एक्सोक्राइन ट्यूमर (Exocrine Tumors): यह सबसे आम है (लगभग 95%) जो पाचन एंजाइम बनाने वाली कोशिकाओं में होता है।
  • न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर (NETs) : यह दुर्लभ होता है और हार्मोन बनाने वाली कोशिकाओं को प्रभावित करता है।

निदान और परीक्षण (Diagnosis)

  • इमेजिंग टेस्ट:CT स्कैन, MRI और PET स्कैन के जरिए ट्यूमर की स्थिति का पता लगाया जाता है।
  • एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS): एक पतली ट्यूब के जरिए अग्नाशय की जांच की जाती है।
  • बायोप्सी: ट्यूमर के एक छोटे ऊतक (Tissue) का नमूना लेकर उसकी जांच करना।
  • रक्त परीक्षण: CA 19-9 जैसे ट्यूमर मार्कर्स की जांच।

शुरुआती लक्षण: जिन्हें नजरअंदाज न करें

अग्नाशय कैंसर के लक्षण शुरुआती चरणों में बहुत सूक्ष्म होते हैं, जिसके कारण इसका पता अक्सर देरी से (Advanced Stage) चलता है।

  • पीलिया (Jaundice): आंखों और त्वचा का पीला होना। यह तब होता है जब ट्यूमर पित्त नली (Bile Duct) को ब्लॉक कर देता है।
  • पेट और पीठ में दर्द: पेट के ऊपरी हिस्से में शुरू होने वाला दर्द जो अक्सर पीठ की ओर फैलता है।
  • अचानक वजन कम होना: बिना किसी प्रयास के वजन में गिरावट आना और भूख कम लगना।
  • डायबिटीज की शुरुआत: यदि किसी वयस्क पुरुष को अचानक बिना पारिवारिक इतिहास के मधुमेह (Diabetes) हो जाए, तो यह अग्नाशय की समस्या का संकेत हो सकता है।
  • पाचन संबंधी समस्याएं: गहरे रंग का पेशाब, चिकना या हल्के रंग का मल (Stool), और जी मिचलाना।

Treatment Option : उपचार के विकल्प

उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर किस स्टेज पर है:

  • सर्जरी (Whipple Procedure): यदि कैंसर केवल अग्नाशय के सिर (Head) तक सीमित है, तो सर्जरी के जरिए ट्यूमर को निकाला जाता है।
  • कीमोथेरेपी: दवाओं के माध्यम से कैंसर कोशिकाओं को मारना।
  • रेडिएशन थेरेपी: उच्च ऊर्जा वाली किरणों से ट्यूमर को सिकोड़ना।
  • इम्यूनोथेरेपी: शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से लड़ने के लिए मजबूत बनाना।

बचाव के उपाय: जीवनशैली में बदलाव

पुरुषों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपनी जीवनशैली में सुधार करें ताकि जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।

  • धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान बंद करने के 10 साल बाद जोखिम काफी कम हो जाता है।
  • वजन नियंत्रित रखें: मोटापा अग्नाशय के कैंसर का एक बड़ा कारण है। नियमित व्यायाम और संतुलित वजन बनाए रखें।
  • पौष्टिक आहार: अपने भोजन में हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज शामिल करें। रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड से बचें।
  • शराब का सीमित सेवन: शराब का सेवन कम करने से अग्नाशय की सूजन से बचा जा सकता है।

डॉ. सुधीर महर्षि के साथ पत्रिका के सवाल जवाब

आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों में यह बीमारी महिलाओं से अधिक है, इसका मुख्य जैविक (Biological) कारण क्या है?

पत्रिका से बात करते उन्होंने बताया, पुरुषों में अग्नाशय (Pancreas) कैंसर के अधिक होने के पीछे जैविक (Biological) और हार्मोनल कारण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • हार्मोनल अंतर: महिलाओं में पाया जाने वाला एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन उन्हें इस कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है। पुरुषों में इस हार्मोन की कमी और टेस्टोस्टेरोन की प्रधानता जोखिम बढ़ा सकती है।
  • मेटाबॉलिज्म: पुरुषों में अक्सर विसरल फैट (अंगों के आसपास की चर्बी) अधिक होती है, जो इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करती है। यह स्थिति अग्नाशय की कोशिकाओं में सूजन बढ़ाकर कैंसर का कारण बन सकती है।
  • एंजाइम का प्रभाव: पुरुषों में अग्नाशय के एंजाइम का स्राव और उनकी प्रतिक्रिया महिलाओं से भिन्न होती है, जिससे संक्रमण (Pancreatitis) का खतरा बढ़ जाता है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकता है।

क्या आधुनिक जीवनशैली और 'प्रोसेस्ड फूड' का इस कैंसर से कोई सीधा संबंध है?

उन्होनें बताया, आधुनिक जीवनशैली और प्रोसेस्ड फूड का अग्नाशय के कैंसर से बहुत गहरा और सीधा संबंध है।

  • इंसुलिन पर दबाव: प्रोसेस्ड फूड (जैसे मैदा, चीनी और कोल्ड ड्रिंक्स) में 'ग्लाइसेमिक इंडेक्स' बहुत ज्यादा होता है। यह खून में शुगर की मात्रा को अचानक बढ़ा देता है, जिससे अग्नाशय (Pancreas) को बहुत अधिक इंसुलिन बनाना पड़ता है। लंबे समय तक यह दबाव कोशिकाओं को कैंसर की ओर धकेल सकता है।
  • पुराना इन्फ्लेमेशन (Inflammation): जंक फूड और 'ट्रांस फैट' शरीर के अंदरूनी अंगों में सूजन पैदा करते हैं। अग्नाशय की यह पुरानी सूजन (Chronic Pancreatitis) कैंसर का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है।
  • मोटापा: आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक सक्रियता कम है। प्रोसेस्ड फूड से होने वाला मोटापा शरीर में ऐसे टॉक्सिन्स और हार्मोन्स रिलीज करता है जो ट्यूमर को पनपने में मदद करते हैं।

पेट दर्द या पाचन की समस्या को अक्सर लोग सामान्य मानते हैं। वे कौन से संकेत हैं जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

उन्होनें बताया, पेट के दर्द या पाचन की गड़बड़ी को हर बार सामान्य समझना भारी पड़ सकता है। अग्नाशय के कैंसर के मामले में ये संकेत बेहद गंभीर होते हैं।

  • पीठ तक फैलने वाला दर्द: पेट के ऊपरी हिस्से में शुरू होने वाला ऐसा दर्द, जो धीरे-धीरे पीठ की तरफ जाने लगे और लेटने पर बढ़ जाए।
  • पीलिया (Jaundice): बिना किसी दर्द के आंखों और त्वचा का पीला होना और पेशाब का रंग गहरा होना।
  • मलाशय (Rectum) में बदलाव: मल (Stool) का रंग हल्का या मिट्टी जैसा होना और उसका चिकना (Oily) दिखना।
  • अचानक वजन गिरना: बिना किसी डाइट या एक्सरसाइज के तेजी से वजन कम होना और भूख का पूरी तरह खत्म हो जाना।
  • नया मधुमेह (Diabetes): उम्र के इस पड़ाव पर अचानक शुगर लेवल का बहुत ज्यादा बढ़ जाना।

अचानक से शुगर (Diabetes) बढ़ जाना अग्नाशय के कैंसर का संकेत कैसे हो सकता है?

उन्होनें बताया, अग्नाशय (Pancreas) का मुख्य काम इंसुलिन बनाना है, जो शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है। जब अग्नाशय में कैंसर की कोशिकाएं पनपने लगती हैं, तो वे इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं या शरीर की इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया को बदल देती हैं। इसे 'न्यू-ऑनसेट डायबिटीज' कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति को अचानक 50 साल की उम्र के बाद शुगर होती है, जबकि उसके परिवार में किसी को डायबिटीज नहीं है, तो यह ट्यूमर का शुरुआती संकेत हो सकता है। वास्तव में, कैंसर अग्नाशय की कार्यक्षमता को बाधित कर देता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक अनियंत्रित हो जाती है। इसे नजरअंदाज करना बीमारी को गंभीर बना सकता है।

जो लोग लंबे समय से धूम्रपान या शराब का सेवन कर रहे हैं, क्या उनमें Pancreatic Cancer किस तरह से होता है ?

उन्होनें बताया, धूम्रपान और शराब का लंबे समय तक सेवन अग्नाशय को दोहरी मार देता है। सिगरेट के धुएं में मौजूद हानिकारक रसायन रक्त के जरिए अग्नाशय तक पहुंचकर कोशिकाओं के DNA को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर देते हैं। यह क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के अनियंत्रित विकास को जन्म देता है, जो ट्यूमर का रूप ले लेता है। वहीं, अत्यधिक शराब अग्नाशय में जहरीले तत्व पैदा करती है, जिससे वहां 'क्रोनिक पैन्क्रियाटाइटिस' (Chronic Pancreatitis) हो जाती है। यह निरंतर रहने वाली सूजन स्वस्थ ऊतकों को नष्ट कर उन्हें कैंसर कोशिकाओं में तब्दील कर देती है। जब कोई व्यक्ति इन दोनों के साथ सेवन करता है, तो अग्नाशय की मरम्मत करने की क्षमता खत्म हो जाती है और कैंसर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

क्या 40-50 की उम्र के बाद पुरुषों को नियमित स्क्रीनिंग करवानी चाहिए?

उन्होनें बताया, अग्नाशय कैंसर के लिए कोई सामान्य 'ब्लड टेस्ट' उपलब्ध नहीं है जिसे रूटीन चेकअप माना जाए। लेकिन, यदि किसी पुरुष का पारिवारिक इतिहास (Family History) रहा है या वे लंबे समय से धूम्रपान कर रहे हैं, तो उन्हें सतर्क रहना चाहिए। 40-50 की उम्र के बाद, यदि पाचन में लगातार दिक्कत हो या पेट के ऊपरी हिस्से में खिंचाव महसूस हो, तो अल्ट्रासाउंड या एमआरआई (MRI) की सलाह दी जाती है। इस उम्र के बाद पुरुषों को अपने लिवर और अग्नाशय की स्थिति जानने के लिए साल में एक बार विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लेना चाहिए।

क्या भारत में इस कैंसर का इलाज अब शुरुआती स्टेज पर पूरी तरह संभव है?

उन्होनें बताया, भारत में अब पैन्क्रियाटिक कैंसर का शुरुआती स्टेज पर इलाज पूरी तरह संभव है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं जैसे बड़े केंद्रों में उपलब्ध विशेषज्ञता के कारण, यदि कैंसर केवल अग्नाशय तक सीमित है, तो सर्जरी (जैसे व्हिपल प्रोसीजर) के जरिए इसे सफलतापूर्वक निकाला जा सकता है। भारत में अब रोबोटिक सर्जरी, उन्नत रेडिएशन और प्रभावी कीमोथेरेपी उपलब्ध है, जो इलाज को बेहतर बनाती हैं। इसकी शुरुआत में पहचान होने पर मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि, चुनौती यह है कि अधिकांश मामले देरी से पकड़ में आते हैं। इसलिए, यदि कैंसर 'स्टेज 1' या 'स्टेज 2' में डायग्नोज हो जाए, तो आधुनिक उपचार के मेल से मरीज एक सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है।

अग्नाशय को स्वस्थ रखने के लिए 'सुपरफूड्स' या डाइट में किन बदलावों की आप सलाह देंगे?

  • गोभी वर्गीय सब्जियां(Cruciferous Vegetables): ब्रोकली, फूलगोभी और पत्तागोभी में ऐसे तत्व होते हैं जो कैंसर कोशिकाओं को रोकने में मदद करते हैं।
  • ल्दी (Curcumin): इसमें प्राकृतिक सूजन-रोधी गुण होते हैं जो अग्नाशय की सूजन को कम करते हैं।
  • लहसुन: यह अग्नाशय के ऊतकों (Tissues) की मरम्मत में सहायक है।
  • साबुत अनाज और फल: जामुन, अंगूर और फाइबर युक्त अनाज इंसुलिन के स्तर को संतुलित रखते हैं।

याद रखें, पर्याप्त पानी पीना और चीनी का कम सेवन करना अग्नाशय के लिए सबसे बड़ा 'सुपरफूड' है।

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