Period at Early Age : भारतीय किशोरियों में ‘जल्दी मासिक धर्म’ (Early Menarche) के बढ़ते प्रतिशत ने परिवार की चिंता बढ़ा दी है। जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन एंड होलिस्टिक हेल्थ (2020) के शोध में ये सामने आ चुका है कि ये संख्या तेजी से बढ़ रही है। आंकड़ों की मानें तो अब 11 साल की […]
Period at Early Age : भारतीय किशोरियों में 'जल्दी मासिक धर्म' (Early Menarche) के बढ़ते प्रतिशत ने परिवार की चिंता बढ़ा दी है। जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन एंड होलिस्टिक हेल्थ (2020) के शोध में ये सामने आ चुका है कि ये संख्या तेजी से बढ़ रही है। आंकड़ों की मानें तो अब 11 साल की उम्र से पहले पीरियड आने वाली लड़कियों की संख्या 8.6% से बढ़कर 15.5% हो गई है यानी कि डबल। इसके क्या नुकसान हैं, इससे किन बातों का खतरा बढ़ जाता है। आइए, हम महिला रोग विशेषज्ञ से समझते हैं।
जामा नेटवर्क ओपन जर्नल ने अमेरिका में 71 हजार महिलाओं पर एक रिसर्च की थी। अमेरिका में लड़कियों में अब 9 साल की उम्र में पीरियड्स शुरू हो जाते हैं।
अब 11 साल की उम्र से पहले पीरियड्स आने वाली लड़कियों की संख्या डबल हो चुकी है। ये संख्या 8.6% से बढ़कर 15.5% पहुंच गई है। इस तरह 9 साल की उम्र से पहले पीरियड्स आने वाली लड़कियों की संख्या दोगुना से भी अधिक है।
भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 5वां हिस्सा किशोर (10-19 वर्ष) हैं। लड़कियों के लिए यह एक विशेष समय होता है जब वे बचपन से नारीत्व की ओर कदम रखती हैं, जिसकी पहचान 'मेनार्चे' (पहला मासिक धर्म) से होती है। सामान्यतः यह 9 से 15 वर्ष की आयु के बीच शुरू होता है। पिछले सौ वर्षों में, विकसित और विकासशील दोनों देशों में इसकी आयु में गिरावट दर्ज की गई है। हाल के अध्ययनों के अनुसार, 34% लड़कियों में 8 वर्ष की आयु से पहले ही यौवन के लक्षण दिखने लगते हैं।
कम उम्र में पीरियड आने के कारण और बचाव को लेकर महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका रहरिया ने पत्रिका के साथ बातचीत की। आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं-
डॉ. रहरिया ने बताया कि भारत में भी इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। शोध में भी सामने आए आंकड़े डराते हैं। इसको लेकर हमें कुछ बातों को समझ लेने की आवश्यकता है।
भारत सरकार के 'किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम' (Rashtriya Kishor Swasthya Karyakram - RKSK) और विभिन्न नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की रिपोर्ट के अनुसार,
हाल के कुछ वर्षों में भारतीय लड़कियों में पीरियड्स शुरू होने की उम्र थोड़ी कम हुई है। अब कई शहरी क्षेत्रों में यह औसत 12.1 से 12.5 वर्ष के करीब देखा गया है।
यदि किसी लड़की को 8-9 साल से पहले पीरियड्स शुरू हो जाते हैं, तो इसे 'समय से पहले यौवन' माना जाता है। ऐसी स्थिति में ये बात छिपाए नहीं, बल्कि किसी डॉक्टर से परामर्श लें। क्योंकि यह भविष्य में कद रुकने या हार्मोनल समस्याओं का कारण बन सकता है। साथ ही डिलेड प्यूबर्टी (Delayed Puberty), यदि 15-16 वर्ष की आयु तक भी पीरियड शुरू नहीं होते हैं, तो इसे 'विलंबित यौवन' की श्रेणी में रखा जाता है। इसके पीछे पोषण की कमी (Anemia) या थायराइड जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इसको लेकर वो सलाह देती हैं कि अधिक हेल्दी या पतली बच्चियों का ख्याल रखना जरूरी है। अगर फास्टफूड (शुगर, कोलड्रिंक्स, जंक फूड) अधिक खाते हैं, देर तक जागते हैं, मोबाइल-लैपटॉप का अधिक यूज करते हैं… इससे हेल्दी लाइफस्टाइल डिस्टर्ब होती है। ऐसे में बच्चों को हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर जागरूक करना जरूरी है। इसके अलावा बढ़ती उम्र के साथ बच्चों को यौन शिक्षा भी दें।
भारत में किशोरियों में एनीमिया (खून की कमी) एक बड़ी समस्या है, जिसके कारण पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय इसके लिए स्कूलों में WIFS (Weekly Iron and Folic Acid Supplementation) कार्यक्रम भी चलाता है। इसके अलावा परिवार को घर पर डाइट में आयरन को शामिल कराएं।
भारत में मासिक धर्म शुरू होने (Menarche) की औसत उम्र सामान्यतः 12 से 13 वर्ष के बीच मानी जाती है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मीडिया में ये जानकारी दी है कि 10 से 15 वर्ष की आयु के बीच पीरियड्स शुरू होना पूरी तरह से सामान्य और स्वस्थ है।
पीरियड का दर्द कई बार असहनीय हो जाता है। जैसे- हाल ही में एक मामला सामने आया था कि कर्नाटक के तुमकुरु की एक 19 साल की लड़की पीरियड के दर्द के बारे में शर्म से किसी से बताई नहीं, जिसके कारण मौत हो गई। ऐसे में छोटी बच्चियां भी शर्म से इस बात को ना बताए तो दिक्कत हो सकती है।
अंत में डॉक्टर ने सलाह दिया कि बच्चियों को जागरूक करना जरूरी है। साथ ही अगर कम उम्र में पीरियड आए तो महिला रोग विशेषज्ञ से मिल लें ताकि रिस्क को कम किया जा सके।