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Oldest Tigeress : एकाकी जीवन, फिर भी देख चुकी 22 बसंत…क्या है ‘महक’ की उम्र का राज, अध्ययन से उठेगा पर्दा

अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में 22 बसंत गुजार चुकी महक को जल्द ही एक खिताब दिया जाना है। वन विभाग ने देशभर के चिड़ियाघरों से उम्रदराज बाघों के बारे में जानकारी मांगी है। इस बारे में पढ़िए आशीष जोशी की रिपोर्ट।
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Sep 22, 2026
Mahak Tigeress
महक बाघिन (Photo: Rajasthan Patrika, Designed: ChatGpt)

Oldest Tigeress: कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क की बा​घिन महक की लम्बी उम्र का राज जानने के लिए वन विभाग अध्ययन करवाएगा। देश के चिडि़याघर में सबसे लम्बी उम्र की बा​घिन का ताज महक के नाम दर्ज होने वाला है। इसके ​लिए वन विभाग ने देशभर के चिड़ियाघरों से जानकारी मांगी है।

जानिए क्यों महक पर बनाई जाएगी डॉक्यूमेन्ट्री

यों तो देश में कई जगह चिड़ियाघर है, लेकिन कोटा का अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क सबसे खास बन गया है। यहां की स्पेशल गेस्ट है बा​घिन महक। महक के नाम पर रेकॉर्ड बनने वाला है। महक 22 बसंत देख चुकी है। देशभर के चिड़ियाघरों में उम्र के आधार की बात करें तो बा​घिन महक सबसे अ​धिक उम्र वाली बा​​घिन में शुमार हो गई है। अब वन्यजीव विभाग इस पर डॉक्यूमेन्ट्री बनाने की तैयारी भी कर रहा है। आमतौर पर जंगलों में बाघ की आयु 14 से 15 साल के बीच होती है और चिड़ियाघर में इनकी आयु 18 से 20 साल तक देखी गई है। लेकिन महक बा​घिन अब तक 22 बसंत देख चुकी है। गत माह 28 अगस्त को बा​घिन का 23वां जन्म दिन मनाया गया था।

कोटा की आबोहवा बाघ और शेरों को आती है रास

कोटा के चिड़ियाघर के इतिहास में काफी शेर व बाघ रहे हैं। यहां की आबोहवा बाघ व शेरों को शुरू से ही रास आई है। ऐसे में महक की उम्र को देखते हुए डॉक्यूमेंट्री तैयार करवाने के साथ बा​घिन की उम्र का राज जानने के लिए अध्ययन की तैयारी चल रही है। वन्यजीव मंडल के उपवन संरक्षक प्रमोद धाकड़ बताते हैं, बाघिन पर डॉक्यूमेंट्री बनाएं। महक स्वस्थ व मस्त है, यह हमारे लिए सकारात्मक है।

बाघिन को पिलाई जाती है टॉनिक भी

वन्यजीव विभाग के डॉ. त्रिलोक गोचर बताते हैं, महक बिल्कुल फिट है। जबड़े और नाखून काफी मजबूत हैं। पर्याप्त आहार ले रही है। विभाग की ओर से भी महक का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। स्वस्थ्य रहे, इसके लिए आहार के साथ आवश्यक पोषक तत्व, सूप,आयरन टॉनिक इत्यादि भी समय-समय पर दे रहे हैं।

रास आई हाड़ौती की आबोहवा

महक का जन्म 28 अगस्त 2004 को जयपुर के नाहरगढ़ जैविक उद्यान में हुआ था। वर्ष 2012 में उसे पहली बार कोटा लाया गया था। कुछ समय नयापुरा स्थित चिड़ियाघर में रही फिर उसे जयपुर भेज दिया गया, लेकिन अभेड़ा बायॉलोजिकल पार्क बनने के बाद मार्च 2023 में जयपुर से फिर कोटा लाया गया। तब से ही बा​घिन अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में है।

दो साल से अकेली

बा​घिन के जोड़ीदार नाहर की मौत के बाद से ही बा​घिन महक अकेली है। बाघ नाहर की मौत अगस्त 2024 में लगभग 17 साल की उम्र में प्राकृतिक कारणों से हो गई थी। इसके बाद से अभेड़ा में किसी बाघ को नहीं लाया गया।

इसलिए भी खास अभेड़ा

अभेड़ा पार्क पर्यटक व वन्यजीव प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण है। पार्क के बाद अभेड़ा तालाब व महल पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। तालाब में दर्जनों प्रजातियों के प​क्षियों का मेला लगा रहता है। विंटर सीजन में तो विदेशी मेहमान प​क्षियों के कलरव से क्षेत्र चहक उठता है। क्षेत्र में अन्य तालाब भी है। एतिहा​सिक महल की खूबसूरती पर्यटकों को खूब रास आती है।

जल्द जोड़ियां बनाने की जरूरत

अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में बा​घिन महक के अलावा, भालू, शेरनी सुहासिनी, चीतल, सांभर,पैंथर, विदेशी पक्षी एमू समेत अन्य 100 के करीब वन्यजीव हैं। महक बा​घिन के साथ शेरनी सुहासिनी एकाकी जीवन जीने को विवश है। सुहासिनी की जोड़ी बनाने के लंबे समय से विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक जोड़ी नहीं बन पाई है।

विस्तार की जरूरत

पार्क के पहले चरण का कार्य ही अभी पूरा हो सका है। दूसरे चरण के कार्य के लिए बजट का इंतजार है। राज्य सरकार ने बजट में भी सैकंड फेज का काम शुरू करने की घोषणा की थी। पिंजरों के कारण सरीसृप वर्ग के जीवों को अभी भी नयापुरा स्थित पुराने चिड़ियाघर में ही रखा गया है। इससे वन्यजीव प्रेमी उन्हें देखने से वंचित हो रहे हैं, हालांकि विभाग की ओर से इसके लिए भी प्रयास चल रहे हैं।

पर्यटकों को लुभाएगा मुकुंदरा टाइगर रिजर्व

मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में भी जंगल सफारी शुरू हो गई है। इससे पर्यटन सीजन में इस बार देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा होने की उम्मीद है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर मुकुंदरा टाइगर रिजर्व और रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में इंटरस्टेट बाघ कॉरिडोर के तहत बाघ लाने की तैयारी चल रही है। इससे पहले भी मध्य प्रदेश से बा​घिन लेकर आए थे।

मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़कर 7 हो गई

मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ गया है। इनकी संख्या बढ़कर सात हो गई है। राजस्थान होटल फेडरेशन के संभाग अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी का कहना है कि पर्यटक मुकुंदरा के साथ बायलॉजिकल पार्क को भी देखने आते हैं। बा​​घिन महक बायलॉजिकल पार्क की पहचान है। उन्होंने कहा कि बायलॉजिकल पार्क के विस्तार के लिए एक प्रतिनि​धि मंडल शीघ्र ही लोकसभा अध्यक्ष से भेंट करेगा और बजट स्वीकृत करवाने की मांग करेगा। कोटा द​क्षिण के विधायक संदीप शर्मा ने बताया कि जल्द ही सैकंड फेज का काम शुरू करवाएंगे। इस बारे में मुख्यमंत्री और वन मंत्री से बात हो चुकी है।

Updated on:
22 Sept 2026 11:15 am
Published on:
22 Sept 2026 11:08 am