Police Job Crisis: देश के युवाओं का बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीएएसएफ और पुलिस सेवा से मोहभंग होता जा रहा है। लोग इन नौकरियों में सुकून महसूस नहीं कर रहे हैं और यही वजह है कि बड़ी संख्या में वीआरएस ले रहे हैं। युवक इन नौकरियों से इस्तीफा दे रहे हैं। केंद्रीय पैरामिलिट्री बल से पांच वर्षों की अवधि में 7,664 लोगों ने इस्तीफा दे चुके हैं। यही हाल पुलिस सेवा में देखा जा रहा है। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट।
Police job crisis India : युवाओं में बेरोजगारी दर जनवरी-मार्च तिमाही में बढ़कर 15% हो गई, जो पिछले चार तिमाहियों में सबसे अधिक है। बढ़ती बेरोजगारी दर के बीच किसी तरह से नौकरी बचाने की जद्दोजहद के बीच आखिर ऐसा क्या हो रहा है कि जब पुलिस, सीएएसएफ (CASF) , बीएसएफ (BSF) और सीआरएफ (CRPF) से नौकरी से इस्तीफा (Police Resignation) देने या वीआरएस लेने के मामले बड़ी संख्या में सामने आने लगे हैं। आइए इस रिपोर्ट में समझते हैं।
हम इस रिपोर्ट में सबसे पहले देश में बढ़ रही बेरोजगारी के आंकड़ों पर गौर करते हैं। युवाओं में बेरोजगारी दर चालू कैलेंडर वर्ष के जनवरी-मार्च तिमाही में बढ़कर 15% हो गई, जो पिछले चार तिमाहियों में सबसे अधिक है। यह अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के 14.3% से बढ़ी है। 15-29 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में बेरोजगारी दर जनवरी-मार्च में बढ़कर 17.7% हो गई, जबकि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में यह 16.6% थी। यह जानकारी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) में सामने आई। बेरोजगारी दर में इजाफा होने की वजह जनरेटिव एआई (Gen AI) और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को माना जा रहा है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बीएसफ BSF में सबसे ज्यादा, उसके बाद सीआरपीएफ की सेवाओं से वीआरएस लेकर मुक्त हुए। वहीं नई रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान पुलिस सेवा से जिला स्तर पर बड़े पैमाने पर लगातार इस्तीफे हो रहे हैं। राज्य में पिछले पांच वर्षों में 2178 जवानों ने नौकरी से इस्तीफा दिया। बीकानेर, श्रीगंगानगर, भीलवाड़ा, चूरू और हनुमानगढ़ जैसे जिलों में सबसे अधिक इस्तीफे दर्ज किए गए।
गृह मंत्रालय द्वारा संसद में दिए गए जवाब के अनुसार, केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल (CAPF, NSG, Assam Rifles) से पिछले पांच वर्षों में 47,891 कर्मियों ने वीआरएस लिया, जबकि 7,664 ने इस्तीफा दिया। बीएसफ से वर्ष 2019–2023 के दौरान 21,860 जवानों से वीआरएस लिया। वहीं इस अवधि में सीआरपीएफ की नौकरी से 12,893 कर्मियों ने वीआरएस लिया। अगर कुल केंद्रीय पैरामिलिट्री बल से वीआरएस लेने वालों के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो यह लगभग 50 हजार (46,960) के करीब रहा।
CAPF Suicide: गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में बताया था कि पिछले पांच वर्षों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF), एनएसजी (NSG) और असम राइफल्स में 55,555 कर्मियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) या इस्तीफा दिया। वहीं इस अवधि के दौरान 730 कर्मियों ने आत्महत्या की। इस बारे में सरकार ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ड्यूटी समय सामान्यतः 8 घंटे ही निर्धारित है, लेकिन 'ऑपरेशनल जरूरतों' के कारण यह बदल जाता है।
आइए अब राजस्थान पुलिस महकमे की नई रिपोर्ट पर बात करते हैं। कभी पुलिस की वर्दी पहनकर रौब झाड़ना युवाओं का सपना हुआ करता था। हालांकि बदलते समय के साथ पुलिस विभाग में जरूरी सुधार नहीं किए जाने के चलते अब यही नौकरी बहुत से युवाओं को रास नहीं आ रही। वे लगातार ड्यूटी, मानसिक दबाव, छुट्टियों की कमी और अफसरशाही के बोझ ने हालात कुछ ऐसे बना दिए कि पिछले पांच वर्षों में राजस्थान के 2178 जवानों ने खुद ही पुलिस सेवा को अलविदा कह दिया। पुलिस कर्मी दबी जुबान में दुखी मन के साथ साझा करते हुए अपने घर वालों और अपने मित्रों से बताते रहते हैं कि उनके जीवन में सुकून नाम की कोई चिड़िया नहीं रहती है। वह इस बात की शिकायत भी करते रहते हैं कि उनका कोई पारिवारिक और सामाजिक जीवन नहीं रह जाता है। उन्हें हमेशा अधिकारियों के आदेश पर यहां से वहां भागना पड़ता है।
देश पुलिस बल की कमी से लंबे समय से जूझ रहा है। ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPRD) के 2024 के आंकड़ें भी इस बात की पुष्टि करते हैं। राजस्थान पुलिस ने हाल ही में लगभग 9,617 कांस्टेबल पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। जिससे स्पष्ट है कि राज्य में बड़े स्तर पर रिक्तियां मौजूद हैं। राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो अधिकांश राज्यों में पुलिस-जनसंख्या अनुपात संयुक्त राष्ट्र के मानकों से कम है। कई राज्यों में 15% से 30% तक पद खाली हैं। हरियाणा में 2025 तक करीब 19% कांस्टेबल और लगभग 50% हेड कांस्टेबल पद खाली बताए गए। देश के ज्यादातर राज्यों में कमोबेश यही हाल है।
पुलिस सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि पुलिस में सुधार की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही है। यदि ड्यूटी घंटे, छुट्टी व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और कार्य परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
कई जवानों ने दूसरी सरकारी नौकरियों में सुकून तलाश लिया, तो कईयों ने बेहतर जीवन के लिए वर्दी उतार दी। पुलिस विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2025 के बीच राज्य में 2,178 जवान नौकरी छोड़ चुके हैं। वहीं पांच सालों में बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू व भीलवाड़ा जिले में 291 जवानों ने नौकरी छोड़ी। अकेले बीकानेर जिले में हर साल 12 से 15 पुलिसकर्मी नौकरी छोड़ रहे हैं।
बीकानेर - 76
श्रीगंगानगर - 58
चूरू - 46
भीलवाड़ा - 75
हनुमानगढ़ - 36
सुमेरपुर निवासी एक जवान ने पुलिस सेवा जॉइन करने के बाद शिक्षक भर्ती परीक्षा पास की और शिक्षा विभाग में नियुक्ति ले ली। विभागीय नियमों के तहत उसे प्रशिक्षण और वेतन मद में खर्च राशि जमा करवाकर इस्तीफा देना पड़ा। इसी तरह श्रीगंगानगर, पुष्करनसर और रायसिंहनगर के कई जवान प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलने के बाद दूसरे विभागों में चले गए। सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी ओमप्रकाश जोशी ने राजस्थान पत्रिका से कहा कि पुलिस विभाग में अवकाश व्यवस्था और व्यावहारिक सुधार की तत्काल जरूरत है।