
French Couple Marriage : विदेशी पर्यटकों को सिर्फ राजस्थान के महल किले और खान-पान ही नहीं बल्कि यहां की संस्कृति भी खूब लुभा रही है। यही वजह है कि वे अपने जिदंगी की नई शुरुआत के लिए राजस्थानी संस्कृति के तौर—तरीकों को अपना रहे हैं। इसका एक नजारा बुधवार की रात को शेखावाटी अंचल में देखने को मिला। मौका था एक फ्रांसिसी जोड़े की भारतीय परम्परा अनुसार शादी का। इसके लिए सीकर जिले के दूजोद गांव का माहौल ऐसा था, जैसे गांव के ही किसी परिवार में शादी का जश्न मन रहा हो।
यहां फ्रांसीसी युवक हूबर्ट और उसकी मंगेतर सोफी की शादी हमारी परम्परा के अनुसार पूरे रीति-रिवाज और धूमधाम से हुई। इस शादी में गांव कुछ लोग बाराती बने तो कुछ घराती। हूबर्ट शेरवानी और साफा पहन घोड़ी पर सवार हुए और बारात लेकर सोफी को ब्याहने पहुंचे। जिस घर को घराती के रूप में तैयार किया, वहां हूबर्ट ने बाकायदा तोरणा मारा। फिर लाल जोड़े में सजी सोफी ने वरमाला डाली एवं सात फेरों की रस्म हुई। पंडित ने मंत्र पढ़े और दूल्हा - दूल्हन ने अग्नि कुंड के सात फेरे लिए। पूरे गांव में इस शादी को लेकर जश्न और अतिरिक्त उत्साह का माहौल था।
हूबर्ट दो साल पहले फ्रांस से 30 लोगों के ग्रुप के साथ भारत घूमने आए थे। दूजाेद के फ्रेंच गाइड गोवर्धन सिंह ने इस ग्रुप को जयपुर, मंडावा, जैसलमेर, जोधपुर सहित आगरा आदि जगह पर घुमाया था। तब हूबर्ट को भारतीय संस्कृति व यहां के संस्कार अच्छे लगी। उसने तभी तय कर लिया था, कि वे अपनी शादी राजस्थानी परम्परा के अनुसार करेंगे।
हूबर्ट व सोफी लंबे समय से लिव इन पार्टनर के रूप में रह रहे थे। हूबर्ट ने राजस्थान भ्रमण के बाद अपनी शादी भारतीय रीति-रिवाज से शादी करने की इच्छा जताई। वे शादी के लिए अपनी मंगेतर सोफी के साथ 27 अक्टूबर को सीकर के दूजोद गांव आए। दूजोद में पूर्व सरपंच विक्रम सिंह के घर पर बुधवार शाम को भारतीय रीति-रिवाज से मंडप में अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। शादी की सभी रस्मे पूरी कीं और आतिशबाजी की। शादी पंडित देवेंद्र शर्मा ने करवाई। हूबर्ट फ्रांस में बायोटेक्नोलॉजी में रिसर्च का कार्य करते हैं। वहीं दुल्हन रेवेन्यू डिपार्टमेंट में कार्यरत है।
हूबर्ट ने बताया कि फ्रांस में बच्चे बड़े होने के बाद अपने माता-पिता या परिवार के साथ नहीं रहते। एक तय उम्र के बाद माता-पिता बच्चों को अलग छोड़ देते हैं। जबकि भारतीय संस्कृति में परिवार, माता-पिता व रिश्तेदारों के साथ रहते हैं और यहां बच्चों का अपने परिवार व रिश्तेदारों से एक अलग ही अटैचमेंट होता है। इसी कारण वे भारतीय संस्कृति व रीति रिवाजों को विश्व में सबसे बेहतर मानते हैं। ऐसे में उन्होंने राजस्थान में शादी करने का निर्णय लिया। दोनों पति-पत्नी अब करीब 11 दिन तक उदयपुर, मंडावा, बीकानेर, जैसलमेर, पुष्कर सहित राजस्थान के अन्य शहरों व आगरा में घूमेंगे।
राजस्थान के पर्यटन मॉडल में यहां की सांस्कृतिक विरासत का बड़ा योगदान है। कभी महल किलों तक सीमित यह सेक्टर अब विलेज टूरिज्म तक पहुंच चुका है। इसके पीछे हमारे सांस्कृतिक रीति रिवाजों को आकर्षण बड़ा कारण है। यही वजह है कि सरकार और पर्यटन उद्योग अब नए डेस्टिनेशन, नए सर्किट, वेडिंग, ग्रामीण पर्यटन, वाइल्ड लाइफ, वेलनेस, फिल्म और अनुभव आधारित पर्यटन पर एक साथ काम कर रहे हैं। राजस्थान की पहचान अरसे से विदेशी पर्यटकों के पसंदीदा डेस्टिनेशन के तौर पर रही है। जयपुर के किले और महल, उदयपुर की झीलें, जोधपुर का मेहरानगढ़, जैसलमेर का रेगिस्तान और पुष्कर जैसे धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र विदेशी पावणों को रिझाने का काम करते रहे हैं।
यह पहली बार नहीं जब किसी विदेशी जोड़े ने अपनी जिंदगी की नई शुरुआत के लिए राजस्थान की धरती को चुना हो। पहले भी कई विदेशी जोड़े राजस्थान में शादी की अपने जीवन के स्पेशल दिन को यादगार बना चुके हैं। वर्ष 2023 में स्पेन के एक कपल ने जोधपुर में हिंदू रीति रिवाज से अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। पावटा दुर्गादास नगर के एक होटेल में हुए इस अनूठे विवाह में वर वधु बने स्पेनिश जोड़े ने भारतीय परम्परा अनुसार शादी रचाई। स्पेन पर्यटक दूल्हे फेलिप और दुल्हन विक्टोरिया जब जोधपुर आए तो यह जगह उन्हें भा गई। दूल्हा- दुल्हन ने यहां के लोगों की जीवनशैली कलरफुल बताया। इससे करीब छह महीने पहले भी फ्रांस से आए एक जोड़े ने इसी प्रकार मारवाड़ की संस्कृति से प्रभावित होकर विवाह का मन बनाया। उसके बाद यहां के रेस्टोरेंट में सम्पूर्ण रीति रिवाज के साथ उनका विवाह करवाया गया।
दरअसल, कोरोना काल के बाद राजस्थान में देसी विदेशी सैलानियों की आवक में काफी कमी आई थी। राजस्थान सरकार के मुताबिक यह सेक्टर पूरी तरह से घरेलू पर्यटन पर निर्भर हो गया था। साल 2023 में प्रदेश में करीब 17.90 करोड़ घरेलू और 17 लाख विदेशी सैलानी आए थे।
साल 2024 में 20 लाख 72 हजार विदेशी सैलानियों के मुकाबले देसी सैलानियों की संख्या 23 करोड़ से ज्यादा रही थी। इसी तरह 2025 में घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़कर करीब 25.25 करोड़ और विदेशी पर्यटकों की संख्या करीब 19.45 लाख रही। वहीं 2026 में जून तक उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में करीब 10.85 करोड़ घरेलू और 8.45 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे। एक अन्य सरकारी अपडेट में जनवरी से जून 2026 के बीच कुल 10.92 करोड़ पर्यटकों के आने की जानकारी दी गई है।