
Scholarships : कॉलेज में पढ़ाई करने वाले युवाओं के लिए छात्रवृत्ति आर्थिक सहारा बननी चाहिए, लेकिन जब सहायता राशि ही बेहद कम हो तो इसका उद्देश्य सवालों के घेरे में आ जाता है। राजस्थान में उच्च शिक्षा से जुड़ी कुछ छात्रवृत्ति योजनाओं में मिलने वाली राशि को लेकर यह सवाल उठता रहा है कि क्या इतनी राशि विद्यार्थियों के लिए वास्तव में मददगार है?
उच्च शिक्षा की 11 छात्रवृत्तियों पर नजर डालें तो 60 से 300 रुपए प्रतिमाह देने का प्रावधान है। ऐसे में योजनाओं में कम छात्रवृत्ति हाेने के कारण छात्र आवेदन नहीं कर रहे हैं। ये छात्रवृत्तियां जरूरमंद, योग्यताधारी, स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व सैनिकाें के बच्चों के लिए शुरू की थी।
मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति योजना में पात्र विद्यार्थियों को अधिकतम 10 महीने तक 500 रुपए प्रतिमाह यानी सालाना 5,000 रुपए दिए जाते हैं। निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले 40 प्रतिशत या अधिक दिव्यांगता वाले विद्यार्थियों को अधिकतम 10,000 रुपए सालाना दिए जाते हैं। लेकिन कॉलेज की फीस, किताबें, परीक्षा शुल्क और रोजाना आने-जाने का खर्च जोड़ें तो यह सहायता पर्याप्त नहीं है।
छात्रवृत्ति के लिए विद्यार्थियों को पात्रता की शर्तें पूरी करने, दस्तावेज जुटाने और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे में कम राशि होने पर योजना का लाभ विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुरूप नहीं मिल पाता। छात्रों के अनुसार सरकार को छात्रवृत्ति की राशि महंगाई और उच्च शिक्षा की वास्तविक लागत के अनुसार बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों से जयपुर और दूसरे शहरों में उच्च शिक्षा के लिए आने वाले विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की छोटी राशि भी कुछ हद तक मददगार होती है। इससे किताबें, नोट्स, फोटोकॉपी और कॉलेज आने-जाने जैसे खर्चों में सहयोग मिल सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए यह सहायता पढ़ाई जारी रखने में संबल बनती है। हालांकि, शहर में किराया, भोजन और परिवहन का खर्च देखते हुए छात्रवृत्ति की मौजूदा राशि पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों का मानना है कि सहायता राशि बढ़ाई जाए, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए परिवार पर कम निर्भर रहना पड़े।
छात्रवृत्ति की राशि बढ़ाने और योजनाओं की समीक्षा करने की मांग समय-समय पर उठती रही है। विद्यार्थियों के लिए सवाल यह है कि जब पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है, तो छात्रवृत्ति की राशि में उसी अनुपात में बदलाव क्यों नहीं हो रहा। सरकार की ओर से अभी तक योजना-वार आवेदन, स्वीकृति और लाभार्थियों के आंकड़ों की समीक्षा भी नहीं की गई है।
राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (रुक्टा) के महामंत्री ने पत्रिका से बातचीत में कहा, 'छात्रवृत्ति का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और प्रतिभावान विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा जारी रखने में मदद करना है। यदि छात्रवृत्ति की राशि बहुत कम है तो उससे विद्यार्थियों की फीस, किताबों और अन्य शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने में खास मदद नहीं मिलती। सरकार को समय के साथ छात्रवृत्ति की राशि में संशोधन करना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को वास्तविक आर्थिक संबल मिल सके।'