
Political dynasty : राजस्थान में नगर निकाय के बाद अब पंचायती राज चुनाव की रंगत परवान पर है। पहले चरण के मतदान हो चुके हैं तो दूसरे और तीसरे चरण का मुकाबला जारी है। शेखावाटी के तीनों जिलों (सीकर, चूरू, झुंझुनूं) में दूसरे और तीसरे चरण में पंचायती राज चुनाव होंगे। समूचे चुनाव को सियासी कुनबों के सदस्यों ने मैदान में उतर कर रोचक बना दिया है।
कहीं मंत्री के पत्नी और बेटे सियासी समर में भाग्य आजमा रहे हैं तो कहीं विधायक, सांसद के परिवार के सदस्य ताल ठोक रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि ये जोर आजमाइश सिर्फ पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य तक की नहीं। बल्कि इन नेताओं की निगाहें प्रधान और जिला प्रमुख जैसे पंचायती राज के प्रमुख पदों पर है। आइये जानते हैं शेखावाटी के तीनों जिलों में किन सियासी घरानों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।
सीकर के श्रीमाधोपुर से विधायक एवं प्रदेश के नगरीय विकास (यूडीएच) मंत्री झाबर सिंह खर्रा के परिवार से चार सदस्य चुनाव मैदान में हैं। उनकी पत्नी शांति देवी पंचायत समिति के वार्ड 17 से तो छोटा पुत्र अजय सिंह वार्ड नंबर 20 से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि बड़ा पुत्र दुर्गा सिंह वार्ड 19 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। श्रीमाधोपुर पंचायत समिति से यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा खुद और उनके पिता हरलाल सिंह भी प्रधान रह चुके हैं। इसके अलावा खर्रा के छोटे भाई महावीर सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने जिला परिषद में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर वार्ड संख्या 23 से निर्दलीय नामांकन किया है।
सियासी परिवारों के मैदान में कूदने से सीकर जिले की तीन पंचायत समितियों में मुकाबला रोचक होगा। खंडेला पंचायत समिति में पूर्व केन्द्रीय मंत्री महादेव सिंह खंडेला की पुत्रवधू मीनाक्षी ने वार्ड 26 में कांग्रेस से नामांकन भरा है। इस पंचायत समिति से महादेव खंडेला के बेटे गिर्राज सिंह व पत्नी पार्वती प्रधान रह चुकी है। इसी तरह पंचायत समिति पिपराली में सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर के भाई बाबूसिंह बाजौर चुनावी मैदान में है। इस पंचायत समिति में प्रेमसिंह बाजौर की पत्नी सुप्यार कंवर प्रधान रह चुकी है।
झुंझुनूं जिले में भाजपा और कांग्रेस ने कई नेताओं के परिजनों को टिकट दिया गया है। पूर्व सांसद नरेंद्र कुमार खींचड़ की दो पुत्रवधू चुनाव मैदान में हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष एवं पूर्व जिला प्रमुख हर्षिनी कुलहरि जिला परिषद के वार्ड पांच और उनकी देवरानी अनामिका वार्ड छह से प्रत्याशी हैं। उदयपुरवाटी के पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी की बेटी और पूर्व सांसद संतोष अहलावत की पुत्रवधू दीक्षा अहलावत वार्ड 18 से चुनाव मैदान में हैं। भाजपा से सूरजगढ़ के पूर्व विधायक सुभाष पूनिया के भाई की पत्नी एवं पूर्व प्रधान सविता पूनियां वार्ड 35 से मैदान में हैं। वहीं भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई झुंझुनूं पंचायत समिति की पूर्व प्रधान सुशीला सीगड़ा वार्ड छह से चुनाव लड़ रही हैं। युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुधींद्र मूंड की पत्नी रंजना कुमारी वार्ड 20 से और चिड़ावा के पूर्व प्रधान निहाल सिंह रणवां की पुत्रवधू विनिता रणवां वार्ड 39 से कांग्रेस प्रत्याशी हैं।
जिला परिषद चूरू में भाजपा ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ के पुत्र पराक्रम राठौड़ को वार्ड 39 व पुत्रवधू कनिका सिंह को वार्ड 23 से उम्मीदवार बनाया है। वहीं सुजानगढ़ विधानसभा चुनाव लड़ चुकी संतोष मेघवाल को वार्ड 12 से टिकट दिया है। पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल के पुत्र ओमप्रकाश मेघवाल को वार्ड 17 से प्रत्याशी बनाया है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने विधायक नरेन्द्र बुडानिया की पत्नी कनक बुडानिया वार्ड 38 से तो सरदारशहर विधायक अनिल शर्मा के भाई केशरचंद को वार्ड 39 से प्रत्याशी बनाया है। इसी वार्ड से भाजपा के पराक्रम राठौड़ चुनाव लड़ रहे हैं।
पंचायतीराज चुनाव को लेकर सियासी परिवारों के साथ अन्य प्रत्याशियों में काफी उत्साह है। माना जाता है कि ग्रामीण सियासत में प्रधान और जिला प्रमुख के जरिए ही सत्ता के बड़े रास्ते खुलते हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि इन चुनाव से नई पीढ़ी के नेताओं की इलाके में पकड़ बनती है। वहीं सरपंच सहित इलाके के लोगों से बेहतर जुड़ाव की वजह से आगे चलकर विधायक - सांसद के चुनाव की राह आसान मानी जाती है।
सीकर जिले के मौजूदा विधायकों की बात करें तो लक्ष्मणगढ़ विधायक व पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा, यूडीएच मंत्री झाबरसिंह खर्रा, धोद विधायक गोरधन वर्मा, दांतारामगढ़ विधायक वीरेन्द्र सिंह पूर्व में अपने अपने क्षेत्र में प्रधान रह चुके हैं। वहीं मौजूदा सांसद अमरा राम का भी गांवों का सियासी सफर गांवों की सरकार से होकर ही गुजरा है।
चूूरू के पूर्व सांसद रामसिंह कस्वां कालरी ग्राम पंचायत के 1977 से 13 साल सरंपच रहे, 1991 में चूरू संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा से सांसद बने, वे लगातार चार बार चूरू से सांसद रहे और लोकसभा की उद्योग समिति के सदस्य रहे। कस्वां सादुलपुर से विधायक भी रहे। इसी तरह तारानगर से कांग्रेस के वर्तमान विधायक नरेन्द्र बुडानिया दूधवाखारा ग्राम पंचायत से सरपंच बने और 1985 में चूरू से कांग्रेस के सांसद चुने गए। तीन बार लोकसभा और फिर 2012 से 18 तक राज्यसभा सांसद रहे। तारानगर से दूसरी बार विधायक बनें।