Reincarnation Movies in Indian Cinema: 'मधुमती' से लेकर 'ओम शांति ओम' और 'मगधीरा' तक, पुनर्जन्म पर बनी फिल्में भारतीय सिनेमा में बार-बार सुपरहिट साबित हुई हैं। आखिर क्यों एक ही थीम दर्शकों को हर दौर में आकर्षित करती है? इस एक्सप्लेनर में जानिए इसकी सांस्कृतिक, भावनात्मक और सिनेमाई वजहें।
Reincarnation Movies in Indian Cinema: इंडियन सिनेमा दुनिया की सबसे बड़ी टॉप 10 फिल्म इंडस्ट्रीज में से एक है। भारतीय सिनेमा में हर साल अलग-अलग भाषाओं में सैंकड़ों फिल्में बनती हैं। अलग-अलग जॉनर या थीम की इन फिल्मों में कुछ हिट होती हैं तो कुछ फ्लॉप हो जाती हैं. मगर हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी खासियत ये है कि दर्शक इन फिल्मों को सिर्फ देखते नहीं हैं, महसूस करते हैं। दर्शक कहानी को खुद से कनेक्ट करते हैं। यही वजह है कि फिल्मों के जॉनर के हिसाब से उसके दर्शक भी होते हैं, किसी को हॉरर पसंद है तो किसी को एक्शन, तो कोई पुनर्जन्म की कहानियों में रुचि रखता है। आज हम पुनर्जन्म (Reincarnation) पर बनी फिल्मों पर बात करेंगे।
इंडियन सिनेमा में पुनर्जन्म यानी (Reincarnation), पर कई फिल्में बनी हैं। 'मधुमती' जैसी क्लासिक फ़िल्म से लेकर 'कुदरत', 'महबूबा', 'कर्ज', 'ओम शांति ओम' और 'मगधीरा' तक कई फिल्मों की थीम या जॉनर लगभग एक सा ही है। फर्क सिर्फ इतना है कि किसी फिल्म की कहानी में बदला लेने के लिए पुनर्जन्म होता है तो किसी में अधूरे प्यार को पूरा करने के लिए हीरो-हीरोइन दोबारा जन्म लेते हैं। इसके बावजूद ये फ़िल्में सिर्फ चली ही नहीं, बल्कि सुपरहिट और कल्ट क्लासिक भी बनीं।
मगर एक सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या है जो एक ही तरह की कहानी जिसका पता है कि फिल्म में आगे क्या होने वाला है फिर भी दर्शक बार-बार ऐसी फिल्में देखने के लिए थिएटर क्यों जाता है? क्या इसका कोई मनोवैज्ञानिक कारण है?
इस सवाल के जवाब के लिए हमने राजकीय मेडिकल कॉलेज, करौली, के मनोचिकत्सा डिपार्टमेंट के सहायक आचार्य, मनोचिकित्सक एवं काउंसलर, डॉ. प्रेमराज मीना से बात की और उन्होंने कहा, 'मनोविज्ञान के अनुसार व्यक्ति उन चीजों, व्यक्तियों या विचारों को अधिक पसंद करने लगते हैं जिनसे वे बार-बार मिलते या परिचित होते हैं। बार-बार संपर्क से उसके प्रति रुचि, सकारात्मक दृष्टिकोण और आकर्षण बढ़ता है। साइकोलॉजी में इसे परिचितता का सिद्धांत/मेरे एक्सपोजर इफेक्ट (Mere-Exposure Effect) के रूप में जाना जाता है। हम अनजाने में उन विकल्पों को चुनते हैं जिन्हें हमने पहले देखा या सुना है, क्योंकि हमारा मस्तिष्क उन्हें सुरक्षित और विश्वसनीय मानता है।
यह प्रभाव अक्सर अवचेतन स्तर पर काम करता है। हमें यह महसूस भी नहीं होता कि हम किसी चीज़ को केवल इसलिए पसंद कर रहे हैं क्योंकि वह हमारे लिए परिचित है। और यही चीज फिल्मों के लिए भी लागू होती है कि सिनेप्रेमियों को बार-बार दिखाई जाने वाली कहानी रोमांचक लगती है और वो उसको हर बार देखना पसंद करते हैं।'
वहीं, सवाल के जवाब में फिल्म वरिष्ठ पत्रकार-लेखिका जयंती रंगनाथन ने कुछ यूं जवाब दिया कि,
'रीइन्कार्नेशन यानी पुर्नजन्म एक ऐसा विषय है, जो आम दर्शकों में उत्सुकता जगाता है। मैंने सत्तर के दशक के शुरुआत में एक फिल्म देखी थी 'धड़कन'। यह फिल्म पुनर्जन्म पर ही आधारित थी, जिसमें एक बच्चा अपने पिछले जन्म में जा कर अपने उस जन्म के हत्यारे का नाम बताता है। इस रोमांचक फिल्म को देखने के कुछ अर्से बाद राजकुमार, राजेश खन्ना और हेमा मालिनी अभिनीत 'कुदरत' फिल्म में पुनर्जन्म का एक और ही मसला देखने को मिला। इस फिल्म की कहानी में मरने से पहले नायिका अपने कातिल को शाप देती है कि इस जन्म में जैसे वो अपने प्रेम के लिए तिल-तिल जली, उसके साथ भी वैसा ही हो। और अगले जन्म में वह यह घटना अपनी आंखों से देखती है। अगर आप इस थ्योरी में यकीन ना भी करे तब भी यह रोमांच आपको थ्रिल करता है जैसे 'ओम शांति ओम' ने किया। इस विषय पर एक साधारण कहानी के बजाय एक ट्विस्टेड या थ्रिलिंग कहानी दर्शकों को ज्यादा पसंद आएगी, जिसमें अंत तक सस्पेंस बना रहे।'
इसके आगे उन्होंने कहा, 'यह विषय अछूता नहीं है, पर इस विषय पर कम ही फिल्में बनी हैं। हाल ही में आई कार्तिक आर्यन की हॉरर कॉमेडी फिल्म 'भूल भुलैया 3' की भी कहानी में इसी विषय का इस्तेमाल किया गया है।'
वहीं, इसके इतर इस सवाल का जवाब सिर्फ सिनेमा में नहीं, बल्कि भारतीय समाज की सोच, आस्था और भावनात्मक संरचना में छिपा है। भारत में पुनर्जन्म का विचार कोई नई या काल्पनिक अवधारणा नहीं, बल्कि धर्म, दर्शन और लोककथाओं का हिस्सा रहा है। ऐसे में जब सिनेमा इस विश्वास को प्रेम, बदले और न्याय की कहानी से जोड़ देता है, तो दर्शक खुद को उससे अलग नहीं कर पाता। और बार-बार वही कहानी देखना चाहता है।
आइये अब एक नजर डालते हैं उन फिल्मों पर जिनकी कहानी एक ही थीम पुनर्जन्म, बदला, अधूरा प्यार या फिर इंसाफ के इर्द-गिर्द घूमती है।
| फ़िल्म का नाम (Reincarnation Theme) | रिलीज़ ईयर | बजट (रुपये) | बॉक्स ऑफिस कलेक्शन (Worldwide) | स्टेटस |
|---|---|---|---|---|
| मधुमती (Madhumati) | 1958 | 45 लाख रुपये (अनुमान) | 4 करोड़ रुपये | Blockbuster (Highest grossing 1958) |
| कर्ज (Karz) | 1980 | 1.5 करोड़ रुपये (अनुमान) | 5.5 करोड़ रुपये (अनुमान) | Average/Below Average |
| मगधीरा (Magadheera) | 2009 | 35–44 करोड़ रुपये | 150.5 करोड़ रुपये | Blockbuster (100 Cr club) |
| ओम शांति ओम (Om Shanti Om) | 2007 | 38–40 करोड़ रुपये | 148.2 करोड़ रुपये | Blockbuster |
| करण-अर्जुन (Karan Arjun) | 1995 | 6 करोड़ रुपये | 43.6 करोड़ रुपये | Blockbuster |
इस लिस्ट में सबसे पहला नाम आता है साल 1958 में रिलीज हुई फिल्म 'मधुमती' का। इस फिल्म में दिलीप कुमार, वैजयन्ती माला, प्राण, जॉनी वॉकर जैसे दिग्गज कलाकारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। फिल्म की कहानी एक ऐसे लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक ऐसी जगह पहुंचता है जहां उसको अपने पिछले जन्म की घटनाएं याद आ जाती हैं। फिल्म को बिमल रॉय ने डायरेक्ट किया था।
फिल्म की कहानी इस तरह से है कि शादी के बाद रवि (ऋषि कपूर)की पत्नी कामिनी (सिमी गरेवाल) जायदाद के लिए उसकी हत्या कर देती है। कुछ सालों बाद रवि का मोंटी के रूप में पुनर्जन्म होता है और दोबारा दोनों का आमना-सामना होता है तो मोंटी को अपनी पिछली जिंदगी याद आ जाती है। वह अपने पिछली जिंदगी परिवार और अपनी पत्नी कामिनी के बारे में पूछताछ करता है। और फिर उससे बदला लेता है।
एक स्ट्रीट-बाइक रेसर की मुलाकात एक महिला से होती है और उसे अपने पिछले जीवन की झलकियां दिखाई देने लगती हैं, जहां वो दोनों 400 साल पहले प्रेमी-प्रेमिका थे जो अपनी अधूरी प्रेम कहानी को पूरा करने और अपने दुश्मन से बदला लेने के लिए दोबारा जन्म लेते हैं। यह तेलुगु फिल्म उस समय की सबसे महंगी और सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक थी, जिसका वर्ल्डवाइड कलेक्शन करीब 150.5 रुपये करोड़ था. इसे भारतीय सिनेमा में बड़े रिकॉर्ड बनाने वाली ब्लॉकबस्टर्स में से एक गिना जाता है।
शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण अभिनीत इस फिल्म की कहानी 1970 के दशक में हुई एक पॉपुलर एक्ट्रेस और एक स्ट्रगलिंग एक्टर ओम की हत्या के बाद उनके पुनर्जन्म के इर्द-गिर्द घूमती है। नई लाइफ में वो अपने प्यार शांति और अपनी मौत का बदला लेता है। इस फिल्म को लोगों का बहुत प्यार मिला था।
फिल्म की कहानी में करण और अर्जुन देश के अलग-अलग हिस्सों में पुनर्जन्म लेते हैं। लेकिन उनकी पिछली जन्म की मां की आस्था उन्हें अपनी मृत्यु का बदला लेने के लिए एक साथ लाती है। फिल्म में शाहरुख खान, सलमान खान, राखी गुलजार, अमरीश पुरी, काजोल और ममता कुलकर्णी ने जबरदस्त अभिनय किया था। राकेश रोशन के निर्देशन में बनी ये फिल्म 90 के दशक की छठी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी।
इसके अलावा इस लिस्ट में 'महबूबा', 'नील कमल', '1920', 'कुदरत' जैसी फिल्मों के नाम शामिल हैं।
पुनर्जन्म पर बनी फिल्में (Movies Based on Reincarnation Hindi) असल जिंदगी की उस कसक को आवाज देती हैं, जहां अधूरी रह गई मोहब्बत, बिना सजा बच निकला अपराध और अधूरा न्याय दर्शक के मन में सवाल बनकर रह जाते हैं। ये फिल्में उन सवालों को दूसरा मौका देती हैं, यह यकीन दिलाने के लिए कि अगर इस जन्म में नहीं, तो अगले जन्म में सही। शायद यही वजह है कि एक ही थीम पर बनी कहानियां भी हर बार नई लगती हैं और दिल को छू जाती हैं।