अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन को टॉमहॉक मिसाइलें देने पर विचार कर रहे हैं। इससे रूस पर दबाव बढ़ सकता है और युद्ध समाप्त करने के लिए वार्ता की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि ट्रंप ने कहा कि अगर रूस जंग खत्म नहीं करता है, तो ही यह फैसला लिया जाएगा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब यूक्रेन को युद्ध में इस्तेमाल करने लिए एक खतरनाक हथियार देने पर विचार कर रहे हैं। जिससे रूस दबाव में आ सकता है।
जानकारी के मुताबिक, ट्रंप अब यूक्रेन को गहरी मारक क्षमता वाली 'टॉमहॉक' मिसाइलें देने की तैयारी में हैं। दरअसल, रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते के पिछले प्रयास विफल होने के बाद ट्रंप ने ऐसा संकेत दिया है।
यह हथियार यूक्रेनी सेना के लिए वरदान साबित हो सकते हैं। इससे रूस को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंचने की उम्मीद है। ऐसा माना जा रहा है कि कीव की प्राथमिकता अब रूसी ऊर्जा ढांचे पर हमला करना है, जिसका प्रभाव सीधा तेल बाजारों पर दिखेगा।
टॉमहॉक एक लंबी दूरी की, सबसोनिक क्रूज मिसाइल है। जिसे अमेरिका ने बनाया है। इसे पहली बार 1980 के दशक में पेश किया गया था। इसे मुख्य रूप से नौसेना द्वारा उपयोग किया जाता है।
इसे सतह से सतह और पनडुब्बी से सतह हमलों के लिए डिजाइन किया गया है। टॉमहॉक मिसाइल अपनी सटीकता, लंबी रेंज और बहुमुखी उपयोगिता के लिए प्रसिद्ध है।
इसका उपयोग कई युद्धों और सैन्य अभियानों में किया गया है। जून में, एक अमेरिकी पनडुब्बी ने मिडनाइट हैमर बमबारी अभियान के तहत ईरान में परमाणु ठिकानों पर 30 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागीं थीं, जिससे फोर्डो में बड़ी तबाही हुई थी।
यूक्रेन को पहले दिए गए कुछ हथियारों की तुलना में टॉमहॉक सबसे खास है। एक तो इसकी मारक क्षमता अधिक है, जो लगभग 1,550 मील तक है।
यह दूरी यूक्रेन को अपनी सीमा के काफी अंदर से भी मिसाइल दागने और रूस के बड़े हिस्से को निशाना बनाने में मदद करती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन को इन हथियारों को दागने के लिए संभवतः ट्रक से ढोया जाने वाला लॉन्चर टाइफोन मिलेगा। ये मिसाइलें आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम से कई गुना ज्यादा दूरी तक जा सकती हैं।
बैलिस्टिक मिसाइलें और क्रूज मिसाइलें दोनों ही शक्तिशाली हथियार हैं, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली और विशेषताएं अलग-अलग होती हैं।
बैलिस्टिक मिसाइलें समय के साथ तय किए गए रास्ते पर चलती हैं और ऊंचाई पर पहुंचकर अपने लक्ष्य की ओर गिरती हैं। इन्हें रोकना थोड़ा आसान हो सकता है क्योंकि उनकी गति-दिशा का अनुमान लगाया जा सकता है।
दूसरी ओर, टॉमहॉक जैसी क्रूज मिसाइलें जमीन के करीब उड़ती हैं और अपनी निम्न ऊंचाई के कारण रडार की पकड़ में नहीं आती हैं। इससे उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है और वे अपने लक्ष्य पर सटीक हमला कर सकती हैं।
अगर ट्रंप टॉमहॉक दे भी देते हैं, तब भी यूक्रेनियों को इस सिस्टम का उपयोग करने में एक या दो महीने लग सकते हैं। अमेरिका पहले लक्ष्यों और रडार से बचने के बारे में खुफिया जानकारी दे सकता है, क्योंकि क्रूज मिसाइलें मार्गदर्शन के लिए अमेरिकी सैन्य नेविगेशन प्रणालियों का उपयोग करती हैं।
इसका मतलब है कि अंततः अमेरिका के पास यह तय करने का अधिकार होगा कि कीव किन रूसी ठिकानों पर हमला करना चाहता है। इसके अलावा, यूक्रेन को मिलने वाली मिसाइलों की संख्या को ट्रंप सीमित कर सकते हैं।
विशेषज्ञ का कहना है कि अमेरिका ने 1980 के दशक से 9,000 टॉमहॉक मिसाइलें बनाई हैं, जिनमें से सैकड़ों का इस्तेमाल युद्ध में किया गया है और हजारों तैनात या सेवामुक्त हैं।
रक्षा विभाग ने यमन में ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमले सहित हालिया अभियानों के कारण आपूर्ति में और कमी की है। उधर, पेंटागन के नीति प्रमुख, एल्ब्रिज कोल्बी यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति को लेकर संशय में हैं।
उन्होंने कहा है कि उन्हें चीन को रोकने पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए। टॉमहॉक एक प्रमुख हथियार है, जिसे पेंटागन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संभावित भविष्य के अभियानों के लिए जमा करना चाहेगा।
युद्ध के दौरान, यूक्रेन के ड्रोनों ने पूरे रूस में कई जगहों को भारी नुकसान पहुंचाया है। ऊर्जा क्षेत्र में तेल रिफाइनरियां और डिपो, समुद्री बंदरगाह, सैन्य भंडारण स्थल, हवाई क्षेत्र और रडार प्रतिष्ठान ड्रोन हमलों में तबाह हो गए हैं।
अगस्त की शुरुआत से, यूक्रेनी सेना ने कम से कम 58 बार रूसी ऊर्जा स्थलों पर हमला किया है। यूक्रेनी हमले अक्सर रूसी सीमा से 600 मील या उससे अधिक पीछे स्थित स्थानों को निशाना बनाते हैं।
यूक्रेनी हमलों से मध्य रूस में बश्कोर्तोस्तान, समारा और सारातोव व दक्षिणी रूस में वोल्गोग्राद स्थित रिफाइनरियां भी प्रभावित हुई हैं। इन हमलों से भारी नुकसान हुआ है।
ताजा जानकारी के मुताबिक, रूस की लगभग 40 प्रतिशत तेल रिफाइनिंग कंपनियां हमलों के बाद मरम्मत की वजह से बंद पड़ीं हैं।
रूस का ईंधन बाजार मासिक गैसोलीन मांग के लगभग एक-चौथाई के बराबर की कमी का सामना कर रहा है। टॉमहॉक इस गतिशीलता को और तेज कर सकते हैं, जिससे रूस के ऊर्जा उत्पादन पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
विशेषज्ञ ने कहा कि अगर अमेरिका कुछ सौ टॉमहॉक मिसाइलें छोड़ दे और यूक्रेन उन सभी को रूसी ऊर्जा संयंत्रों पर केंद्रित कर दे, तो इससे रूस को इतना नुकसान हो सकता है कि वह बातचीत के लिए तैयार हो जाए।
अगस्त में, यूक्रेन फ्लेमिंगो नामक एक क्रूज मिसाइल का अनावरण किया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह यूक्रेन से लगभग 1,900 मील दूर स्थित लक्ष्यों तक पहुंच सकती है।
(वॉशिंग्टन पोस्ट का यह आलेख पत्रिका.कॉम पर दोनों समूहों के बीच विशेष अनुबंध के तहत पोस्ट किया गया है।)