
भारत में पीरियड लीव को लेकर कोई राष्ट्रीय कानून नहीं है।
Paid Menstrual Leave: देश में पीरियड लीव (Menstrual Leave in India) की मांग के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 13 मार्च 2026 को कहा, 'महिलाओं के लिए अनिवार्य मासिक धर्म अवकाश (Menstrual Leave) महिलाओं के लिए रोजगार पर नकारात्मक असर डाल सकता है। अगर ऐसा कानून बनाया गया तो नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से बच सकते हैं।' हालांकि देश के कुछ राज्यों (बिहार, ओडिशा, कर्नाटक और कुछ हद तक केरल) में पीरियड लीव की व्यवस्था लागू की गई है। आइए जानते हैं कि पीरियड लीव दिए जाने वाले राज्यों और मुल्कों में श्रम में महिलाओं की भागीदारी कितनी प्रतिशत है।
पूरी खबर पढ़ने के लिए लॉगिन करें।
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.