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Sawan 2026: सावन में ​शिव भक्तों ने कर डाली पृथ्वी की 12490 बार परिक्रमा, 10 करोड़ से ज्यादा ने किया जलाभिषेक

Sawan 2026 : देश में इस साल सावन में 10 करोड़ से ज्यादा ​श्रद्धालुओं ने भोले का कांवड़ जल से अ​भिषेक किया। हरिद्वार में ही 4.8 करोड़ करोड़ शिवभक्त कांवड़ लेने पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया। भक्त 10 से लेकर 600 किलोमीटर तक पैदल चले। इस बारे में पढ़िए दीपक शर्मा की विशेष स्टोरी।
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Aug 31, 2026
Sawan 2026
सावन में शिव भक्तों ने बनाया नया रिकॉर्ड (Photo: Rajasthan Patrika)

Sawan 2026 : इस साल सावन में कांवड़ लेकर निकले 10 करोड़ से ज्यादा शिवभक्तों ने कुल करीब 50 करोड़ किलोमीटर का सफर तय किया। यानी इन श्रद्धालुओं के कदमों ने मिलकर इतनी दूरी नाप दी, जितनी धरती की पूरी परिधि के करीब 12,500 चक्कर लगाने में तय होती है। कोई 10 किलोमीटर चला तो किसी ने 600 किलोमीटर तक का सफर किया। केवल हरिद्वार में ही 4.8 करोड़ कांवड़िए गंगाजल लेने पहुंचे। इतने ही बाकी देश में भी मान लें और एक कांवड़िए के औसत 5 किलोमीटर के सफर को भी आधार मानें तो सावन में ​शिव भक्तों ने जो दूरी तय की, उसे जोड़ा जाए तो धरती की 12500 परिक्रमा की जा सकती है। इस वर्ष सावन 30 जुलाई से शुरू हुआ और 28 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ कांवड़ यात्रा का सिलसिला रुका।

रात को नंगे पैर चले कांवड़िए

जयपुर के अलग अलग क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं ने गलताजी से पवित्र जल लाकर अ​भिषेक किया, इसके लिए 20 से 50 किमी से ज्यादा की दूरी तय की। अल सुबह से लेकर शाम और देर रात तक राजधानी के रास्ते कांवड़ियों के लगाए भोलेबाबा के जयकारों से गूंजते रहे। डीजे के चलते भजनों पर उनकी आस्था और जयकारे और तेज सुनाई दिए। रात को कांवड़ लेकर जाते समूह को रोककर पूछा - कैसा लगता है कांवड़ में जल लाना? इसके जवाब में गोनेर निवासी पुरुषोत्तम शर्मा बोले - यों समझो - बाबा का आशीर्वाद मिल गया।

देर रात जगतपुरा अक्षयपात्र के सामने से गुजरते कांवड़िए। (फोटो : रघुवीर सिंह)

डाक कांवड़ ने रफ्तार पकड़ी : 50 घंटे में पूरी की 631 किमी की दूरी

परंपरागत कांवड़ में श्रद्धालु पैदल चलते हुए कई दिनों में अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। इसके समानांतर डाक कांवड़ का चलन तेजी से लोकप्रिय हुआ है। इसमें श्रद्धालु समूह में गंगाजल लाते हैं और निर्धारित समय में उसे गंतव्य तक पहुंच अ​भिषेक करते हैं। श्रीगंगानगर शहर के प्राचीन शिवालय बाबा शुक्रनाथ की बगीची में देवप्रयाग से गंगाजल की कांवड़ लेकर पहुंचे कांवडिय़ों ने महादेव का अभिषेक किया। महंत बाबा कैलाशनाथ के सा​न्निध्य में 80 कांवडिय़ों का जत्था 7 अगस्त की सुबह रवाना हुआ और 9 अगस्त की सुबह देवप्रयाग से गंगाजल लेकर रवाना हुए। कांवडिय़ों ने देवप्रयाग से श्रीगंगानगर तक 631 किलोमीटर की यात्रा लगातार चलते हुए 50 घंटे में पूरी की।

बड़ी चौपड़ हवा महल बाजार से कावड़ यात्रा निकालते हुए। (फोटो: रघुवीर सिंह)

आस्था के पीछे समुद्र मंथन की मान्यता

कांवड़ यात्रा श्रावण यानी जुलाई-अगस्त के दौरान होने वाली धार्मिक पदयात्रा है, जिसमें श्रद्धालु हरिद्वार, गौमुख और गंगोत्री जैसे तीर्थस्थलों से गंगाजल व पवित्र जल भोलेशंकर को अर्पित करते हैं। इसकी धार्मिक मान्यता समुद्र मंथन से जुड़ी मानी जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने धारण किया था। तीव्र विष की उष्णता शांत करने के लिए देवताओं ने महादेव का अ​भिषेक किया था। हिंदू परंपरा में श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इसी दौरान कांवड़िए पवित्र नदियों से जल लेकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। गंगाजल से अभिषेक को विशेष महत्व है।

कांवड़ के साथ चलती है बड़ी अर्थव्यवस्था

कांवड़ यात्रा ने धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बाजार दिया है। हरिद्वार में इस वर्ष 4.8 करोड़ से ज्यादा कांवड़िए पहुंचे। व्यापारियों के अनुसार एक कांवड़िए का भोजन, ठहरने, कांवड़ और परिवहन आदि पर औसत खर्च करीब 2,500 रुपए रहा। इस आधार पर हरिद्वार में यात्रा के दौरान 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक के कारोबार का अनुमान लगाया गया। इस कारोबार में कांवड़ और पूजा सामग्री, भगवा कपड़े, फूल-माला, भोजन, पानी, फल, होटल-धर्मशाला, परिवहन और अस्थायी शिविरों से जुड़े छोटे-बड़े कारोबार शामिल हैं।

देशभर में करोड़ों कदम, पीछे पूरा प्रशासन

  • बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए राज्यों को यातायात, सुरक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सफाई की विशेष व्यवस्था करनी पड़ी। उत्तर प्रदेश में कई जिलों में यातायात मार्ग बदले गए।
  • दिल्ली-एनसीआर में नमो भारत की सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाई गई और देवघर के लिए विशेष श्रावणी मेला ट्रेनें चलाई गईं।
  • वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम में भीड़ प्रबंधन के लिए छायादार कतार, ग्लूकोज और ओआरएस की व्यवस्था की गई।
  • हरिद्वार में पुलिस, अर्द्धसैनिक बल, ड्रोन, सीसीटीवी और नियंत्रण कक्ष के जरिए निगरानी की गई।राजस्थान पुलिस ने भी हरिद्वार से आने-जाने वाले कांवड़ियों के लिए अलग दिशा-निर्देश जारी किए।
Updated on:
31 Aug 2026 01:45 pm
Published on:
31 Aug 2026 01:45 pm