
जबलपुर. जिन हाथों ने बचपन में उंगली पकडकऱ चलना सिखाया, आज उन्हीं हाथों को बुढ़ापे में सहारे, सुरक्षा, सम्मान और इलाज की जरूरत है। उम्र बढऩे के साथ शरीर कमजोर होता है, लेकिन बुजुर्गों की मुश्किलें सिर्फ बीमारी तक सीमित नहीं हैं। किसी के लिए अपने ही घर में सुरक्षा का संकट है, तो कोई अपनों के दूर चले जाने से अकेलेपन में जी रहा है। कहीं संपत्ति को लेकर विवाद है तो कहीं इलाज के लिए साथ चलने वाला कोई नहीं।
एनसीआरबी 2024 रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों पर अत्याचार के 5875 अपराध दर्ज हुए, जो राज्य में सर्वाधिक हैं। 2023 में यह संख्या 5738 और 2022 में 6187 थी। देशभर में 2024 में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ 31067 मामले दर्ज हुए।
जबलपुर में पिछले समय में पुलिस की ओर से अकेले रहने वाले बुजुर्गों की पहचान भी की गई है। ऑपरेशन आस्था के तहत 419 ऐसे बुजुर्गों की पहचान की गई थी, जिनके बच्चे विदेश में थे या जो अकेले रहते थे। यह संख्या बताती है कि अकेलेपन को केवल पारिवारिक समस्या मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। ऐसे बुजुर्गों के लिए पड़ोस, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संस्थाओं को जोडकऱ स्थायी सपोर्ट सिस्टम की जरूरत है।
केस 1- जबलपुर के रांझी तहसील क्षेत्र की 65 वर्षीय दंपती का मामला इसका एक चेहरा सामने लाता है। बुजुर्ग दंपती ने अपने छोटे बेटे और बहू पर मानसिक और शारीरिक प्रताडऩा का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जिस मकान को उन्होंने अपनी कमाई और बैंक से लिए कर्ज से बनवाया, उसी में उन्हें परेशान किया जा रहा था और घर के कई कमरों पर ताला लगा दिया गया। मामला पहले एसडीएम के पास पहुंचा और बाद में कलेक्टर न्यायालय में अपील हुई। कलेक्टर न्यायालय ने बेटे-बहू को मकान खाली करने का आदेश दिया।
केस 2- दूसरी तस्वीर और भी खामोश है। बैंक से सेवानिवृत्त वृद्ध विजय नगर में रहते थे। उनके बेटा-बहू कनाडा में रहते थे। उनकी होने पर वीजा नहीं मिल पाने के कारण बेटा-बहू नहीं आ सके। आखिरकार उनके मित्रों ने मिलकर अंतिम संस्कार किया।
उम्र बढऩे के साथ उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच, दवाओं, मानसिक स्वास्थ्य, अकेलेपन, आपात स्थिति और कई बार लंबे समय तक देखभाल की जरूरत पड़ती है। परिवार साथ हो तो इनमें से कई जरूरतें घर पर पूरी हो जाती हैं, लेकिन जब बच्चे दूसरे शहर, राज्य या देश में हों तो व्यवस्था की भूमिका बढ़ जाती है। यही वजह है कि बुजुर्गों की देखभाल को केवल पेंशन या वृद्धाश्रम तक सीमित देखने के बजाय जेरियाट्रिक केयर को मजबूत करने की जरूरत है। राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मिक ने भी बुजुर्गों की देखभाल के लिए व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत उठाई थी। फरवरी 2026 में उन्होंने राज्यसभा में 60 वर्ष से अधिक उम्र के माता-पिता की देखभाल के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को 45 दिन की छुट्टी देने की मांग भी उठाई थी। उन्होंने रोजगार के कारण युवाओं के घरों से दूर जाने और बुजुर्ग माता-पिता के अकेले पड़ने की समस्या का उल्लेख किया था।
अकेलेपन और डिजिटल जानकारी के अभाव के कारण बुजुर्ग अब सॉफ्ट टारगेट बन रहे हैं। पेंशन फ्रॉड, संपत्ति कब्जाने और हाल ही में बड़े डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों ने सीनियर सिटीजंस की नींद उड़ा दी है।
पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 'बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों की मुख्य वजह उनका सामाजिक अलगाव और शारीरिक कमजोरी है। कई मामलों में अपराधी बाहरी व्यक्ति न होकर परिवार के करीबी या परिचित ही होते हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।'