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Hair Follicles: बालों को साफ करने के लिए शैम्पू का कर रहे इस्तेमाल, तो इन बातों का रखें ध्यान

what is Hair Follicles: क्या आप जानते हैं कि हर बार बाल धोते समय आप अपने हेयर फॉलिकल्स को 'सफोकेट' कर रहे हैं? चमकदार बालों का वादा करने वाले विज्ञापनों के पीछे सल्फेट्स और सिलिकॉन्स जैसे केमिकल्स का एक ऐसा जाल छिपा है, जो स्कैल्प को स्थायी रूप से डैमेज कर सकता है। इस विषय पर पूरी जानकारी के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता विजय (Dermatologist) के साथ पत्रिका की विशेष बातचीत पढ़िए।

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Apr 20, 2026

Hair Follicles: हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां 'फर्स्ट इम्प्रेशन' बहुत मायने रखता है, और इसमें हमारे बालों की भूमिका अहम होती है। विज्ञापनों में लहराते, रेशमी और चमकदार बाल देखकर हम अक्सर झागदार शैम्पू की ओर खिंचे चले जाते हैं जो जादुई बदलाव का वादा करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस स्कैल्प को आप साफ कर रहे हैं, उसी के नीचे आपके बालों की 'फैक्ट्री' यानी हेयर फॉलिकल्स (Hair Follicles) को यह शैम्पू धीरे-धीरे नष्ट कर रहा है? क्यों आने वाले समय में 'शैम्पू टॉक्सिसिटी' (Shampoo Toxicity) एक बड़ी समस्या बनने वाली है।

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हेयर फॉलिकल्स आपके बालों का पावरहाउस

Sebaceous Glands: हेयर फॉलिकल आपकी स्कैल्प (सिर की त्वचा) के नीचे एक छोटे टनल जैसी संरचना होती है। यहीं से आपके बाल उगते हैं और इन्हें पोषण मिलता है। यहीं से बालों का निर्माण होता है, उसमें रक्त संचार से पोषण मिलता है और 'सीबम' (प्राकृतिक तेल) के जरिए नमी मिलती है। अगर शैम्पू के केमिकल्स इन फॉलिकल्स के अंदर जमा हो जाएं ,तो बाल पतले होने लगते हैं और अंतत में फॉलिकल 'मर' जाता है, जिससे उस जगह दोबारा बाल नहीं उगते। इसे ही फॉलिकुलर एट्रोफी (Follicular Atrophy) कहा जाता है।

शैम्पू के वो 'खतरनाक' तत्व जो जड़ों पर वार करते हैं

  • सल्फेट्स ( Sodium Lauryl Sulfate (SLS) या Sodium Laureth Sulfate (SLES) : सल्फेट्स वे तत्व हैं जो गाढ़ा झाग बनाते हैं। आम आदमी को लगता है कि जितना ज्यादा झाग, उतनी अच्छी सफाई। लेकिन विज्ञान कुछ और कहता है। सल्फेट्स इतने शक्तिशाली 'सर्फेक्टेंट' हैं कि वे स्कैल्प की प्राकृतिक सुरक्षा परत (Lipid Barrier) को उखाड़ देते हैं। इससे फॉलिकल्स सीधे बाहरी प्रदूषण और हानिकारक तत्वों के संपर्क में आ जाते हैं
  • सिलिकॉन्स (Silicones): सिलिकॉन बालों को तत्काल चमक तो देता है, लेकिन यह एक 'प्लास्टिक कोट' की तरह होता है। यह स्कैल्प पर एक परत बना देता है जिसे धोना मुश्किल होता है। यह परत फॉलिकल्स को 'दमघोंटू' (Suffocating) स्थिति में डाल देती है, जिससे नए बालों का निकलना मुश्किल हो जाता है।
  • पैराबेंस ( Parabens) और सिंथेटिक खुशबू (Phthalates): पैराबेंस प्रिजरवेटिव्स होते हैं जो उत्पाद को खराब होने से बचाते हैं, लेकिन ये त्वचा के जरिए शरीर में प्रवेश कर हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकते हैं। वहीं, 'फ्रैग्रेंस' के नाम पर इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स स्कैल्प में 'माइक्रो-इन्फ्लेमेशन' ( सूजन) पैदा करते हैं, जो लंबे समय में बालों की जड़ों को कमजोर कर देती है।

स्कैल्प खतरे में है, कैसे करें पहचान?

शैम्पू से होने वाला नुकसान रातों-रात नहीं होता। यह एक लंबी प्रक्रिया है।

  • सूखापन और खुजली( Dryness and Itching) : बाल धोने के बाद स्कैल्प का खिंचा-खिंचा महसूस होना।
  • रिएक्टिव ऑयलीनेस ( Reactive Oiliness ) : जब शैम्पू सारे तेल को सोख लेता है, तो आपकी स्कैल्प बचाव के लिए और ज्यादा तेल (Sebum) बनाने लगती है। इससे आपको लगता है कि बाल फिर से गंदे हो गए हैं और आप फिर से शैम्पू को यूज़ करते हैं । यह एक खतरनाक प्रोसेस आपके हेयर को डेमेज़ करता है।
  • स्कैल्प बिल्ड-अप (Scalp Build-up) : फॉलिकल्स के चारों ओर सफेद या पीली परत जमने लगती है।
  • मिनिएचराइजेशन (Miniaturization ) : बाल धीरे-धीरे पतले होने लगते हैं और फॉलिकल का आकार छोटा हो जाता है।

मार्केटिंग का मायाजाल

कंपनियां 'केराटिन युक्त' (Keratin-Infused) या 'बायोटिन समृद्ध' (Biotin-Rich) शैम्पू का दावा करती हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि शैम्पू मुश्किल से 30 सेकंड से 2 मिनट तक आपके सिर पर रहता है। इतने कम समय में कोई भी प्रोटीन आपके फॉलिकल्स के अंदर जाकर उन्हें पोषण नहीं दे सकता। शैम्पू का मुख्य काम केवल सफाई है। पोषण के लिए डाइट और स्कैल्प सीरम ही कारगर होते हैं।

अपने स्कैल्प को कैसे बचाएं?

अगर आपको लगता है कि आपका शैम्पू आपकी स्कैल्प को नुकसान पहुंचा रहा है, तो इन कदमों को उठाएं

  • PH-Balanced शैम्पू का चुनाव: हमेशा लेबल चेक करें कि क्या उत्पाद 'PH-Balanced' है।
  • डाइल्यूशन तकनीक (Dilution Technique): कभी भी शैम्पू को सीधे सिर पर न डालें। एक मग पानी में आधा ढक्कन शैम्पू मिलाएं और फिर इस्तेमाल करें।
  • स्कैल्प स्क्रबिंग ( Scalp Scrubbing ): महीने में एक बार समुद्री नमक (Sea Salt) और नारियल तेल का स्क्रब इस्तेमाल करें ताकि जमा हुआ सिलिकॉन साफ हो सके।
  • शैम्पू की आवृत्ति (Frequency): हर दिन बाल धोना फॉलिकल्स के लिए आत्महत्या के समान है। सप्ताह में 2 से 3 बार पर्याप्त है।

'नो-पू' (No-Poo) और लो-पू मूवमेंट (Low-Sulfate)

विश्व स्तर पर अब 'No-Poo' (No Shampoo) मूवमेंट पर जोर दे रहा है। लोग फिर से रीठा, शिकाकाई और मिट्टी की ओर लौट रहे हैं। अगर आप पूरी तरह प्राकृतिक नहीं हो सकते, तो 'लो-पू' (Low-Sulfate) विकल्पों को चुनें। आजकल कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं। लोग ऐसे शैम्पू का इस्तेमाल कर रहे हैं जिनका PH स्तर 9 या 10 होता है, जबकि हमारी स्कैल्प का प्राकृतिक PH 5.5 के आसपास होना चाहिए।

पत्रिका खास बातचीत डॉ. अनिता विजय के साथ

क्या वाकई शैम्पू में मौजूद केमिकल्स हेयर फॉलिकल्स (बालों की जड़ों) को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं? पत्रिका के साथ बात करते हुए डॉ. अनिता ने बताया यह एक 'साइलेंट क्राइसिस' की तरह है। लेकिन इसे थोड़ा विस्तार से समझना होगा। आम तौर पर लोगों को लगता है कि शैम्पू सिर्फ बालों को साफ करता है और पानी के साथ बह जाता है। लेकिन असल में, शैम्पू में मौजूद Harsh Surfactants (जैसे सल्फेट्स) और Silicones स्कैल्प की ऊपरी सतह को भेदकर अंदर तक असर करते हैं।

यह नुकसान 'स्थायी' कैसे हो जाता है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा जब आप सालों तक ऐसे शैम्पू का इस्तेमाल करते हैं जिनमें खतरनाक केमिकल्स होते हैं, तो स्कैल्प में 'Chronic Inflammation' (लगातार रहने वाली अदृश्य सूजन) पैदा हो जाती है। यह सूजन धीरे-धीरे हेयर फॉलिकल्स के डीएनए और उनकी कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचाता है। इसे हम मेडिकल भाषा में Follicular Miniaturization कहते हैं। इसमें जड़ें धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती हैं। एक समय ऐसा आता है जब फॉलिकल इतना छोटा और कमजोर हो जाता है कि वह मर जाता है और बंद हो जाता है। एक बार जब फॉलिकल पूरी तरह बंद हो जाए (Scarring), तो वहां से दोबारा बाल उगाना लगभग नामुमकिन होता है। यानी वह नुकसान स्थायी (Permanent) हो जाता है।

एक स्वस्थ स्कैल्प और डैमेज्ड स्कैल्प के बीच शुरुआती लक्षण क्या होते हैं जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं?
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा समस्या यह है कि हम बालों की चमक देखते हैं, स्कैल्प की सेहत नहीं।यहां कुछ ऐसे 'साइलेंट सिग्नल' हैं जिसे आप डैमेज्ड स्कैल्प को पहचान सकते हैं ।

स्कैल्प की टेंडरनेस (Scalp Tenderness) : क्या आपको कभी बाल हिलाने या पोनीटेल खोलने पर जड़ों में दर्द महसूस हुआ है? लोग इसे थकान समझते हैं, लेकिन यह असल में Scalp Inflammation के शुरुआती संकेत है। एक स्वस्थ स्कैल्प लचीली होती है और उसमें दर्द नहीं होता, जबकि डैमेज्ड स्कैल्प 'सेंसिटिव' हो जाती है।

टेक्सचर में अचानक बदलाव (Sudden Texture Change) : अगर आपके बाल रातों-रात बहुत ज़्यादा रूखे या बहुत ज़्यादा ऑयली (जिसे हम Reactive Oiliness कहते हैं) होने लगें, तो समझ लीजिए कि स्कैल्प का रक्षा कवच (Acid Mantle) टूट चुका है। स्वस्थ स्कैल्प का तेल उत्पादन संतुलित रहता है।

सफेद पाउडर बनाम डैंड्रफ (Flakiness) : लोग हर सफेद कण को डैंड्रफ समझ लेते हैं। लेकिन अगर आपकी स्कैल्प से बारीक, सफेद पाउडर जैसा कुछ झड़ रहा है, तो वह डैंड्रफ नहीं बल्कि Scalp Dryness है, जो कठोर शैम्पू के कारण त्वचा की ऊपरी परत के उखड़ने से होती है।

स्कैल्प का रंग ( Color of the Scalp) : एक स्वस्थ स्कैल्प का रंग हल्का गुलाबी या सफेद जैसा साफ होता है। लेकिन अगर आप शीशे में देखें और स्कैल्प पर लालिमा (Redness) या छोटे-छोटे लाल दाने दिखें, तो यह स्पष्ट संकेत है कि आपके हेयर फॉलिकल्स रसायनों के हमले के कारण तनाव में हैं।

क्या 'हर्बल' या 'नेचुरल' टैग वाले शैम्पू पूरी तरह सुरक्षित होते हैं या उनमें भी कुछ छिपे हुए हानिकारक तत्व हो सकते हैं?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा 'हर्बल' या 'नेचुरल' टैग अक्सर एक मार्केटिंग गिमिक (Marketing Gimmick) से ज़्यादा कुछ नहीं होता। एक डॉक्टर के तौर पर मैं साफ़ कहूंगी सिर्फ 'हर्बल' लिखा होने का मतलब यह नहीं है कि वह सुरक्षित है। इसके दो कारण है

  • 'केमिकल बेस' ( Chemical Base ) : किसी भी शैम्पू को 'लिक्विड' फॉर्म में रखने, उसमें झाग बनाने और उसे खराब होने से बचाने के लिए एक 'बेस' की ज़रूरत होती है। कई कंपनियां दावा करती हैं कि उनमें 'रीठा' या 'शिकाकाई' है, लेकिन वह कुल सामग्री का मात्र 1% या 2% ही होता है। बाकी का 98% हिस्सा वही पुराने सल्फेट्स, पैराबेंस और सिंथेटिक खुशबू होती है।
  • छिपे हुए हानिकारक तत्व (Hidden Toxins): कई हर्बल शैम्पू में 'Cocamidopropyl Betaine' जैसे तत्व होते हैं, जो झाग तो बनाते हैं लेकिन स्कैल्प में एलर्जी पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा, इनमें 'सिंथेटिक रंगों' का इस्तेमाल होता है ताकि वे दिखने में प्राकृतिक (जैसे हरा या भूरा) लगें, जो स्कैल्प के लिए दमघोंटू हो सकते हैं।

स्कैल्प में जलन या खुजली होना क्या इस बात का संकेत है कि हेयर फॉलिकल्स मर रहे हैं?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा यह एक बहुत ही गंभीर संकेत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि फॉलिकल तुरंत मर गया है। इसे आप एक 'अलार्म बेल' या खतरे की घंटी की तरह समझें। जब आपकी स्कैल्प में लगातार जलन (Burning Sensation) या खुजली होती है, तो इसका मतलब है कि वहां 'Micro-inflammation' (अदृश्य सूजन) हो रही है। यह सूजन आपके हेयर फॉलिकल्स के लिए एक ज़हरीले वातावरण जैसा है।

अगर किसी की स्कैल्प शैम्पू की वजह से डैमेज हो चुकी है, तो क्या उसे दोबारा ठीक (Reverse) किया जा सकता है?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा अधिकांश मामलों में इसे रिवर्स किया जा सकता है। हमारा शरीर और हमारी स्कैल्प खुद को ठीक करने की अद्भुत क्षमता रखती हैं, बस हमें उन्हें सही माहौल और समय देना होता है।

आप मरीज़ों को कितनी बार बाल धोने की सलाह देते हैं ताकि फॉलिकल्स सुरक्षित रहें?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा यह बहुत ही व्यक्तिगत सवाल है, क्योंकि 'वन साइज़ फिट्स ऑल' का नियम यहां काम नहीं करता। लेकिन एक सामान्य सिद्धांत यह है कि अति (Excess) हमेशा नुकसानदेह होती है। मेरी सलाह है की अगर आपका स्कैलप शुष्क (Dry) है तब हफ्ते में 1 बार और तैलीय (Oily तब 2-3 बार से ज्यादा नहीं।

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