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World Food Crisis: दुनिया के कई देशों पर ‘रोटी’ सबसे बड़ा संकट ! अपनी कमाई का आधा हिस्सा सिर्फ पेट भरने में फूंक रहे ये मुल्क

World Food Import Crisis: वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कोमोरोस, नाइजर और ईरान जैसे देश अपनी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा सिर्फ खाना खरीदने में लगा रहे हैं। जानिए कैसे भारत इस वैश्विक संकट के बीच एक मजबूत ढाल बनकर खड़ा है और क्या है पूरी स्टोरी।

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Apr 20, 2026
भारत के किसानों की शक्ति (AI)

World Food Import Crisis: आज जब दुनिया मंगल ग्रह पर बसने और AI की ताकत से भविष्य बदलने की बात कर रही है, तब कई देशों के सामने आज भी रोटी जुटाना मुख्य मुद्दा बना हुआ है। वर्ल्ड बैंक (World Bank) और स्टेटिस्टा (Statista) की रिपोर्ट बताती है कि कई देशों के लिए आजादी का मतलब सिर्फ झंडा फहराना नहीं, बल्कि अपने लोगों का पेट भरना है। कुछ देश ऐसे हैं जहां अगर बाहर से अनाज आना बंद हो जाए, तो उनकी अर्थव्यवस्था रूक सकती है। कई देश भूख और कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं। वहीं भारत की उपजाऊ मिट्टी और किसानों की मेहनत ने देश को अनाज के मामले आत्मनिर्भर बना दिया। भारत न सिर्फ अपनी बल्कि दुनिया की कई देशों की ताकत बन चुका है।

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देश की तरक्की के रास्ते में सबसे बड़ा ब्रेकर!

कोमोरोस (Comoros) एक छोटा सा द्वीप देश है, लेकिन इसकी निर्भरता इतनी बड़ी है कि इसके कुल आयात (Import) का 42% हिस्सा सिर्फ खाना की आपूर्ति करने में खप जाता है। अगर कोमोरोस बाहर से मशीनें, दवाइयां, पेट्रोल और कपड़े मंगवाता है, तो उसकी कुल कीमत में से करीब आधा हिस्सा सिर्फ अनाज, मांस और चीनी का होता है। यह किसी भी देश की तरक्की में बहुत बड़ी बाधा है। जब आपकी कमाई का आधा हिस्सा सिर्फ पेट भरने में चला जाए, तो आप स्कूल, अस्पताल या सड़कें कब बनाएंगे?

वहीं जिबूती (39%) और नाइजर (38%) ये अफ्रीका के उस हिस्से में आते हैं जहां मौसम की बेरुखी और रेतीली जमीन ने खेती को लगभग नामुमकिन बना दिया है। नाइजर जैसा देश, जो अपनी सुरक्षा के लिए पहले ही संघर्ष कर रहा है, वहां खाने की इतनी भारी निर्भरता उसे दूसरे अमीर देशों का गुलाम बना देती है।

खाने के लिए विदेशों पर निर्भर

अनाज और भोज्य पदार्थ दूसरे देशों से मंगवाने की लिस्ट में ईरान का नाम भी शामिल है। वह अपनी कुल जरूरत का 29% दूसरे देशों से मंगाता है। ईरान के पास तेल है, गैस है और सेना भी मजबूत है, लेकिन अनाज उगाने में वह पीछे है। सबसे बड़ी वजह ये है कि वहां खेती के लिए जमीन बहुत कम है। ईरान में पानी की भी भारी कमी है। ऊपर से दूसरे देशों ने ईरान पर बहुत सारी पाबंदियां (sanctions) लगा रखी हैं। यही वजह है कि ईरान को अपना खाना बाहर से मंगवाना पड़ता है।

ताजिकिस्तान की हालत भी कुछ ऐसी ही है। वह अपनी जरूरत का 26% भोजन सामग्री दूसरे देशों से आयात करता है। वहां ज्यादातर इलाका पहाड़ी है और वहां सिंचाई के अच्छे साधन मौजूद नहीं हैं, इसलिए उन्हे भी खाने-पीने की चीजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। क्यूबा भी अपने भोजन सामग्री की जरूरतों का 25% बाहर से आयात करता है।

अन्नपूर्णा बनकर उभरा भारत!

रिपोर्ट में भारत को 3–9% वाली सबसे सुरक्षित कैटेगरी में रखा गया है। ये सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि किसानों की सालों की मेहनत का नतीजा है। 60 के दशक में शुरू हुई हरित क्रांति का असर आज साफ दिखता है, जिसकी वजह से भारत गेहूं, चावल और चीनी का बड़ा उत्पादक बन चुका है। इसी कारण यहां खाने-पीने की चीजें बाकी देशों के मुकाबले अभी भी काफी हद तक काबू में रहती हैं, ज्यादातर चीजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। यहां तक कि जब रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते दुनिया में गेहूं की कमी हुई, तब भारत ने आगे बढ़कर कई देशों की मदद की और अपने भंडार से अनाज उपलब्ध कराया।

आजादी पर मंडराया खतरा

इतिहास साफ बताता है कि जो देश खाने के लिए दूसरों पर ज्यादा निर्भर होते हैं, उनकी हालत कभी भी खराब हो सकती है और उनकी आजादी पर भी असर पड़ता है। आजकल बड़े और अमीर देश अनाज को भी दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार जो देश 25% से ज्यादा खाना बाहर से मंगवाते हैं, वहां दंगे-फसाद या सरकार बदलने जैसी परेशानी का खतरा बना रहता है। अगर अमेरिका या यूरोप जैसे देश अनाज देना बंद कर दें, तो ऐसे देशों में अफरा-तफरी मच सकती है। इसी वजह से खाने के मामले में भारत की आत्मनिर्भरता को देश की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।

जलती धरती और खाली होती थाली

आने वाले 10 सालों में यह समस्या और विकराल होने वाली है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से दुनिया के कई हिस्सों में बारिश का पैटर्न बदल गया है।

  • नाइजर और बेनिन जैसे देशों में जमीन और ज्यादा बंजर होती जा रही है।
  • खेती के लिए पानी कम हो रहा है, जिससे आने वाले समय में फूड इंपोर्ट का यह प्रतिशत 42% से बढ़कर 50% तक जा सकता है।
  • केवल वही देश बचेंगे जो स्मार्ट फार्मिंग और इजरायली तकनीक को अपनाएंगे। भारत इस दिशा में पहले ही काम शुरू कर चुका है।

फूड इंपोर्ट के आंकड़े

देश का नामफूड इंपोर्ट हिस्सा (%)मुख्य समस्या
कोमोरोस42%छोटे द्वीप और सीमित संसाधन
जिबूती39%बंदरगाह आधारित इकोनॉमी, खेती शून्य
नाइजर38%राजनीतिक अस्थिरता और सूखा
ईरान29%प्रतिबंध और पानी की कमी
भारत3-9%मजबूत कृषि और विशाल भंडारण

किसान मजबूत तो देश सुरक्षित

अब दुनिया सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि खाने-पीने यानी अनाज से भी प्रभावित होगी। जो देश अपने लोगों का पेट नहीं भर सकता, वो मजबूत अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे नहीं बढ़ सकता। वर्ल्ड बैंक की इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत अनाज के मामले में आत्मनिर्भर है। हालांकि, यह कई देशों के लिए एक चेतावनी भी है। भारत को अपनी इस ताकत को और बढ़ाना होगा, ताकि सिर्फ देश की नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों की भी मदद कर सकें। किसान की तरक्की ही देश की सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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