
Pallavi Singh teacher Janjgir Champa: डिजिटल युग में जहां कम्प्यूटर और इंटरनेट बच्चों की पढ़ाई का अहम हिस्सा बन चुके हैं, वहीं आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए यह सुविधा एक सपना है। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड के ग्राम रोगदा में भी कुछ समय पहले तक यही स्थिति थी। गांव में प्राथमिक और मिडिल स्कूल तो हैं, लेकिन कम्प्यूटर सेंटर, डिजिटल क्लास या तकनीकी प्रशिक्षण की कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में बच्चों का डिजिटल दुनिया से परिचय बेहद सीमित था।
इसी कमी को दूर करने का बीड़ा गांव के शासकीय मिडिल स्कूल में पदस्थ शिक्षिका पल्लवी सिंह ने उठाया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती, बल्कि एक सकारात्मक सोच और सिखाने का जज्बा ही काफी होता है।
विद्यालय को पिछले वर्ष कार्यालयीन कार्यों के लिए एक कम्प्यूटर सिस्टम उपलब्ध कराया गया। जहां अधिकांश जगहों पर ऐसे कम्प्यूटर केवल दफ्तर के काम तक सीमित रहते हैं, वहीं पल्लवी सिंह (Chhattisgarh Inspirational Story) ने इसे बच्चों के भविष्य से जोड़ने का निर्णय लिया। कार्यालयीन कार्य पूरा होने के बाद वह अपने समय में कक्षा छठवीं, सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर की बेसिक शिक्षा देने लगीं।
शुरुआत कम्प्यूटर की सामान्य जानकारी से हुई। इसके बाद बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी में टाइपिंग, कम्प्यूटर संचालन, इंटरनेट का उपयोग, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस पर काम करना, एप्लीकेशन तैयार करना और ऑनलाइन आवेदन करने जैसी जरूरी डिजिटल गतिविधियां सिखाई गईं। लगातार अभ्यास और मार्गदर्शन का परिणाम यह रहा कि आज स्कूल के अधिकांश विद्यार्थी ये सभी बेसिक डिजिटल कार्य आत्मविश्वास के साथ कर रहे हैं।
इस पहल का सबसे बड़ा असर बच्चों के आत्मविश्वास पर देखने को मिला है। जिन विद्यार्थियों ने पहले कभी कम्प्यूटर को हाथ तक नहीं लगाया था, वे अब आसानी से टाइपिंग कर रहे हैं, इंटरनेट चला रहे हैं और विभिन्न ऑनलाइन प्रक्रियाओं को समझने लगे हैं। इससे उनकी पढ़ाई के साथ-साथ भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों के लिए भी मजबूत आधार तैयार हो रहा है।
जांजगीर-चांपा जिले में ऐसे कई सरकारी विद्यालय हैं, जहां दर्जनों कम्प्यूटर और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन उनका उपयोग सीमित है। कई जगह संसाधन होने के बावजूद वे धूल फांक रहे हैं। इसके विपरीत रोगदा के इस मिडिल स्कूल में केवल एक कम्प्यूटर के जरिए बच्चों को डिजिटल शिक्षा दी जा रही है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि संसाधनों से अधिक महत्वपूर्ण उनका सही उपयोग और शिक्षकों की प्रतिबद्धता होती है।
शिक्षिका पल्लवी सिंह की मेहनत का असर केवल कम्प्यूटर तक सीमित नहीं है। स्कूल के कई विद्यार्थी अब आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी बोलने का भी प्रयास कर रहे हैं। डिजिटल शिक्षा और भाषा कौशल के इस समन्वय ने बच्चों के व्यक्तित्व विकास को नई दिशा दी है। इससे अभिभावकों में भी स्कूल के प्रति विश्वास बढ़ा है।
यदि इस विद्यालय को भविष्य में पर्याप्त कम्प्यूटर, इंटरनेट और डिजिटल संसाधन उपलब्ध हो जाएं, तो यह ग्रामीण क्षेत्र के लिए डिजिटल शिक्षा का मॉडल स्कूल बन सकता है। पल्लवी सिंह की पहल यह संदेश देती है कि एक समर्पित शिक्षक सीमित संसाधनों में भी बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। उनकी कोशिश न केवल विद्यार्थियों को डिजिटल साक्षर बना रही है, बल्कि ग्रामीण शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तन की नई कहानी भी लिख रही है।