Navratri 2026: देवी मिट्टी के कलश रखने की व्यवस्था भी की गई है। कई देवी मंदिरों में लक्ष्य के अनुरूप व्यवस्था होने पर स्थापना से पहले भी दान राशि जमा करने वालों को ज्योत जलवाने का अवसर दिया जायेगा।
Navratri 2026: चैत्र शुरू होने से पहले बुधवार की देर रात तक मंदिर प्रबंधन ने तैयारी को अंतिम रूप दिया। सभी देवी धाम में ज्योति कलश स्थापित करने के लिए विशेष रूप से स्थान तैयार किए गए है। जहां तेल और घी डालने के साथ ही देखभाल के लिए आने-जाने के लिए पर्याप्त रास्ता बनाया गया है, ताकि दर्शन के लिए मनोकामना ज्योति कलश तक पहुंचने में श्रद्धालुओं को अव्यवस्था का सामना करना ना पढ़े। इस बार भी महामाया मंदिर में ताम्बे के ज्योत कलश सजाए गए है।
वहीं, अन्य देवी मिट्टी के कलश रखने की व्यवस्था भी की गई है। कई देवी मंदिरों में लक्ष्य के अनुरूप व्यवस्था होने पर स्थापना से पहले भी दान राशि जमा करने वालों को ज्योत जलवाने का अवसर दिया जायेगा। इसके देर रात तक प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार यह बता पाए की कुल कितने ज्योत प्रजवल्लित होंगे।
श्रद्धा-भक्ति के वातावरण में गुरुवार से चैत्र नवरात्र का शुभारंभ होगा। इससे पहले रंगीन लाइटों से सभी देवी मंदिर जगमगाने लगे हैं। जहां अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11.36 से दोपहर 12.24 के बीप मंत्रोच्चार के साथ मां महामाया मंदिर, काली मंदिर, बंजारी धाम सहित सभी देवी मंदिरों में ज्योत कलश स्थापित होंगे। वहीं, ज्योत जंवारा कक्ष में सेवा देने वाले बैगा और पंडा का दायित्व जिम्मेदारों ने तय किया है। दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को व्यवस्था से जोड़ने का दायित्व वालंटियर्स निभाएगे।
पुरानी बस्ती मां राजराजेश्वरी देवी महामाया मंदिर में 11 हजार ज्योत कलश स्थापना की तैयारी है। यहाँ केवल तेल के ही ज्योत ही प्रज्जवित होंगे। इसके लिए दान राशि 700 रुपए तय की गई है। वहीं, आकाशवाणी चौक स्थित मां काली मंदिर में 3100 ज्योत जलवाने की व्यवस्था है। यहां तेल ज्योत के लिए 1050 और घी ज्योत के लिए 2100 रुपए दान राशि तय है। इसी तरह शीतला माता मंदिर में एक हजार ज्योत कलश स्थापना की व्यवस्था है। यहां 900 रुपए तेल और तीन हजार रुपए घी ज्योत के लिए पंजीयन के लिए देय है। वहीं, बंजारी धाम में 10 हजार से ज्यादा ज्योत कलश के लिए व्यवस्था की गई है।
नवरात्र में माता के दरवार में जसगीतों से माता की आस्था से ओतप्रोत गीतों की प्रस्तुति देने के लिए मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों ने कई मंडलियों को न्योता दिया है। वहीं, बढ़ते रुझान को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने पंजीयन के लिए केन्द्र सुबह भी शुरू रखने की व्यवस्था तय की है। साथ ही बैगा और कर्मचारियों की संयुक्त टीम को ज्योत कलश कक्ष की साफ-सफाई और व्यवस्था बनाने के लिए रहने खाने की व्यवस्था बनाई है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुख्ता तैयारी की गई है। प्रबंधन में ज्योत कक्ष में श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर देने के लिए बैंग और पंडा की टीम को ही जिम्मेवारी दी है, ताकि पवित्रता के लिहाज से किसी प्रकार से अव्यवस्था की स्थिति व चनने पाए।
चैत्र नवरात्रि सांग-बाना (लोहे से बानी नुकीली धारधार वस्तु) को अपने शरीर गाल नाक आंख कान में धारण करने की परंपरा है। यह परंपरा बच्चे बड़े बुजुर्ग सभी निभाते है। साथ ही जसगीत की धुनों पर नाचते गाते है। मांदर की थाप पर देवी भक्ति के साथ जसगीतों का गायन किया जाता है। सांग बाना लिए लोग गांव में घूमते हैं और लोगों से आशीर्वाद लेते-देते हैं। भक्ति और मनोरंजन का संगम: यह धार्मिक आस्था के साथ-साथ लोक मनोरंजन का भी माध्यम है। कई लोग अपनी मनोकामना पूरी होने पर सांग बनते हैं।
महापर्व चैत्र नवरात्र पर आज से छत्तीसगढ़ के शक्तिपीठों में आस्था का सागर उमड़ेगा। राजधानी के मंदिरों में भी ज्योत कलश प्रज्ज्वलित किए गए हैं। इस बार रावांभाठा स्थित बंजारी माता धाम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंगलकामना के लिए भी विशेष ज्योत प्रज्ज्वलित की जाएगी। देश के अन्य हिस्सों के साथ ही सात समंदर पार अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों से भी श्रद्धालुओं ने अपने ज्योत कलश स्थापित कराए हैं। यह दृश्य आस्था की उस डोर को दर्शाता है, जो सीमाओं से परे लोगों को एक साथ जोड़ती है। बुधवार की शाम तक ज्योत कलश के लिए मंदिर परिसर के कार्यालय में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। वहीं, मंदिर को आकर्षक लाइटिंग से सजाया गया है।