CG News: करीब 20 साल बाद यहां दंतेवाड़ा के गोंगपाल गांव से गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ बारात पहुंची। सुरक्षा और खराब रास्तों की बाधाएं दूर होने के बाद जब बारात गांव पहुंची,
CG News: बस्तर का जगरगुंडा क्षेत्र बदलाव की एक नई और सुखद इबारत लिख रहा है। कभी भय और बंदिशों के साये में सिमटा यह इलाका अब नक्सलियों के डर को पीछे छोड़ अपनी पुरानी परंपराओं की ओर लौट रहा है। दशकों बाद यहां न केवल खुलेआम रिश्ते जुड़ रहे हैं, बल्कि विवाह की रस्में भी कई दिनों तक धूमधाम से मनाई जा रही हैं।
एक दौर ऐसा भी था जब इस क्षेत्र में शादी तय करने से पहले नक्सलियों की अनुमति अनिवार्य थी। रिश्ता किस गांव में होगा, बारात में कितने लोग शामिल होंगे और कार्यक्रम कब तक चलेगा, इसकी पल-पल की जानकारी देनी पड़ती थी। बाहरी रिश्तेदारों या सरकारी कर्मचारियों को बुलाना जान जोखिम में डालने जैसा था, जिससे लोगों का सामाजिक जीवन पूरी तरह ठप हो गया था।
हाल ही में कामाराम गांव में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने क्षेत्र में नई उम्मीद जगा दी। करीब 20 साल बाद यहां दंतेवाड़ा के गोंगपाल गांव से गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ बारात पहुंची। सुरक्षा और खराब रास्तों की बाधाएं दूर होने के बाद जब बारात गांव पहुंची, तो पूरा इलाका उत्सव के माहौल में डूब गया। दूल्हे के परिजन प्रेम नाग ने बताया कि अब रास्ते खुले हैं और मन से डर कम हुआ है, जिससे रिश्तों में फिर से वही पुराना अपनापन लौट आया है।
नक्सलवाद के चरम दौर में शादी ही नहीं, बल्कि बीमारी या मृत्यु जैसे अवसरों पर भी लोग एक-दूसरे के घर जाने से कतराते थे। अब स्थिति सामान्य होने के साथ लोग बिना किसी खौफ के अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निभा रहे हैं। जगरगुंडा में सजते मंडप और बेटियों की धूमधाम से होती विदाई, बदलते बस्तर की एक सशक्त और सुंदर तस्वीर पेश कर रही है।
कामाराम जैसे गांवों में वर्षों बाद धूमधाम से होने वाली शादियां इस बदलाव का प्रतीक हैं। बारातों का खुलेआम स्वागत, पारंपरिक नृत्य-संगीत और कई दिनों तक चलने वाले विवाह समारोह अब फिर से सामान्य हो रहे हैं। इससे न केवल रिश्तों में अपनापन लौटा है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत हो रही है।
अब केवल शादी ही नहीं, बल्कि बीमारी, त्योहार और अन्य सामाजिक अवसरों पर भी लोग बिना भय के एक-दूसरे के घर जा रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि जगरगुंडा क्षेत्र धीरे-धीरे भय के साये से निकलकर सामान्य और संतुलित जीवन की ओर बढ़ रहा है।
नारायणपुर (फरवरी 2026): 7 आत्मसमर्पित नक्सली जोड़े।
नारायणपुर (जनवरी 2026): 4 पूर्व नक्सली जोड़े।
सुकमा (फरवरी 2026): 107 जोड़ों के सामूहिक विवाह में सरेंडर नक्सली शामिल।
कांकर (अक्टूबर 2025): पुलिस स्टेशन में एक सरेंडर नक्सली जोड़े की शादी।
महाराष्ट्र (जून 2025): 13 सरेंडर नक्सली जोड़ों की शादी।
गौरेला पेंड्रा मरवाही (फरवरी 2026) 4 नक्सली जोड़ों की शादी।