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गर्मी बढ़ते ही देसी फ्रिज की वापसी, रायपुर में सिलीगुड़ी, ओडिशा और गुजरात से आ रहे मटके, व्यापारियों को बेहतर कारोबार की उम्मीद

Clay Pot Water: मटका व्यापारी युवराज ठाकुर के अनुसार गर्मी के दिनों में रोज 100 से 400 मटकों तक की बिक्री हो रही है, जबकि ये मटके सिलीगुड़ी, ओडिशा और गुजरात से मंगाए जाते हैं।

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Mar 11, 2026
छत्तीसगढ़ में देसी फ्रिज की वापसी (photo source- Patrika)

@लक्ष्मी विश्वकर्मा/Clay Pot Water: मार्च की शुरुआत के साथ ही छत्तीसगढ़ में गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। हालात ऐसे हैं कि अभी से मई-जून जैसी गर्मी का एहसास होने लगा है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच लोगों को ठंडे पानी की जरूरत महसूस हो रही है। ऐसे में एक बार फिर देसी फ्रिज यानी मटका लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। छत्तीसगढ़ में हर साल गर्मी शुरू होते ही मटकों की मांग तेजी से बढ़ जाती है।

खास बात यह है कि यहां बड़ी संख्या में मटके कोलकाता, गुजरात, ओडिशा और नागपुर से मंगाए जाते हैं। इन मटकों को मजबूत और आकर्षक डिजाइन के कारण लोग ज्यादा पसंद करते हैं। कुम्हार इन्हें रंग-बिरंगी कलाकारी और डिजाइन से सजाकर बेचते हैं। आजकल बाजार में ऐसे मटके भी मिल रहे हैं जिनमें नल (टैप) लगा होता है, जिससे बिना झुकाए आसानी से पानी निकाला जा सकता है। यही कारण है कि आधुनिक सुविधाओं के बावजूद मटका आज भी लोगों के घरों में अपनी जगह बनाए हुए है।

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छत्तीसगढ़ की गर्मी और मटके की बढ़ती मांग

छत्तीसगढ़ में गर्मी के दिनों में तापमान अक्सर 40 डिग्री के आसपास या उससे ज्यादा पहुंच जाता है। ऐसे में लोगों को ठंडे और प्राकृतिक तरीके से ठंडा किया हुआ पानी ज्यादा राहत देता है।

  • मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है
  • बिजली की जरूरत नहीं होती
  • स्वाद भी हल्का और ताजा लगता है
  • इसी वजह से गरीब से लेकर अमीर तक कई लोग मटके का पानी पीना पसंद करते हैं।

मटके का पानी पीने के फायदे

  • प्राकृतिक ठंडक – मटके की मिट्टी पानी को प्राकृतिक तरीके से ठंडा करती है।
  • शरीर का तापमान संतुलित रखता है – यह शरीर को अचानक ठंडा नहीं करता।
  • पाचन के लिए अच्छा – मिट्टी के बर्तन का पानी पाचन तंत्र के लिए बेहतर माना जाता है।
  • गले के लिए सुरक्षित – बहुत ज्यादा ठंडा न होने के कारण गले को नुकसान नहीं पहुंचाता।
  • पर्यावरण के अनुकूल – इसमें बिजली या प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं होता।

मटके का पानी पीने के नुकसान

  • साफ-सफाई जरूरी – मटका नियमित साफ न किया जाए तो बैक्टीरिया पनप सकते हैं।
  • बहुत ज्यादा ठंडा नहीं होता – कुछ लोगों को फ्रिज जितनी ठंडक नहीं मिलती।
  • जल्दी टूटने का खतरा – मिट्टी का होने के कारण संभालकर रखना पड़ता है।

फ्रिज के पानी पीने के नुकसान

  • बहुत ज्यादा ठंडा पानी गले में खराश और सर्दी-जुकाम बढ़ा सकता है।
  • अचानक ठंडा पानी पीने से पाचन पर असर पड़ सकता है।
  • गर्मी से आने के तुरंत बाद फ्रिज का पानी पीना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
  • लंबे समय तक ज्यादा ठंडा पानी पीने से गले और दांतों की समस्या भी हो सकती है।

डॉक्टर की सलाह

डॉ. अजय शर्मा, जनरल फिजिशियन:

“गर्मी के मौसम में बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने से बचना चाहिए। फ्रिज का बर्फ जैसा ठंडा पानी शरीर के तापमान को अचानक कम कर देता है, जिससे गले और पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है और शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

मटका विक्रेता: युवराज ठाकुर, आमापारा, रायपुर

आमापारा के मटका विक्रेता युवराज ठाकुर बताते हैं कि मटकों का कारोबार लगभग पूरे साल चलता है। हालांकि होली से लेकर अक्षय तृतीया तक इसकी बिक्री सबसे ज्यादा रहती है। गर्मी के मौसम में मटकों की मांग अचानक बढ़ जाती है, क्योंकि लोग ठंडे पानी के लिए मटके का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।

इन राज्यों से आते हैं मटके

युवराज के अनुसार छत्तीसगढ़ में बिकने वाले ज्यादातर मटके पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी, ओडिशा और गुजरात जैसे राज्यों से मंगवाए जाते हैं। गर्मी शुरू होते ही इन राज्यों से बड़ी मात्रा में मटके रायपुर सहित प्रदेश के अलग-अलग बाजारों में पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में मटकों की बिक्री कम रहती है, लेकिन गर्मी के समय में मांग काफी बढ़ जाती है। सामान्य दिनों में करीब 20–30 मटके ही बिक पाते हैं। जबकि तेज गर्मी में यह आंकड़ा बढ़कर 100 से 400 मटके प्रतिदिन तक पहुंच जाता है।

इस साल ज्यादा कारोबार की उम्मीद

युवराज ठाकुर का कहना है कि इस साल मटकों की बिक्री को लेकर अच्छी उम्मीद है। उनका अनुमान है कि इस बार करीब एक लाख रुपए तक की बिक्री हो सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले साल बारिश की वजह से बिक्री प्रभावित हुई थी, जिससे अपेक्षा के मुताबिक कारोबार नहीं हो पाया। इसके बावजूद करीब एक लाख रुपये की लागत में लगभग डेढ़ लाख रुपये तक का मुनाफा हुआ था।

Updated on:
11 Mar 2026 01:45 pm
Published on:
11 Mar 2026 01:44 pm
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