Clay Pot Water: मटका व्यापारी युवराज ठाकुर के अनुसार गर्मी के दिनों में रोज 100 से 400 मटकों तक की बिक्री हो रही है, जबकि ये मटके सिलीगुड़ी, ओडिशा और गुजरात से मंगाए जाते हैं।
@लक्ष्मी विश्वकर्मा/Clay Pot Water: मार्च की शुरुआत के साथ ही छत्तीसगढ़ में गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। हालात ऐसे हैं कि अभी से मई-जून जैसी गर्मी का एहसास होने लगा है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच लोगों को ठंडे पानी की जरूरत महसूस हो रही है। ऐसे में एक बार फिर देसी फ्रिज यानी मटका लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। छत्तीसगढ़ में हर साल गर्मी शुरू होते ही मटकों की मांग तेजी से बढ़ जाती है।
खास बात यह है कि यहां बड़ी संख्या में मटके कोलकाता, गुजरात, ओडिशा और नागपुर से मंगाए जाते हैं। इन मटकों को मजबूत और आकर्षक डिजाइन के कारण लोग ज्यादा पसंद करते हैं। कुम्हार इन्हें रंग-बिरंगी कलाकारी और डिजाइन से सजाकर बेचते हैं। आजकल बाजार में ऐसे मटके भी मिल रहे हैं जिनमें नल (टैप) लगा होता है, जिससे बिना झुकाए आसानी से पानी निकाला जा सकता है। यही कारण है कि आधुनिक सुविधाओं के बावजूद मटका आज भी लोगों के घरों में अपनी जगह बनाए हुए है।
छत्तीसगढ़ में गर्मी के दिनों में तापमान अक्सर 40 डिग्री के आसपास या उससे ज्यादा पहुंच जाता है। ऐसे में लोगों को ठंडे और प्राकृतिक तरीके से ठंडा किया हुआ पानी ज्यादा राहत देता है।
डॉ. अजय शर्मा, जनरल फिजिशियन:
“गर्मी के मौसम में बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने से बचना चाहिए। फ्रिज का बर्फ जैसा ठंडा पानी शरीर के तापमान को अचानक कम कर देता है, जिससे गले और पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है और शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
मटका विक्रेता: युवराज ठाकुर, आमापारा, रायपुर
आमापारा के मटका विक्रेता युवराज ठाकुर बताते हैं कि मटकों का कारोबार लगभग पूरे साल चलता है। हालांकि होली से लेकर अक्षय तृतीया तक इसकी बिक्री सबसे ज्यादा रहती है। गर्मी के मौसम में मटकों की मांग अचानक बढ़ जाती है, क्योंकि लोग ठंडे पानी के लिए मटके का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।
युवराज के अनुसार छत्तीसगढ़ में बिकने वाले ज्यादातर मटके पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी, ओडिशा और गुजरात जैसे राज्यों से मंगवाए जाते हैं। गर्मी शुरू होते ही इन राज्यों से बड़ी मात्रा में मटके रायपुर सहित प्रदेश के अलग-अलग बाजारों में पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में मटकों की बिक्री कम रहती है, लेकिन गर्मी के समय में मांग काफी बढ़ जाती है। सामान्य दिनों में करीब 20–30 मटके ही बिक पाते हैं। जबकि तेज गर्मी में यह आंकड़ा बढ़कर 100 से 400 मटके प्रतिदिन तक पहुंच जाता है।
युवराज ठाकुर का कहना है कि इस साल मटकों की बिक्री को लेकर अच्छी उम्मीद है। उनका अनुमान है कि इस बार करीब एक लाख रुपए तक की बिक्री हो सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले साल बारिश की वजह से बिक्री प्रभावित हुई थी, जिससे अपेक्षा के मुताबिक कारोबार नहीं हो पाया। इसके बावजूद करीब एक लाख रुपये की लागत में लगभग डेढ़ लाख रुपये तक का मुनाफा हुआ था।