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भारत के टॉप 10 वाइल्डलाइफ कॉरिडोर्स कौन से हैं? किस पर खतरा? कैसे बचेगी जंगलों की ये लाइफ लाइन?

Top 10 Wildlife Corridore India: वाइल्डलाइफ कॉरिडोर अकेले वन्यजीवों के लिए बल्कि संपूर्ण इकोसिस्टम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं, इनका टूटना या खंडित होकर बिखरना भी सिर्फ वन्यजीवों के लिए नहीं प्रकृति के जीवन को खतरा है, जानें देश के महत्वपूर्ण टॉप 10 वाइल्डलाइफ कॉरिडोर
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Jul 08, 2026
Top 10 Wildlife Corridor India
Top 10 Wildlife Corridor India: भारत के टॉप 10 वाइल्डलाइफ कॉरिडोर, जो हैं सुरक्षित, किया जा रहा उनके संरक्षण का हर संभव प्रयास। (photo: AI Generated)

Top 10 Wildlife Corridor India: वाइल्डलाइफ कॉरिडोर्स केवल जंगलों को जोड़ने वाले रास्ते भर नहीं हैं, बल्कि ये जीवन रेखा हैं उन बेजुबान जीवों की जो हमारे संपूर्ण इकोसिस्टम को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन जब जंगल इंसानी बस्तियों, हाईवे और रेलवे लाइनों के कारण खंडित होकर बंटने लग जाते हैं, तो यही कॉरिडोर मानव-वन्यजीवों के बीच संघर्ष का कारण बन जाते हैं। patrika.com पर टूटती सरहद के भाग 3 में जानें क्या भारत के टॉप 10 सबसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स के बारे में वे क्यों हैं महत्वपूर्ण, उनके लिए खतरा क्या और संरक्षण के सामने चुनौतियां?

1. कान्हा-पेंच वाइल्डलाइफ कॉरिडोर, मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश के कान्हा-पेंच वाइल्डलाइफ कॉरिडोर को देश का सबसे अहम कॉरिडोर माना जाता है। वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (WCT) और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) ने इस पर गहनता से अध्ययन किया है। यह कॉरिडोर और मेटा पॉपुलेशन यानी बाघों की आबादी के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्यों है महत्वपूर्ण?

यह वाइल्डलाइफ कॉरिडोर मध्यप्रदेश के सतपुड़ा जंगलों के दो सबसे बड़े बाघ अभ्यारण्यों कान्हा और पेंच को आपस में जोड़ता है। बाघों की जेनेटिक विविधता को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है, ताकि 'इनब्रीडिंग' यानी एक ही परिवार में प्रजनन से होने वाली बीमारियों से बचाया सके।

​मुख्य प्रजातियां: ये वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बंगाल टाइगर, तेंदुआ, गौर या भारतीय बाइसन और चौसिंघा का घर है।

​सबसे बड़ा खतरा

नेशनल हाईवे 44 का चौड़ीकरण, रेल लाइनों का विस्तार और गलियारे के बीच बसे गांवों का कान्हा और पेंच टाइगर रिजर्व पर बढ़ता दबाव इसके लिए बड़ा खतरा है।

​संरक्षण के प्रयास

NH-44 पर देश के सबसे पहले और बड़े 'अंडरपास' बनाए गए हैं, ताकि नीचे से वन्यजीव सुरक्षित निकल सकें और ऊपर गाड़ियां चलती रहें।

2-राजाजी-कॉर्बेट कॉरिडोर (उत्तराखंड)

राजाजी-कॉर्बेट वाइल्डलाइफ कॉरिडोर शिवालिक की पहाड़ियों और तराई के मैदानों के बीच वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करता है। वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (WII) इस वन्यजीव गलियारे पर लगातार नजर रखता है।

​क्यों महत्वपूर्ण हैं यह कॉरिडोर

यह गलियारा उत्तर भारत में हाथियों और बाघों के सबसे पश्चिमी छोर की आबादी को मुख्य जंगलों से जोड़ता है।

​मुख्य प्रजातियां: एशियाई हाथी और बंगाल टाइगर्स के लिए यह सुरक्षित आवाजाही का केंद्र है।

​सबसे बड़ा खतरा क्या?

हरिद्वार-देहरादून नेशनल हाईवे, रेलवे ट्रैक, जिस पर ट्रेनों से टकराकर हाथियों की मौत होती है और गंगा नदी के किनारे बढ़ता शहरीकरण भी इस गलियारे पर लगातार दबाव बना रहा है।

​संरक्षण के प्रयास जारी

यहां भी फ्लाईओवर बनाकर वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण का प्रयास किया गया है। इसके तहत मोतीचूर-चीला क्षेत्र में तीन बड़े फ्लाईओवर बनाए गए हैं, ताकि हाथी उनके नीचे से आसानी से गंगा नदी तक पहुंचकर अपनी प्यास बुझा सकें। रेलवे पटरियों पर 'थर्मल सेंसर' लगाए जा रहे हैं, जो हाथियों की मौजूदगी पर अलर्ट करते हैं।

3. कूनो-माधव-रणथंभौर कॉरिडोर, मध्य प्रदेश-राजस्थान

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रोजेक्ट चीता एक्शन प्लान और WII की रिपोर्ट में कूनो-माधव-रणथंभौर वाइल्डलाइफ कॉरिडोर को विशेष तौर पर हाईलाइट किया गया है। मध्यप्रदेश और राजस्थान को जोड़ने वाला यह कॉरिडोर चीता प्रोजेक्ट के कारण बेहद अहम हो जाता है।

​यह क्यों महत्वपूर्ण कॉरिडोर

कूनो नेशनल पार्क से चीतों के भविष्य में फैलने के साथ ही इसकी अहमियत और भी बढ़ जाएगी। लेकिन यह कॉरिडोर पहले से ही राजस्थान के रणथंभौर से बाघों के मध्य प्रदेश में आने-जाने के लिए यह कॉरिडोर महत्पूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रमुखप्रजातियां कौन-कौन सी: चीता, बंगाल टाइगर, तेंदुआ और चिंकारा इस वाइल्डलाइफ कॉरिडोर को आबाद किए हुए हैं।

​सबसे बड़ा खतरा क्या?

चंबल नदी के आस-पास का बीहड़ इलाका जहां अवैध खनन, कृषि विस्तार, खुले घूमते मवेशियों के कारण यहां शिकार की कमी देखी जाती है।

​संरक्षण के प्रयास भी

वन विभाग की ओर से कूनो और माधव नेशनल पार्क के बीच के वनों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। 'इको-रिस्टोरेशन' के तहत स्थानीय समुदायों को चीता मित्र बनाकर जागरूक किया जा रहा है।

4. काजीरंगा-कारबी आंगलोंग कॉरिडोर, असम

​पूर्वोत्तर भारत का यह वन्यजीव गलियारा सबसे संवेदनशील माना जाता है। यह कॉरिडोर ब्रह्मपुत्र नदी की बाढ़ के समय हजारों जीवों की जान बचाता है।

क्यों महत्वपूर्ण

हर साल जब ब्रह्मपुत्र नदी में बाढ़ आती है, तो काजीरंगा के जानवर ऊंचे इलाकों कारबी आंगलोंग की पहाड़ियों की तरफ भागते हैं। इन पहाड़ियों तक जाने के लिए वे 9 प्रमुख छोटे गलियारों का उपयोग करते हैं तब इनकी जान बच पाती है।

प्रमुख प्रजातियां: एक सींग वाला गैंडा, एशियाई हाथी और रॉयल बंगाल टाइगर्स की जीवनरेखा है यह कॉरिडोर।

​सबसे बड़ा खतरा

नेशनल हाईवे 37 इस वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। यह काजीरंगा और कारबी आंगलोंग के बीच से गुजरता है। इसके साथ ही चाय के बागानों का अनियंत्रित विस्तार भी इस कॉरिडोर को खंडित कर रहे हैं, जिससे यहां की मुख्य प्रजातियां प्रभावित हो सकती हैं।

​संरक्षण के प्रयास

असम सरकार और NTCA ने इस हाईवे पर वाहनों की गति सीमा तय कर दी है, ताकि गाड़ियों का शोर या हादसे जानवरों की सेहत और जान का जोखिम पैदा न कर सकें। इसके साध ही यहां सेंसर आधारित कैमरे लगाए हैं। बाढ़ के समय वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह नियंत्रण में रखा जाता है।

5. वायनाड-बांदीपुर-नागरहोल कॉरिडोर, पश्चिमी घाट- केरल/कर्नाटक

​यह वाइल्डलाइफ कॉरिडोर नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है। यह ऐसा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जहां दुनिया में एशियाई हाथियों की सबसे घनी आबादी पाई जाती है।

​क्यों महत्वपूर्ण है?

यह वन्यजीव गलियारा कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के जंगलों को आपस में जोड़ता है। मौसम बदलने पर पानी और चारे की तलाश में हाथी इसी रास्ते से माइग्रेट करते हैं।

मुख्य प्रजातियां: इस वाइल्डलाइफ कॉरिडोर में एशियाई हाथी, बाघ और नीलगिरि तहर मुख्य प्रजातियां पाई जाती हैं।

​सबसे बड़ा खतरा क्या?

यहां रात के समय हाईवे पर भारी ट्रैफिक वन्यजीवों के लिए खतरा बना रहा। रिसॉर्ट्स और होमस्टे लगातार बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही लैंटाना जैसे तेजी से फैलने और मिट्टी उर्वरता को नुकसान पहुंचाने वाले विदेशी पौधे भी वन्यजीवों के लिए खतरा साबित हो रहे हैं।

​संरक्षण के प्रयास

बांदीपुर नेशनल पार्क से गुजरने वाले हाईवे पर रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक गाड़ियों के आने-जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इस प्रतिबंध को वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज से सुप्रीम कोर्ट ने भी सही माना है।

6. बांधवगढ़-संजय डूबरी कॉरिडोर, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश का बांधवगढ़ और संजय डूबरी वाइल्डलाइफ कॉरिडोर मध्य भारत का सबसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर है। यह बाघों को छत्तीसगढ़ के जंगलों तक जाने का रास्ता देता है।

​क्यों महत्वपूर्ण है?

बांधवगढ़ में बाघों की संख्या सबसे ज्यादा है। इस कॉरिडोर से युवा बाघ अपनी नई टेरिटरी खोजने के लिए संजय डूबरी और उससे आगे गुरु घासीदास नेशनल पार्क, छत्तीसगढ़ के गलियारे की ओर बढ़ जाते हैं।

मुख्य प्रजातियां: बंगाल टाइगर, सुस्त भालू और तेंदुआ इस वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की प्रमुख प्रजातियां है।

​सबसे बड़ा खतरा क्या?

कोयला खदानों के साथ ही लगातार बढ़तीं इंसानी बस्तियां और मवेशियों के लिए जंगलों का अत्यधिक दोहन इस वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के लिए खतरा बनकर उभर रहे हैं।

​संरक्षण के प्रयास

WCT और वन विभाग मिलकर यहां 'कम्युनिटी पेट्रोलिंग' को बढ़ावा दे रहे हैं। कॉरिडोर के संवेदनशील हिस्सों में माइनिंग गतिविधियों पर सख्त नियम लागू किए गए हैं। इनके पालन को लेकर भी सख्ती बरती जाती है।

​7. सत्यमंगलम-बीआर हिल्स कॉरिडोर, तमिलनाडु-कर्नाटक

​पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट जहां मिलता है, उसी पॉइंट पर स्थित सत्यमंगलम-बीआर हिल्स कॉरिडोर दक्षिण भारत के इकोसिस्टम की रीढ़ माना जाता है।

क्यों महत्वपूर्ण?

यह पूर्वी और पश्चिमी घाट के वन्यजीवों की आबादी के बीच एक पुल का काम करता है।

प्रमुख प्रजातियां: इस वन्ययजीव गलियारे में एशियाई हाथी, बाघ और गौर हैं।

​सबसे बड़ा खतरा क्या?

मैसूर-सत्यमंगलम रोड पर वाहनों का बढ़ता दबाव और जंगलों में पेड़ों की अवैध कटाई मानव-वन्यजीव संघर्ष के रूप बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहे हैं।

​संरक्षण के प्रयास

वन विभाग ने यहां 'एंटी-पोचिंग कैंप' की संख्या बढ़ाई है ताकि अवैध शिकार रोके जा सकें। हाथियों के रास्तों को सुगम बनाने के लिए निजी जमीनों को खरीदकर वन क्षेत्र में शामिल किए जाने की कोशिशें जारी हैं।

​8. सिमलीपाल-सत्कोसिया कॉरिडोर, ओडिशा

​ओडिशा के इस कॉरिडोर पर WII और NTCA खास तौर पर निगरानी रखे हुए है। दोनों संयुक्त रूप से इसके संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं। सत्कोसिया में बाघों की आबादी को फिर से बसाने के लिए यह रास्ता बहुत जरूरी है।

​क्यों महत्वपूर्ण?

सिमलीपाल टाइगर रिजर्व के विशाल जंगलों को सत्कोसिया और महानदी हाथी रिजर्व से जोड़ने के कारण यह महत्वपूर्ण कॉरिडोर माना जाता है।

प्रमुख प्रजातियां: यहां कि मुख्य वन्यजीव प्रजातियों में हाथी, बाघ, और सियार शामिल हैं।

​सबसे बड़ा खतरा क्या?

यहां बड़े पैमाने पर होने वाला मवेशी चरागाह बड़ी मुसीबत भी है। महुआ चुनने के लिए जंगलों में लगाई जाने वाली आग और माइनिंग बेल्ट जैसे कारक कॉरिडोर के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।

​संरक्षण के प्रयास

'प्रोजेक्ट टाइगर' के तहत इस कॉरिडोर के गांवों को स्वेच्छा से दूसरी जगह बसाने का काम जारी है, ताकि वन्यजीवों को बिना किसी बाधा के आवाजाही का रास्ता मिल सके।

​9. ताडोबा-अंधारी से मेलघाट कॉरिडोर, महाराष्ट्र

​विदर्भ क्षेत्र का यह गलियारा बाघों के स्वतंत्र विचरण के लिए मशहूर है। यह ताडोबा-अंधारी-मेलघाट कॉरिडोर महाराष्ट्र की वाइल्डलाइफ की जीवन रेखा है।

क्यों महत्वपूर्ण?

ताडोबा के 'सोर्स पॉपुलेशन' यानी ऐसी जगह जहां बाघों की संख्या तेजी से बढ़ती है, वहां के बाघ इसी रास्ते से मेलघाट और मध्य प्रदेश के जंगलों तक पहुंचते हैं।

प्रमुख प्रजातियां: बंगाल टाइगर, तेंदुआ, और ढोल यानी जंगली कुत्ते इस कॉरिडोर की प्रमुख प्रजातियों में शामिल हैं।

सबसे बड़ा खतरा?

रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण और चौड़ीकरण होने के साथ ही यहां जारी सिंचाई परियोजनाओं के तहत बहने वाली नहरें वन्यजीवों के लिए खतरा बनी हूई हैं, जिनमें गिरकर वन्यजीव मारे जाते हैं।

​संरक्षण के प्रयास

वन्यजीवों की आवाजाही के प्रमुख कॉरिडोर में जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने महाराष्ट्र वन विभाग ने नहरों के ऊपर 'क्रॉसिंग ब्रिज' बनाए हैं। उधर रेलवे पटरियों के किनारे फेंसिंग और अंडरपास का निर्माण किया जा रहा है, ताकि वन्यजीव और उनके कॉरिडोर बेहतर तरीके से संरक्षित किए जा सकें।

​10. सुंदरबन-भूमि गलियारा, भारत और बांग्लादेश सीमा​

सुंदरबन-भूमि वाइल्डलाइफ कॉरिडोर भारत का सबसे अनोखा मैंग्रोव कॉरिडोर माना जाता है। यह भारत के सुंदरबन को बांग्लादेश के सुंदरबन से जोड़ता है।

​क्यों महत्वपूर्ण है?

जलवायु परिवर्तन के दौर में खारे पानी के बढ़ते स्तर के कारण बाघ और अन्य वन्यजीव खुद को जीवित रखने के लिए इस पार से उस पार जाने को मजबूर हैं। लेकिन उनकी इस मजबूरी में यही वन्यजीव गलियारा अहम भूमिका निभाता है।

प्रमुख प्रजातियां: रॉयल बंगाल टाइगर, एक्वाटिक या तैरने वाले बाघ, इरावदी डॉल्फिन और एस्टुअरीन मगरमच्छ इस वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की खासियत हैं।

​सबसे बड़ा खतरा

समुद्र का बढ़ता जलस्तर, प्लास्टिक प्रदूषण, अवैध मछली पकड़ना और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होने वाली इंसानी हलचल इस कॉरिडोर के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।

​संरक्षण के प्रयास

भारत और बांग्लादेश की सरकारें, NTCA संयुक्त रूप से सुंदरबन की निगरानी करते हैं। दोनों देशों के बीच 'जॉइंट वर्किंग ग्रुप' बनाया गया है, ताकि मैंग्रोव के इस इकोसिस्टम और कॉरिडोर को सुरक्षित-संरक्षित रखा जा सके। वहीं इंसान-वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सके।

जंगल में विकास को 'लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर गाइडलाइंस' के तहत मिल रही मंजूरी

​भारत में इन वन्यजीव कॉरिडोर्स के संरक्षण और चुनौतियां बताती WII और NTCA रिपोर्ट्स के मुताबिक अब बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखकर पूरी की जा रही विकास परियोजनाओं जैसे हाईवे और रेलवे को अब 'लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर गाइडलाइंस' के तहत ही मंजूरी दी जा रही है। जो मनमर्जी से किए जाने वाले विकास को रोकती है। इसके तहत अब बिना अंडरपास या ओवरपास बनाए जंगलों से सड़कें नहीं निकाली जा सकतीं। देशभर के वैज्ञानिक इन वाइल्डलाइफ कॉरिडोर्स को बचाने की दिशा में भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी कदम बता रहे हैं।


Published on:
08 Jul 2026 07:00 am