
Human wildlife conflict tiger corridors: इंसान-वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष में सहअस्तित्व के सवाल पर देशभर के वैज्ञानिकों ने मध्य प्रदेश को माना इंसान-वन्यजीवों के बीच सहअस्तित्व की प्रयोगशाला। (photo: AI Generated)
Human Wildlife Conflict: वन्यजीवों के लिए केवल एक जंगल काफी नहीं, जंगलों के अस्तित्व के प्रहरी माने जाने वाले बाघ, शेर, चीते, तेंदुओं को प्राकृतिक रूप से मिले रास्तों यानी वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की जरूरत होती है। जहां ये अपने नए घर खोज सकें, अपना दायरा बढ़ा सकें और सुरक्षित आवाजाही कर सकें। लेकिन जब इन रास्तों के बीच हाईवे, रेलवे लाइन, खदानें और उद्योग या फिर बढ़ती जन आबादी आती है, वहीं इंसान और वन्यजीव आमने-सामने आने लगते हैं। मध्यप्रदेश एक ऐसा वाइल्डलाइफ जोन है, जो वन्यजीवों संरक्षण, उनकी समृद्धता और जैव विविधता के लिए जाना-पहचाना जाता है। अगर हम यह कहें तो गलत नहीं होगा कि देशभर के वैज्ञानिकों के लिए एमपी Human Wildlife Coexistence Landscape बना हुआ है, जहां पहले से ही संरक्षित वन क्षेत्र और प्राकृतिक कॉरिडोर हैं जो, एक से दूसरे जंगल को जोड़े हुए हैं। यदि इन कॉरिडोर की सुरक्षा नहीं की गई, तो आने वाले समय में मानव-वन्यजीव संरक्षण और ज्यादा बढ़ सकते हैं। लेकिन यदि इन्हें बचा लिया गया, तो मध्य प्रदेश दुनियाभर के लिए सहअस्तित्व का एक मॉडल बनकर उभर सकता है। इस वैज्ञानिक पड़ताल में आगे समझते हैं कि आखिर वाइल्डलाइफ कॉरिडोर क्या हैं, ये क्यों टूट रहे हैं और इनका मानव-वन्यजीव संघर्ष से सीधा संबंध क्या है? 'टूटती सहरद' भाग- 2-
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